आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | आषाढ़ शुक्ल पंचमी | शनिवार

नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी | योग: वरीयान | करण: बव

पर्व विशेष : | तदनुसार 18 जुलाई 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | आषाढ़ शुक्ल पंचमी | शनिवार

नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी | योग: वरीयान | करण: बव

पर्व विशेष : | तदनुसार 18 जुलाई 2026

वैश्विक महासंकट और भारतीय ऋषि परम्परा के समाधान

यह लेख महामारी, आपदा और सामाजिक संकटों के संदर्भ में भारतीय ऋषि परम्परा, चरक संहिता, अथर्ववेद और पौराणिक ग्रन्थों में वर्णित प्राचीन आपदा-प्रबन्धन दृष्टि का विश्लेषण करता है। इसमें बताया गया है कि संकट काल में संयम, एकान्तवास, सामाजिक अनुशासन और शास्त्रीय निर्देश समाज की रक्षा के प्रभावी साधन रहे…

सामाजिक समरसता के आलोक में गोटुल

बस्तर अंचल के समुदायों में गोटुल ज्ञान का एक ऐसा केंद्र है, जहाँ नई पीढ़ी अपनी संस्कृति, जीवन के महत्वपूर्ण संस्कारों, सामाजिक कर्तव्यों और परंपराओं को सीखती है। सामाजिक समरसता और उत्तरदायित्व का जो बोध यहाँ दिखाई देता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। आइए, इस लेख के माध्यम से जानते…

प्रजातंत्र की अवधारणा- भारत के इतिहास की नजर से

यह लेख भारत में लोकतंत्र और गणतंत्र की अवधारणा के ऐतिहासिक विकास को सरल और तथ्यात्मक रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें पश्चिमी लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ-साथ वैदिक काल, गणराज्यों, पंचायत व्यवस्था और ग्राम स्वराज की भारतीय परंपरा का विश्लेषण किया गया है। लेख यह स्पष्ट करता है कि जनभागीदारी…

जनजातीय समाज की न्याय व्यवस्था

यह लेख जनजातीय समाज की प्राचीन न्याय व्यवस्था का परिचय कराता है, जिसमें मुण्डा–उराँव जैसे समुदायों की स्वशासन पर आधारित पंचायत संरचना, पदानुक्रम, निर्णय-प्रक्रिया और सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं के सामूहिक स्वरूप को समझाया गया है। बिना लिखित कानून के भी यह समाज न्याय, सहमति और पारदर्शिता पर आधारित एक सुव्यवस्थित और…

जनजातीय वर्ग के विरुद्ध अंग्रेजों के षड्यंत्र

जनजातीय महापुरुषों और सामाजिक गौरव का पुनर्स्मरण: जनजातीय गौरव दिवस जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। बिरसा मुंडा जी के जन्म दिवस को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में स्वीकार किया गया है। यह दिन केवल…

जनजातीय वर्ग का सामाजिक और आध्यात्मिक दर्शन

यह लेख जनजातीय समाज के जीवन-मूल्यों, देवत्व, न्याय व्यवस्था और सामाजिक संतुलन का विश्लेषण करता है। यह दिखाता है कि जिन्हें पिछड़ा कहा गया, वही समाज आज भी मानवता, समानता और सामूहिक जीवन के उच्चतम आदर्शों को जीवित रखे हुए है।

प्राचीन गुरुकुल पद्धति और शिक्षा के सरोकार

प्राचीन भारतीय गुरुकुल प्रणाली केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक आधारों पर टिकी थी। यह शिक्षा पद्धति चरित्र निर्माण, व्यावहारिक कौशल और सर्वांगीण विकास पर केंद्रित थी, जिसने भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को सदियों तक अक्षुण्ण रखा।

जानिए बस्तर के घोटुल को

इसे बस्तर का दुर्भाग्य ही कहा जाना चाहिये कि इसे जाने-समझे बिना इसकी संस्कृति, विशेषत: इसकी जनजातीय संस्कृति, के विषय में जिसके मन में जो आये कह दिया जाता रहा है। गोंड जनजाति, विशेषत: इस जनजाति की मुरिया शाखा, में प्रचलित रहे आये "घोटुल" संस्था के विषय में मानव विज्ञानी…

गौवंश का गुरुकुल : दईहान

छत्तीसगढ़ में गौ-पालन की समृद्ध परंपरा रही है। पहले गांवों में प्राय: हर घर में गाय रखी जाती थी और घर में अनिवार्यतः कोठा(गौशाला)भी हुआ करती थी। अब घर से गौशाला गायब है और गौशाला के स्थान पर गाड़ी रखने का शेड बना मिलता है; जहां गाय की जगह मोटरसाइकिल…

सामाजिक नियमों में बंधा हुआ बस्तर का जनजातीय समाज

बस्तर का जनजातीय समाज अपनी अलौकिक सांस्कृतिक विरासत के लिये जाना जाता है और यही संस्कृति उनकी पहचान है। इस संस्कृति को उनके पूर्वजों ने उसी रूप में सौंपा है, जिस रूप में उन्होने अपने समय में निभाया था। अपनी सांस्कृतिक विरासत का आज की पीढ़ी भी उसी तरह से…

भारतीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक रथ दूज पर्व

छत्तीसगढ़ अंचल में रथदूज या रथयात्रा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, जगह-जगह भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है तथा इस दिन मांगलिक कार्य करना भी शुभ माना जाता है। वैसे तो मुख्य रथयात्रा का पर्व उड़ीसा के पुरी में मनाया जाता है, परन्तु छत्तीसगढ़ की सीमा साथ…

बस्तर की मुरिया जनजाति का प्राचीन विश्वविद्यालय घोटुल

इसे बस्तर का दुर्भाग्य ही कहा जाना चाहिये कि इसे जाने-समझे बिना इसकी संस्कृति, विशेषत: इसकी वनवासी संस्कृति, के विषय में जिसके मन में जो आये कह दिया जाता रहा है। गोंड जनजाति, विशेषत: इस जनजाति की मुरिया शाखा, में प्रचलित रहे आये "घोटुल" संस्था के विषय में मानव विज्ञानी…

अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार : छत्तीसगढ़ निर्माण दिवस

पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का सपना हमारे पुरखों ने देखा था और उस सुनहरे स्वप्न को हकीकत का अमलीजामा पहनाने के लिए संघर्ष और आंदोलन का एक लंबा दौर चला। पं.सुंदरलाल छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रथम स्वप्नदृष्टा थे तत्पश्चात डॉ खूबचंद बघेल, संत पवन दीवान, ठाकुर रामकृष्ण सिंह और श्री चंदूलाल…

बस्तर के जाति एवं जनजाति समाज में जोगनी

दक्षिण कौशल का दक्षिणी भाग बस्तर संभाग कहलाता है, बस्तर में किसी भी नए फसल उपज को सबसे पहले अपने परगना के देवता कुलदेवता इष्ट देवता और पितृ देवता में अर्पण करने की परंपरा है। उसके बाद ही बस्तर का जाति एवं जनजाति समाज उस फसल या उपज को ग्रहण…