संवत् 2082 विक्रमी | पौसा कृष्ण एकादशी | बुधवार
नक्षत्र: अनुराधा | योग: गंड | करण: बालव
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जनवरी 2026
भारत के प्राचीनता के प्रमाण आज विश्वपटल पर अंकित है। लेकिन एक दौर ऐसा भी था, जब माना जाता था कि सिकंदर के आक्रमण के पूर्व इस देश का कोई इतिहास था ही नहीं। परंतु वर्ष 1921-22 में इतिहास ने करवट ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सिंधु नदे के…
पचराही, छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है, जो भोरमदेव क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को उजागर करता है। यहाँ 9वीं से 14वीं शताब्दी के फणिनागवंशीय शासन के साक्ष्य, अभिलेख, मूर्तियाँ, सिक्के और मंदिरों के अवशेष मिले हैं। ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक उत्खनन (2007–09) तक…
यह आलेख सिन्धु सभ्यता की समृद्ध वस्त्र परंपरा और प्राचीन भारतीय वेशभूषा के विकास पर केंद्रित है। उत्खननों से प्राप्त पुरातात्त्विक साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध होता है कि हड़प्पाकालीन समाज कपास, रेशम और संभवतः ऊन जैसी प्राकृतिक वस्त्र सामग्रियों का उत्पादन, कताई, बुनाई, कढ़ाई और रंगाई करना जानता…
प्राचीन भारतीय गुरुकुल प्रणाली केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक आधारों पर टिकी थी। यह शिक्षा पद्धति चरित्र निर्माण, व्यावहारिक कौशल और सर्वांगीण विकास पर केंद्रित थी, जिसने भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को सदियों तक अक्षुण्ण रखा।
यह लेख शिव पूजा की प्राचीनता और उसकी सांस्कृतिक निरंतरता पर केंद्रित है। मिस्त्र और मेसोपोटामिया की तरह भारत भी विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में रहा है, पर भारत की विशिष्टता यह है कि यहाँ की परम्पराएँ आज भी जीवित हैं। ऋग्वेद से लेकर सरस्वती-सिंधु सभ्यता, गुप्तकाल, हूण और शक…
नील नदी की गोद में बसे मिश्र और भारत के प्राचीन व्यापार, संस्कृति व आध्यात्मिक संबंधों की रोचक झलक।
विश्व में प्राचीन सभ्यताओं का उदय नदियों की घाटी पर हुआ है। आरंभ में आदिम मानव के लिए स्वयं को लंबे समय तक सुरक्षित रख पाना बेहद ही चुनौती पूर्ण था। आदिम मानव का निवास जंगलों में नदी-नालों, झरनों एवं झीलों के आस पास रहा करता था।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित राजिम नगर को प्राचीन काल में पद्मावतीपुरी और कमल क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। ईसवी सन की चौथी-पांचवीं सदी में हैहयवंशी राजा जगतपाल के काल में तैलिक वंश की दिव्य नारी पद्मावती के पुण्य स्मरण में नगर का नाम पद्मावतीपुरी पड़ा था।
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नील का वरदान प्राचीन मिस्र की सभ्यता की वैज्ञानिक पड़ताल और उसकी सांस्कृतिक विरासत अपेक्षाकृत कई आयामो पर स्तुत्य है। प्राचीन मिस्रवासियों की अनेक उपलब्धियों में उत्खनन, सर्वेक्षण और निर्माण की तकनीक जिसने विशालकाय पिरामिड, मंदिर और ओबिलिस्क के निर्माण, सुनियन्त्रित सिचाई, स्वतंत्र लेखन प्रणाली, गणना विधि, एक व्यावहारिक और…
आर्य संस्कृति के दक्षिण में प्रसार के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम की भूमिका सर्वोपरि है। ऋग्वेद में विंध्याचल के आगे क्षेत्रों का कोई उल्लेख नहीं मिलता विंध्य पर्वत से ही उत्तर व दक्षिण भारत को विभाजित किया गया है। राम ने अपने चौदह वर्ष के वनवासी जीवन में दक्षिण क्षेत्र…