आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | श्रवण शुक्ल चतुर्थी | रविवार

नक्षत्र: हस्त | योग: साध्य | करण: विष्टि

पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अगस्त 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | श्रवण शुक्ल चतुर्थी | रविवार

नक्षत्र: हस्त | योग: साध्य | करण: विष्टि

पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अगस्त 2026

मध्यप्रदेश के तीज त्यौहारों के विविध रंग

मध्यप्रदेश के लोक पर्वों में संस्कृति, आस्था, प्रकृति, सामाजिक समरसता और लोक दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। गणगौर, कजरियां, मड़ई, भगोरिया, गोटमार और घोटुल जैसी परम्पराएँ जनजीवन की सामूहिक चेतना को व्यक्त करती हैं, जिन्हें आधुनिकता और शहरीकरण के दौर में संरक्षित करने की आवश्यकता है।

विराट भारत का महा संकल्प दिवस : श्रावणी पर्व

भारत की कृषिप्रधान और ऋषि परम्परा की संस्कृति में त्योहारों और पर्व उत्सवों का विशेष महत्वपूर्ण स्थान प्राचीन काल से ही रह है। यहां बाराहोमास ऋतु, तिथि, कर्म, धर्मानुसार पर्व और उपासना का विशेष महत्व रहा है ताकि जीवन मे रंग और उत्स बना रहे यद्यपि कुछ पर्वों के मनाने…

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता हरेली तिहार

प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त कर करने के लिए छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है हरेली का त्यौहार। छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार हरेली सावन मास की अमावस्या को मनाया जाता है। खेती किसानी का काम जब संपन्न हो जाता है और इस दिन कृषि औजारों को साफ कर उनकी पूजा की…

छत्तीसगढ़ में चौमासा

जेठ की भीषण तपन के बाद जब बरसात की पहली फ़ुहार पड़ती है तब छत्तीसगढ़ अंचल में किसान अपने खेतों की अकरस (पहली) जुताई प्रारंभ कर देता है। इस पहली वर्षा से खेतों में खर पतवार उग आती है तब वर्षा से नरम हुई जमीन पर किसान हल चलाता है…

भारतीय संस्कृति में नदियों को माँ का स्थान : विश्व जल दिवस

भारतीय संस्कृति में नदियों को माँ का स्थान दिया गया है, प्राचीन मानव नदियों की महत्ता को जानते हुए उन्हें प्रात: स्मरणीय मानता था। स्नान-मज्जन के वक्त सप्त नदियों के नाम का स्मरण उच्चारण करना अपना परम कर्तव्य समझता था तथा विधि विधानपूर्वक उनका पूजन भी करता था। यह परम्परा…

दक्षिण कोसल के वनों की पहचान : साल वृक्ष

दक्षिण कोसल के वनों की पहचान साल यानी सरई, सखुआ और न जाने स्थानीय लोग इसे क्या-क्या नाम से जानते-पहचानते हैं। साल जिसका वैज्ञानिक नाम सोरिया रोबस्टा है। अपनी सैकड़ों खूबियों की वजह से आज यह वृक्ष न सिर्फ पवित्र माना जाता है, यह पूजनीय भी है। आदिकाल से यह…

दक्षिण कोसल का वन वैभव : उदंती अभयारण्य

उदंती अभयारण्य वर्ष 1984 में 237.5 वर्ग किमी के क्षेत्रफ़ल में स्थापित किया गया है। छत्तीसगढ़ उड़ीसा से लगे रायपुर-देवभोग मार्ग पर स्थित है। समुद्र सतह से इसकी ऊंचाई 320 से 370 मी है। अभयारण्य का तापमान न्यूनतम 7 सेंटीग्रेड से अधिकतम 40 सेंटीग्रेड रहता है। पश्चिम से पूर्व की…

हाथी किला एवं रतनपुर के प्राचीन स्थल

बिलासपुर-कोरबा मुख्यमार्ग पर 25 किमी की दूरी पर प्राचीन नगर रतनपुर स्थित है। पौराणिक ग्रंथ महाभारत, जैमिनी पुराण आदि में इसे राजधानी होने का गौरव प्राप्त है। त्रिपुरी के कलचुरियों ने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाकर दीर्घकाल तक शासन किया। इसे चतुर्युगी नगरी भी कहा जाता है, जिसका तात्पर्य है…

वर्षा जल संग्रहण अत्यावश्यक : विश्व जल दिवस

आज विश्व जल दिवस है, जब विश्व किसी चीज को लेकर दिवस मनाने लग जाता है तब मैं समझता हूँ कि यह खतरे की घंटी है। जिस तरह से मीठे जल का दोहन किया जा रहा है, उससे तो यह तय है कि आगामी पन्द्रह बीस वर्षों के के बाद…

इतिहास का साक्षी बाम्हनसरा का वट वृक्ष एवं बस्तरहीन देवी

छत्तीसगढ़ स्थित महासमुन्द जिले के अंतिम छोर उड़ीसा सीमा पर राष्ट्रीय राज मार्ग 353 से लगा जनजातीय बाहुल्य ग्राम बाम्हनसरा विकास खण्ड बागबाहरा है। इसके प्राचीन वट वृक्ष ने सैकड़ो वर्षो के इतिहास को संजो रखा है। यह विशाल वट वृक्ष उत्तरी अक्षांश 20°58'21'' पूर्वी देशांश 82°29' 54''पर राष्ट्रीय राजमार्ग…

अमुआ के डाली पे बैठी कोयलिया काली : खास आम

आम लोगों का आम, खास लोगों का आम, आम तो आम ही है पर आम खाने वाले लोग खास ही होते हैं। अब समय है वृक्षों पर आम के पकने का। इससे पहले तो कृत्रिम रुप से पकाए आम बाजारों में भरे पड़े है। पर उनमें वो मजा कहाँ जो…

प्रकृति का अजूबा मंडीप खोल : छत्तीसगढ़

प्रकृति ज्ञान और आनंद का स्रोत है। प्रकृति मनुष्य को सदैव अपनी ओर आकर्षित करती है। प्रकृति के आकर्षण ने मनुष्य की जिज्ञासा व उत्सुकता को हरदम प्रेरित किया है। इसी प्रेरणा के फलस्वरूप मनुष्य प्रकृति के रहस्यों को जान-समझ कर ही ज्ञानवान बना है। प्रकृति के हर उपादान उसे…

प्रकृति का आभूषण कटुमकसा घुमर : बस्तर

पहाड़ियाँ, घाटियाँ, जंगल, पठार, नदियाँ, झरने आदि न जाने कितने प्रकार के गहनों से सजाकर प्रकृति ने बस्तर को खूबसूरत बना दिया है। बस्तर के इन्हीं आभूषणों में से एक है, कटुमकसा घुमर। कुएमारी (पठार) से बहता हुआ एक नाला घोड़ाझर गाँव की सीमा में आता है।

यहाँ एक जलप्रपात…

प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित जिला जशपुर : पर्यटन

पर्यटन की दृष्टि से जशपुर जिला नैसर्गिक वातावरण से समृद्ध है, अगर निस्रर्ग के समीप कुछ दिन व्यतीत करना है तो आप जशपुर का चयन कर सकते हैं। जशपुर में सुंदर पाटों (पठारों) के वन एवं प्राकृतिक झरनों के साथ मंदिर देवाला भी हैं, जो कि पुरातात्विक महत्व के हैं…

बरन-बरन तरु फुले उपवन वन : वसंतोत्सव विशेष

भारतवर्ष मे ऋतु परिवर्तन के साथ त्यौहार मनाने की परंम्परा है। ऋतुओं के विभाजन में बसंत ऋतु का विशेष महत्व है क्योंकि इस ॠतु का सौंदर्य अनुपम एवं छटा निराली होती है। शीत ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ॠतु की आहट की धमक के बीच का काल वसंत काल होता…

सखि वसन्त आया

वसंत के आते ही मौसम ख़ुशगवार हो जाता है, गुलाबी ठंड के साथ चारों ओर रंग बिरगें फ़ूलों की भरमार हो जाती है। खेतों में फ़ूली हुई पीली सरसों की आभा निराली हो जाती है लगता है कि धरती पीत वस्त्र धारण कर नवयौवना सी इठला रही है। रंग बिरंगी…

कलचुरीकालीन छत्तीसगढ़ का एक गढ़ : मोंहदीगढ़

विद्वानों का मत है कि मध्यकाल में कलचुरीकालीन छत्तीसगढ़ों को लेकर छत्तीसगढ़ का नामकरण हुआ। ये गढ़ कलचुरी शासन काल में प्रशासन की महत्वपूर्ण इकाई थे। कालांतर में कलचुरी दो शाखाओं में विभक्त हुए, शिवनाथ नदी के उत्तर में रतनपुर शाखा एवं दक्षिण में रायपुर शाखा का निर्माण हुआ।

मोंहदीगढ़

सभ्यता एवं लोक संस्कृति संवाहक चित्रोत्पला गंगा महानदी

नदियाँ हमारी धरती को प्रकृति की सबसे बड़ी सौगात हैं। जरा सोचिए! एक नदी के कितने नाम हो सकते हैं? छत्तीसगढ़ और ओड़िशा की जीवन रेखा 885 किलोमीटर की महानदी के भी कई नाम हैं। इसकी महिमा अपरम्पार है। इसके किनारों पर इसका उद्गम वह नहीं है, जिसे आम तौर…

ऐसा स्थान जहाँ पितर देवता भी आम के स्वाद से वंचित नहीं रहते

आम के साथ बचपन के दिन भी जुड़े हैं, जब स्कूल से भागकर टिकोरों के चक्कर में मीलों दूर तक की धरती नाप आते थे। ऐसे ही हमारे देश का राष्ट्रीय फ़ल आम को नहीं बनाया गया है। इसमें गुण भरे पड़े हैं, पर आयुर्वेद की दृष्टि से अवगुण भी…

भ्रमर प्रत्यंचा पर धरे जब पलाश के वाण

वसंत का मौसम हो तथा पलाश की चर्चा न हो, ये नहीं हो सकता। यह समय छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर सरगुजा तक के वनों में पलाश के फ़ूलने का होता है, ऐसे लगता है कि जंगल में आग लगी हो, जंगल में आग जब चहूँ दिसि लगी हो तो…