आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख शुक्ल षष्ठी | बुधवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: अतिगंड | करण: कौलव

पर्व विशेष : | तदनुसार 22 अप्रैल 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख शुक्ल षष्ठी | बुधवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: अतिगंड | करण: कौलव

पर्व विशेष : | तदनुसार 22 अप्रैल 2026

वेदो के प्रहरी - महर्षि दयानंद सरस्वती

जानिए उस महापुरुष की गाथा, जिसने 'स्वराज' का मंत्र दिया और आधुनिक भारत की नींव रखी। महर्षि दयानंद सरस्वती के क्रांतिकारी जीवन और आर्य समाज के गौरवशाली इतिहास को समझने के लिए क्लिक करें।

बस्तर का वनवासी क्रान्तिवीर भूमकालेया गुण्डाधूर

सन् 1910 का बस्तर भूमकाल अंग्रेजी अत्याचारों के विरुद्ध वनवासियों का सशक्त विद्रोह था, जिसका नेतृत्व वीर क्रांतिकारी गुण्डाधूर ने किया। जंगल अधिकारों, बेगारी, धर्मांतरण और शोषण से त्रस्त जनजातियों को उन्होंने संगठित किया। पारंपरिक अस्त्रों के साथ शुरू हुआ यह गुप्त संघर्ष ब्रिटिश प्रशासन को हिला गया और गुण्डाधूर…

आज़ादी के लिए प्राणों की परवाह न करने वाली वनबाला दयावती : स्वतंत्रता दिवस विशेष

यह आलेख 16 वर्षीय वनबाला वीरांगना दयावती कंवर के अद्भुत साहस की कहानी है, जिन्होंने 1930 में तमोरा गांव के जंगल सत्याग्रह के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज और संगीनों के सामने डटे रहकर सत्याग्रहियों की रक्षा की। दयावती का यह बलिदान और निर्भीकता छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में…

आजादी के बाद राजा प्रवीर चंद भंजदेव के निजीधन से निर्मित तालाब

प्रजावत्सल शासक प्रवीरचंद भंजदेव और उनकी संवेदनशीलता ।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल वीरांगना रानी दुर्गावती

‘‘यत्र नार्यस्तु पूजयंते, रमंते तत्र देवता,‘‘ अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवताओं का वास होता है। भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का स्थान दिया गया है। देश में माँ दुर्गा को शक्ति की देवी, लक्ष्मी को धन की देवी, सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी…

मिशनरियों के विरुद्ध उलगुलान के नायक बिरसा मुंडा

इतिहास में ऐसे नायक बिरले ही होते हैं जो समाज उद्धार के लिए जन्म लेते हैं तथा समाज को अंधेरे से उजाले की ओर लेकर आते हुए तमसो मा गमय की सुक्ति को चरितार्थ करते हैं। अंग्रेजों के संरक्षण में ईसाईयों द्वारा मचाये गये धर्म परिवर्तन अंधेरे को दूर करने…

विश्व कल्याणकारी सनातन धर्म प्रवर्तक आदि शंकराचार्य

आठ वर्ष की आयु में दक्षिण से निकले और नर्मदा तट के ओमकारेश्वर में गुरु गोविंदपाद के आश्रम पर जा पहुंचे। जहां समाधिस्थ गुरु ने पूछा, "बालक! तुम कौन हो"?

बालक शंकर ने उत्तर दिया," स्वामी! मैं ना तो मैं पृथ्वी हूं, ना जल हूं ना अग्नि, ना वायु, ना…

महा मानव महात्मा गाँधी और छत्तीसगढ़ : पुण्यतिथि विशेष

महात्मा गांधी विश्व के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने देश के ऐतिहासिक स्वतंत्रता संग्राम को सामाजिक जागरण के अपने रचनात्मक अभियान से भी जोड़ा, जिसमें शराबबन्दी ,अस्पृश्यता निवारण, सर्व धर्म समभाव, सार्वजनिक और व्यक्तिगत स्वच्छता, खादी और ग्रामोद्योग, ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन, पंचायती राज और बुनियादी शिक्षा जैसे कई…

संसार को भारत के ‘स्व’ से परिचित कराने वाले स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद ऐसे संन्यासी हैं, जिन्होंने हिमालय की कंदराओं में जाकर स्वयं के मोक्ष के प्रयास नहीं किये बल्कि भारत के उत्थान के लिए अपना जीवन खपा दिया। विश्व धर्म सम्मलेन के मंच से दुनिया को भारत के ‘स्व’ से परिचित कराने का सामर्थ्य स्वामी विवेकानंद में ही था, क्योंकि…

गुरु घासीदास की जन्मस्थली गिरौदपुरी

छत्तीसगढ़ को संत महात्माओं की जन्म स्थली कहा जाता है। यहाँ की शस्य श्यामला पावन भूमि में अनेकों संत महात्माओं का जन्म हुआ। उनमें 18 वीं शताब्दी के महान संत सतनाम सम्प्रदाय के प्रणेता, सामाजिक क्रांति के अग्रदूत गुरु घासीदास का जन्म माघ पूर्णिमा 18 दिसम्बर 1756 को महानदी के…

बाबासाहेब के निर्वाणकाल की व्यथा : पुण्यतिथि विशेष

कबीर तहां न जाइए, जहाँ सिद्ध को गाँव, स्वामी कहे न बैठना, फिर फिर पूछे नांव। 
इष्ट मिले अरु मन मिले मिले सकल रस रीति, कहैं कबीर तहां जाइए, जंह संतान की प्रीति। 

बाबासाहेब अम्बेडकर के कांग्रेस से जुड़ाव को कबीर के इन दोहों के माध्यम से पुर्णतः प्रकट किया…

डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर : जीवन कार्य

(14 अप्रेल, जयन्ती पर विशेष)

दलितों के मसीहा, संविधान निर्माता, बाबा साहब आदि अनेकों विशेषणों से सम्बोधित किए जानेवाले डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल, 1891 को हुआ। भीमराव, रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की चौदहवीं संतान थे। वे हिन्दू महार जाति से…

बस्तर की महान क्रांति का नायक गुंडाधुर: भूमकाल विद्रोह

रायबहादुर पंडा बैजनाथ (1903 – 1910 ई.) राज्य में अधीक्षक की हैसियत से नियुक्त हुए थे। पंडा बैजनाथ का प्रशासन निरंकुशता का द्योतक था जबकि उनके कार्य प्रगतिशील प्रतीत होते थे। उदाहरण के लिये शिक्षा के प्रसार के लिये उन्होंने उर्जा झोंक दी किंतु इसके लिये आदिवासियों को विश्वास में…

ह्रदय से अत्यंत ही भावुक लेकिन तेजस्वी नेता थे अटल बिहारी वाजपेयी : अशोक बजाज

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष है. हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं. पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं. कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है. यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है, यह तर्पण

जन-जागरण तथा सामाजिक क्रांति के अग्रदूत : पंडित सुन्दरलाल शर्मा

छत्तीसगढ़ केवल एक जनजातीय क्षेत्र ही नहीं है। यह एक ऐसा वैचारिक केन्द्र भी रहा है,जहाँ से एक सामाजिक परिवर्तन का सूत्रपात हुआ। शोषित उपेक्षित दलित समाज को मुख्यधारा में जोड़नेे का कार्य जहां से प्रारंभ हुआ, वह छत्तीसगढ़ ही है। इसमें पंडित सुन्दरलाल शर्मा की एक महती भूमिका रही…

सोनाखान के बलिदानी वीरनारायण सिंह : पुण्यतिथि विशेष

स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी भारत में सुलग रही थी और राजे-रजवाड़े अंग्रेजी दमन के कारण अंग्रेजों के खिलाफ़ लामबंद हो रहे थे। उस समय यह स्वतंत्रता आन्दोलन पूरे भारत में फ़ैल रहा था। छत्तीसगढ़ अंचल भी इससे अछूता नहीं था। यहाँ भी 1857 के आन्दोलन में स्वतंत्रता की चाह लिए…

संस्कृत ग्रंथ 'रामायण' का तमिल में अनुवाद : चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म दिसम्बर माह की दस तारीख को 1878 में मद्रास के थोरपल्ली ग्राम में हुआ था। आप राजनेता, वकील, लेखक, स्वतंत्रता सेनानी, भारत के अंतिम गवर्नर जनरल होने के साथ दार्शनिक भी थे। राजगोपालचारी को कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी के रूप में भी चुना गया था। अंतिम…

व्यक्ति स्वतंत्रता एवं व्यक्ति विकास के पक्षधर दलितों के मसीहा : डॉ बाबा साहेब आम्बेडकर

स्वतंत्रता पूर्व के कालखंड में महात्मा गांधी एवं डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर का प्रभावशाली व्यक्तित्व राजनीतिक शक्तियों तथा समाज सुधार का प्रतिबिंब था। दोनों ही नेतृत्व उच्च शिक्षित एवं अपनी राजनैतिक सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ समाज के दलितो एवं वंचितों के सर्वांगीण विकास एवं उन्नति के लिए जीवनपर्यंत संघर्षरत रहे…

गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्व विद्यालय में 5-6 नवम्बर को दो दिवसीय शोध संगोष्ठी

दक्षिण कोसल का इतिहास, संस्कृति, सभ्यता एवं समाज विषयक राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का दो दिवसीय आयोजन 5 एवं 6 नवम्बर 2019 को गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय में सेंटर फ़ॉर स्टडीज ऑन हॉलेस्टिक डेवलपमेंट, रायपुर एवं गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में हो रहा है।

इस संगोष्ठी में…

छत्तीसगढ़ में गाँधी का प्रवास व प्रभाव

दुनिया के इतिहास में मोहनदास करमचंद गाँधी, जिन्हें हम महात्मा गाँधी के रूप में जानते एवं पहचानते है, एक अमिट नाम है। भारत में अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में महात्मा गाँधी ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे पूरे देश के भीतर एक राजनैतिक, सामाजिक एवं…

दक्षिण कोसल में लघु पत्रिका आंदोलन : एक वो भी ज़माना था !

आधुनिक हिन्दी साहित्य की विकास यात्रा में लघु पत्रिका आंदोलन का भी एक नया पड़ाव आया था। देश के हिन्दी जगत में मुख्य धारा की पत्रिकाओं से इतर यह एक अलग तरह की साहित्यिक धारा थी ।  भारतीय इतिहास में दक्षिण कोसल के नाम से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में इस नयी…

ताको नाम कबीर : कबीर पूर्णिमा

भारत में कोई ऐसा व्यक्ति हुआ है, जिसके साहित्य पर सबसे अधिक पीएचडी हुई हैं, उसका नाम कबीर है। कबीर भारत की संत परम्परा से आते हैं और आडम्बर के विरुद्ध समाज को मथ डालते हैं। उसके पश्चात जो नवनीत निकल कर आता है, उसे कबीर विचार धारा कहा जाता…

स्वामीजी का वाङ्गमय पढ़कर मेरी देशभक्ति हजारों गुना बढ़ गई है : महात्मा गांधी

नवयुग के निर्माता स्वामी विवेकानन्दजी ने कहा था, “मैं भविष्य को नहीं देखता, न ही उसे जानने की चिन्ता करता हूं। किन्तु, एक दृश्य मैं अपने मन:चक्षुओं से स्पष्ट देख रहा हूं, यह प्राचीन मातृभूमि एक बार पुन: जाग गई है और अपने सिंहासन पर आसीन है - पहले से…