आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | श्रवण कृष्ण दशमी | रविवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: व्यतिपात | करण: विष्टि

पर्व विशेष : | तदनुसार 06 सितंबर 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | श्रवण कृष्ण दशमी | रविवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: व्यतिपात | करण: विष्टि

पर्व विशेष : | तदनुसार 06 सितंबर 2026

शिक्षक दिवस विशेष: संविधान सभा में डॉ. राधाकृष्णन के विचार

संविधान सभा की बहसों और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों के माध्यम से यह आलेख धर्मनिरपेक्षता, समता, शिक्षा, परंपरा, अद्वैत और नागरिक स्वतंत्रता के संबंधों को समझते हुए भारतीय गणराज्य की नैतिक तथा बौद्धिक आधारभूमि का विवेचन प्रस्तुत करता है।

डॉ.राधाकृष्णन और भारतीय ज्ञान परम्परा

भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध, अनुभवपरक, नैतिक और जीवन-केंद्रित स्वरूप को रेखांकित करता यह आलेख डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों के माध्यम से शिक्षा, चरित्र, विज्ञान, अध्यात्म, संस्कृति और परिवर्तन के संतुलित भारतीय दृष्टिकोण को सहज रूप में प्रस्तुत करता है।

रामचरितमानस में गौ माता का महत्व

गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में गौ माता को धर्म, परोपकार, ज्ञान और लोककल्याण से जोड़ा है। यह लेख गौ महिमा, रामावतार, ज्ञानदीप प्रसंग और पृथ्वी के गौ रूप के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना को रेखांकित करता है।

कालजयी वीरांगना -: रानी अवंती बाई लोधी

रानी अवंती बाई लोधी की शौर्यगाथा सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम का परिचय देती है। रामगढ़ से देवहारगढ़ तक अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष और उनका सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास की प्रेरक विरासत है।

वीरांगना अवंती बाई: मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाली अदम्य नारी शक्ति

यह लेख रामगढ़ की रानी अवन्ती बाई के जीवन और सन् 1857 ईस्वी के स्वतन्त्रता संग्राम में उनके योगदान पर आधारित है। इसमें उनके प्रारम्भिक जीवन, अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष और मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की तथ्यात्मक जानकारी दी गई है।

स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी: हुतात्मा समशेर सिंह पारधी

यह लेख 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में क्रान्तिवीर समशेर सिंह पारधी और पारधी समुदाय के योगदान को सामने लाता है। इसमें उनके रणकौशल, संगठन, बलिदान और जनजातीय स्वाभिमान की उस गौरवगाथा का स्मरण है।

मध्यप्रदेश के तीज त्यौहारों के विविध रंग

मध्यप्रदेश के लोक पर्वों में संस्कृति, आस्था, प्रकृति, सामाजिक समरसता और लोक दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। गणगौर, कजरियां, मड़ई, भगोरिया, गोटमार और घोटुल जैसी परम्पराएँ जनजीवन की सामूहिक चेतना को व्यक्त करती हैं, जिन्हें आधुनिकता और शहरीकरण के दौर में संरक्षित करने की आवश्यकता है।

कोटा चित्र शैली में श्री राम का चित्रण

यह आलेख कोटा चित्र शैली में भगवान श्रीराम के विविध प्रसंगों का कलात्मक और सांस्कृतिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अहिल्या उद्धार, राम-हनुमान मिलन, पुष्पक विमान, लव-कुश प्रसंग और राम दरबार जैसे चित्रों के माध्यम से कोटा शैली की भक्ति, समरसता, लोकसंस्कार और भारतीय कला परम्परा की गहन अभिव्यक्ति को रेखांकित…

ज्ञान भारतम् अभियान: प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने का संकल्प

यह लेख भारत की प्राचीन पांडुलिपि परंपरा की ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करता है। इसमें पांडुलिपियों की उत्पत्ति, विविध स्वरूप, ज्ञान-विज्ञान में उनकी भूमिका तथा उनके संरक्षण हेतु ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के महत्व का विशद विवेचन प्रस्तुत किया गया है, जो भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाने…

मेवाड़ के हजार वर्ष पुराने सास-बहू मन्दिर की वास्तुकला में रामलीला

उदयपुर के निकट नागदा स्थित सास-बहू मन्दिर की हजार वर्ष पुरानी पाषाण शिल्पकला में रामायण के विविध प्रसंगों का अद्भुत अंकन भारतीय सांस्कृतिक चेतना की अनुपम अभिव्यक्ति है। गुहिलकालीन इस मन्दिर में श्रीराम के वनवास, किष्किन्धा और लंका काण्ड के दृश्य अत्यन्त सूक्ष्मता और सजीवता के साथ उकेरे गए हैं…

दक्षिण कोसल की वैज्ञानिक प्रेरणा और रसतत्त्व के महान् ऋषि - आचार्य नागार्जुन

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर हम दक्षिण कोसल की धरती से जुड़े महान वैज्ञानिक आचार्य नागार्जुन को याद करते हैं। पारद विज्ञान, धातुशास्त्र और आयुर्वेद में उनके अद्भुत योगदान ने भारतीय विज्ञान को एक नई पहचान दी। उनका जीवन आज के युवाओं को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करता है।

वेदो के प्रहरी - महर्षि दयानंद सरस्वती

जानिए उस महापुरुष की गाथा, जिसने 'स्वराज' का मंत्र दिया और आधुनिक भारत की नींव रखी। महर्षि दयानंद सरस्वती के क्रांतिकारी जीवन और आर्य समाज के गौरवशाली इतिहास को समझने के लिए क्लिक करें।

खादी - भारत की समृद्धि और राष्ट्रीय चेतना का संवाहक - ग्रामोद्योग भाग 1

यह लेख खादी को केवल वस्त्र नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत स्मृति, स्वदेशी आंदोलन, गांधी दर्शन और आत्मनिर्भरता की चेतना के रूप में प्रस्तुत करता है। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक ‘खादी इंडिया’ ब्रांड तक, खादी की ऐतिहासिक यात्रा, सामाजिक भूमिका और समकालीन महत्व का समग्र विवेचन इसमें किया…

बस्तर का वनवासी क्रान्तिवीर भूमकालेया गुण्डाधूर

सन् 1910 का बस्तर भूमकाल अंग्रेजी अत्याचारों के विरुद्ध वनवासियों का सशक्त विद्रोह था, जिसका नेतृत्व वीर क्रांतिकारी गुण्डाधूर ने किया। जंगल अधिकारों, बेगारी, धर्मांतरण और शोषण से त्रस्त जनजातियों को उन्होंने संगठित किया। पारंपरिक अस्त्रों के साथ शुरू हुआ यह गुप्त संघर्ष ब्रिटिश प्रशासन को हिला गया और गुण्डाधूर…

संगीत और नृत्य का संगम प्रो. कल्याणदास  महंत

रायगढ़ घराने के प्रसिद्ध कथक नर्तक एवं संगीतज्ञ प्रो. कल्याणदास महंत का जीवन भारतीय संगीत और नृत्य परंपरा के स्वर्णिम अध्यायों में से एक है। 1921 में बिलासपुर के मड़वा गांव में जन्मे कल्याणदास जी ने अपने बचपन से ही नृत्य और संगीत के वातावरण में शिक्षा पाई। सारंगढ़ और…

कठपुतलियों की ऐतिहासिकता

कठपुतली कला भारत की प्राचीन लोककलाओं में से एक है, जिसका उल्लेख महाभारत, रामायण और पंचतंत्र जैसे ग्रंथों तक में मिलता है। लोककथाओं के अनुसार इसका उद्भव शिव-पार्वती से जुड़ा है, वहीं राजस्थान को इसका प्रमुख जन्मस्थल माना जाता है। धागा, छड़, छाया और दस्ताने जैसी विविध पद्धतियों में पाई…

मानव संस्कृति और मैथिलीशरण गुप्त का काव्य

यह आलेख राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में अभिव्यक्त मानव प्रेम, समता, संवेदनशीलता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की उदात्त भावना को दर्शाता है। गुप्त जी ने धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से मनुष्यत्व, त्याग, करुणा, और वसुधैव कुटुंबकम् की चेतना को काव्य में पिरोया। उनके राम मानव-प्रेम के…

आज़ादी के लिए प्राणों की परवाह न करने वाली वनबाला दयावती : स्वतंत्रता दिवस विशेष

यह आलेख 16 वर्षीय वनबाला वीरांगना दयावती कंवर के अद्भुत साहस की कहानी है, जिन्होंने 1930 में तमोरा गांव के जंगल सत्याग्रह के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज और संगीनों के सामने डटे रहकर सत्याग्रहियों की रक्षा की। दयावती का यह बलिदान और निर्भीकता छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में…

इंद्र राजा और लोक अनुष्ठान

यह आलेख वर्षा की कामना हेतु किए जाने वाले पारंपरिक लोक अनुष्ठान "इंद्र पूजा" पर आधारित है, जो भारत के विभिन्न अंचलों में सदियों से संपन्न होता आया है। विशेषकर निमाड़ अंचल की ‘ध्रुव पूजा’ पर केंद्रित यह लेख लोकविश्वास, लोकगीतों और प्रतीकात्मक क्रियाओं के माध्यम से इंद्रदेव को मनाने…

संगीत और नृत्य का संगम प्रो. कल्याणदास महंत

प्रो. कल्याणदास महंत छत्तीसगढ़ की माटी से उपजे एक ऐसे नृत्य सम्राट थे, जिन्होंने कथक नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से रायगढ़ घराने की परंपरा को देश-विदेश में सम्मान दिलाया। उन्होंने केवल मंच पर ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों और साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजनों में भी अपनी कला से नई पीढ़ी…

आजादी के बाद राजा प्रवीर चंद भंजदेव के निजीधन से निर्मित तालाब

प्रजावत्सल शासक प्रवीरचंद भंजदेव और उनकी संवेदनशीलता ।

दधिमती शक्तिपीठ (नागौर) के रामकथा मूर्ति फलक

यह लेख राजस्थान के नागौर स्थित दधिमती शक्तिपीठ के प्रतिहारकालीन मंदिर स्थापत्य में उत्कीर्ण रामकथा मूर्ति फलकों का सूक्ष्म विवेचन प्रस्तुत करता है। इसमें श्रीराम के वनवास, सीता हरण, सुग्रीव संवाद, सेतुबन्ध, लक्ष्मण शक्ति और राम-रावण युद्ध जैसे प्रसंगों के शिल्पांकन के माध्यम से भारतीय मंदिर कला में रामायण परम्परा…

सदाबहार गीतकार याने श्री नारायण लाल परमार

27अप्रेल नारायण लाल परमार जी की पुण्यतिथि पर विशेष आलेख

अपने भीतर एवं निहायती देहाती किस्म का बज्रमूर्ख बैठा हुआ है, जो हर किसी से अपनत्व चाहता है, जो विशुद्ध घरू वातावरण में साहित्य को जीना चाहता है, जो कभी साहित्य में रचनाकार को ढूंढता है, तो कभी उसके व्यक्तित्व…

छत्तीसगढ़ के बिखरे साहित्यकारों को समेटने वाले ठाकुर जगमोहन सिंह

ठाकुर जगमोहन सिंह वास्तव में विजयराघवगढ़ के राजकुमार, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के सहपाठी, मित्र और उत्कृष्ट साहित्यकार थे। वे 1880 से 1882 तक धमतरी और 1885 से 1887 तक शिवरीनारायण में तहसीलदार थे। शिवरीनारायण में उन्होंने दर्जन भर पुस्तकें लिखीं और प्रकाशित कराई। श्यामा स्वप्न उनकी गद्य पद्य में लिखी उपन्यास…

गीतों की शब्द शक्ति से राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान जागरण की यात्रा

6 फरवरी 1915 : कवि प्रदीप का जन्म दिवस मध्यप्रदेश के बड़नगर में

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में करोड़ो प्राणों के बलिदान हुये । ये बलिदान साधारण नहीं थे । पर इन बलिदानों केलिये आव्हान करने वाले शब्द साधकों की भी एक धारा रही है जिन्होंने अपने शब्दों की शैली और…

उपन्यास और लेखन से स्वत्व जागरण : आचार्य चतुरसेन शास्त्री

स्वाधीनता के लिये संघर्ष जितना महत्वपूर्ण है उतना ही महत्वपूर्ण है समाज में स्वत्व जागरण का अभियान। यदि स्वत्ववोध नहीं होगा तो स्वतंत्रता की चेतना कैसे जाग्रत होगी। अपने लेखन से स्वत्व चेतना का यही अभियान चलाया आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने। उन्होने अपना सार्वजनिक जीवन स्वतंत्रता संग्राम से आरंभ किया…

श्रीराम भक्त स्वामी विवेकानंद

इतिहास साक्षी है कि पुण्यभूमि भारत की गाथा सहस्त्रों वर्षों के कठोर संघर्ष की गौरव गाथा है। इस शांतिप्रिय देश पर निरंतर कुठाराघात होने के कारण यहाँ के जनमानस में घोर निराशा छा गई थी। भारतवासियों का स्वाभिमान सो गया था, यह देश अपना गौरवशाली इतिहास, अपनी महान संस्कृति, अस्तित्व…

छत्तीसगढ़ के गौरव पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय

04 जनवरी पंडित लोचन प्रसाद पांडेय जन्म दिवस विशेष

छत्तीसगढ़ जैसे वनांचल के किसी ग्रामीण कवि को साहित्य का सर्वोच्च सम्मान “साहित्य वाचस्पति” दिया जाये तो उसकी ख्याति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। बात तब की है जब इस सम्मान के हकदार गिने चुने लोग थे। छत्तीसगढ़ की…

संगीत और नृत्य का संगम प्रो. कल्याणदास महंत

नृत्य सम्राट प्रो. कल्याणदास, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय नियुक्त बड़ी हस्तियों में थे। वे छुट्टी के दिनों में बराबर अपने निवास स्थान रायगढ़ आते थे, जहाँ उनका स्वयं का मकान है। परिवार उस समय यहीं था। उन दिनों हम लोगों की चक्रधर कला परिषद हुआ कल्याण दास महन्त लेखक के…

पंडित मालिकराम भोगहा का साहित्यिक अवदान

30 नवंबर को पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष आलेख

छत्तीसगढ़ प्रदेश अनेक अर्थो में अपनी विशेषता रखता है। यहां ऐतिहासिक और पुरातात्विक अवशेषों का बाहुल्य है जो अपनी प्राचीनता और वैभव सम्पन्नता की गाथाओं को मौन रहकर बताता है लेकिन इसके प्रेरणास्रोत और विद्वतजन गुमनामी के अंधेरे में खो गये…