संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख कृष्ण द्वादशी | गुरुवार
नक्षत्र: रेवती | योग: प्रीति | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 मई 2026
यह लेख भारत की प्राचीन पांडुलिपि परंपरा की ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करता है। इसमें पांडुलिपियों की उत्पत्ति, विविध स्वरूप, ज्ञान-विज्ञान में उनकी भूमिका तथा उनके संरक्षण हेतु ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के महत्व का विशद विवेचन प्रस्तुत किया गया है, जो भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाने…
उदयपुर के निकट नागदा स्थित सास-बहू मन्दिर की हजार वर्ष पुरानी पाषाण शिल्पकला में रामायण के विविध प्रसंगों का अद्भुत अंकन भारतीय सांस्कृतिक चेतना की अनुपम अभिव्यक्ति है। गुहिलकालीन इस मन्दिर में श्रीराम के वनवास, किष्किन्धा और लंका काण्ड के दृश्य अत्यन्त सूक्ष्मता और सजीवता के साथ उकेरे गए हैं…
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर हम दक्षिण कोसल की धरती से जुड़े महान वैज्ञानिक आचार्य नागार्जुन को याद करते हैं। पारद विज्ञान, धातुशास्त्र और आयुर्वेद में उनके अद्भुत योगदान ने भारतीय विज्ञान को एक नई पहचान दी। उनका जीवन आज के युवाओं को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करता है।
जानिए उस महापुरुष की गाथा, जिसने 'स्वराज' का मंत्र दिया और आधुनिक भारत की नींव रखी। महर्षि दयानंद सरस्वती के क्रांतिकारी जीवन और आर्य समाज के गौरवशाली इतिहास को समझने के लिए क्लिक करें।
यह लेख खादी को केवल वस्त्र नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत स्मृति, स्वदेशी आंदोलन, गांधी दर्शन और आत्मनिर्भरता की चेतना के रूप में प्रस्तुत करता है। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक ‘खादी इंडिया’ ब्रांड तक, खादी की ऐतिहासिक यात्रा, सामाजिक भूमिका और समकालीन महत्व का समग्र विवेचन इसमें किया…
सन् 1910 का बस्तर भूमकाल अंग्रेजी अत्याचारों के विरुद्ध वनवासियों का सशक्त विद्रोह था, जिसका नेतृत्व वीर क्रांतिकारी गुण्डाधूर ने किया। जंगल अधिकारों, बेगारी, धर्मांतरण और शोषण से त्रस्त जनजातियों को उन्होंने संगठित किया। पारंपरिक अस्त्रों के साथ शुरू हुआ यह गुप्त संघर्ष ब्रिटिश प्रशासन को हिला गया और गुण्डाधूर…
रायगढ़ घराने के प्रसिद्ध कथक नर्तक एवं संगीतज्ञ प्रो. कल्याणदास महंत का जीवन भारतीय संगीत और नृत्य परंपरा के स्वर्णिम अध्यायों में से एक है। 1921 में बिलासपुर के मड़वा गांव में जन्मे कल्याणदास जी ने अपने बचपन से ही नृत्य और संगीत के वातावरण में शिक्षा पाई। सारंगढ़ और…
कठपुतली कला भारत की प्राचीन लोककलाओं में से एक है, जिसका उल्लेख महाभारत, रामायण और पंचतंत्र जैसे ग्रंथों तक में मिलता है। लोककथाओं के अनुसार इसका उद्भव शिव-पार्वती से जुड़ा है, वहीं राजस्थान को इसका प्रमुख जन्मस्थल माना जाता है। धागा, छड़, छाया और दस्ताने जैसी विविध पद्धतियों में पाई…
यह आलेख राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में अभिव्यक्त मानव प्रेम, समता, संवेदनशीलता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की उदात्त भावना को दर्शाता है। गुप्त जी ने धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से मनुष्यत्व, त्याग, करुणा, और वसुधैव कुटुंबकम् की चेतना को काव्य में पिरोया। उनके राम मानव-प्रेम के…
यह आलेख 16 वर्षीय वनबाला वीरांगना दयावती कंवर के अद्भुत साहस की कहानी है, जिन्होंने 1930 में तमोरा गांव के जंगल सत्याग्रह के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज और संगीनों के सामने डटे रहकर सत्याग्रहियों की रक्षा की। दयावती का यह बलिदान और निर्भीकता छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में…
यह आलेख वर्षा की कामना हेतु किए जाने वाले पारंपरिक लोक अनुष्ठान "इंद्र पूजा" पर आधारित है, जो भारत के विभिन्न अंचलों में सदियों से संपन्न होता आया है। विशेषकर निमाड़ अंचल की ‘ध्रुव पूजा’ पर केंद्रित यह लेख लोकविश्वास, लोकगीतों और प्रतीकात्मक क्रियाओं के माध्यम से इंद्रदेव को मनाने…
प्रो. कल्याणदास महंत छत्तीसगढ़ की माटी से उपजे एक ऐसे नृत्य सम्राट थे, जिन्होंने कथक नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से रायगढ़ घराने की परंपरा को देश-विदेश में सम्मान दिलाया। उन्होंने केवल मंच पर ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों और साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजनों में भी अपनी कला से नई पीढ़ी…
प्रजावत्सल शासक प्रवीरचंद भंजदेव और उनकी संवेदनशीलता ।
27अप्रेल नारायण लाल परमार जी की पुण्यतिथि पर विशेष आलेख
अपने भीतर एवं निहायती देहाती किस्म का बज्रमूर्ख बैठा हुआ है, जो हर किसी से अपनत्व चाहता है, जो विशुद्ध घरू वातावरण में साहित्य को जीना चाहता है, जो कभी साहित्य में रचनाकार को ढूंढता है, तो कभी उसके व्यक्तित्व…
ठाकुर जगमोहन सिंह वास्तव में विजयराघवगढ़ के राजकुमार, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के सहपाठी, मित्र और उत्कृष्ट साहित्यकार थे। वे 1880 से 1882 तक धमतरी और 1885 से 1887 तक शिवरीनारायण में तहसीलदार थे। शिवरीनारायण में उन्होंने दर्जन भर पुस्तकें लिखीं और प्रकाशित कराई। श्यामा स्वप्न उनकी गद्य पद्य में लिखी उपन्यास…
6 फरवरी 1915 : कवि प्रदीप का जन्म दिवस मध्यप्रदेश के बड़नगर में
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में करोड़ो प्राणों के बलिदान हुये । ये बलिदान साधारण नहीं थे । पर इन बलिदानों केलिये आव्हान करने वाले शब्द साधकों की भी एक धारा रही है जिन्होंने अपने शब्दों की शैली और…
स्वाधीनता के लिये संघर्ष जितना महत्वपूर्ण है उतना ही महत्वपूर्ण है समाज में स्वत्व जागरण का अभियान। यदि स्वत्ववोध नहीं होगा तो स्वतंत्रता की चेतना कैसे जाग्रत होगी। अपने लेखन से स्वत्व चेतना का यही अभियान चलाया आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने। उन्होने अपना सार्वजनिक जीवन स्वतंत्रता संग्राम से आरंभ किया…
इतिहास साक्षी है कि पुण्यभूमि भारत की गाथा सहस्त्रों वर्षों के कठोर संघर्ष की गौरव गाथा है। इस शांतिप्रिय देश पर निरंतर कुठाराघात होने के कारण यहाँ के जनमानस में घोर निराशा छा गई थी। भारतवासियों का स्वाभिमान सो गया था, यह देश अपना गौरवशाली इतिहास, अपनी महान संस्कृति, अस्तित्व…
04 जनवरी पंडित लोचन प्रसाद पांडेय जन्म दिवस विशेष
छत्तीसगढ़ जैसे वनांचल के किसी ग्रामीण कवि को साहित्य का सर्वोच्च सम्मान “साहित्य वाचस्पति” दिया जाये तो उसकी ख्याति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। बात तब की है जब इस सम्मान के हकदार गिने चुने लोग थे। छत्तीसगढ़ की…
नृत्य सम्राट प्रो. कल्याणदास, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय नियुक्त बड़ी हस्तियों में थे। वे छुट्टी के दिनों में बराबर अपने निवास स्थान रायगढ़ आते थे, जहाँ उनका स्वयं का मकान है। परिवार उस समय यहीं था। उन दिनों हम लोगों की चक्रधर कला परिषद हुआ कल्याण दास महन्त लेखक के…
30 नवंबर को पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष आलेख
छत्तीसगढ़ प्रदेश अनेक अर्थो में अपनी विशेषता रखता है। यहां ऐतिहासिक और पुरातात्विक अवशेषों का बाहुल्य है जो अपनी प्राचीनता और वैभव सम्पन्नता की गाथाओं को मौन रहकर बताता है लेकिन इसके प्रेरणास्रोत और विद्वतजन गुमनामी के अंधेरे में खो गये…
30 सितंबर पंडित मुकुटधर पांडेय जी की जयंती के अवसर पर विशेष लेख
महानदी के तट पर रायगढ़-सारंगढ़ मार्ग के चंद्रपुर से 7 कि.मी. की दूरी पर जांजगीर-चांपा जिलान्तर्गत बालपुर ग्राम स्थित है। यह ग्राम पूर्व चंद्रपुर जमींदारी के अंतर्गत पंडित शालिगराम, पंडित चिंतामणि और पंडित पुरुषोत्तम प्रसाद पांडेय की…
12 सितंबर जयंती विशेष आलेख
छत्तीसगढ़ का पूर्वी सीमान्त जनजातीय बाहुल्य जिला रायगढ़ केवल सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि साहित्यिक दृष्टि से भी सम्पन्न रहा है। रियासत काल में यहां के गुणग्राही राजा चक्रधरसिंह के दीवान, सुप्रसिद्ध साहित्यकार और तुलसी दर्शन के रचनाकार डॉ. बल्देवप्रसाद मिश्र थे। उन्हीं की सलाह पर…
हमारा देश जब अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था और चारों ओर त्राहि त्राहि मची हुई थी तब छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं था। यहां भी गांधी, नेहरू और सुभाषचंद्र जैसे सपूत हुए जिन्होंने यहां जन जागृति फैलायी। इनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी काव्यधारा प्रवाहित…
16 अगस्त 1927 हरि ठाकुर जयंती विशेष आलेख
हरि ठाकुर जी हिन्दी और छत्तीसगढ़ी के श्रेष्ठ कवि तो वह थे ही, छत्तीसगढ़ के पौराणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, साहित्यिक और राजनीतिक इतिहास के भी वह गहन अध्येता और लेखक थे। राज्य निर्माण आंदोलन के लिए सर्वदलीय मंच के संयोजक के रूप में…
12 अगस्त स्व: हरिनाथ डे जयंती विशेष आलेख
ज़िन्दगी के सफ़र में सिर्फ़ 34 साल की उम्र तक 36 भाषाओं का ज्ञाता बनना कोई मामूली बात नहीं है। संसार में अत्यधिक विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न ऐसे विद्वान गिने -चुने ही होते हैं। यहां तक कि ऐसी महान प्रतिभाओं के बारे में…
बंगाल ने रवींद्र-संगीत को मान्यता प्रदान कर उसे अपनी पहचान बना ली। रवींद्र-संगीत को स्थापित कर दिया। इसी तरह से असम ने भूपेन हजारिका को अपनी पहचान बना लिया किन्तु छत्तीसगढ़ ने खुमान-संगीत को अपनी पहचान बनाने के लिए मान्यता प्रदान नहीं की है और स्थापित भी नहीं किया है…
वैदिक साहित्य ने सृष्टि का कर्ता भगवान विश्वकर्मा को माना है, इनके के अनेक रूप बताए जाते हैं- दो बाहु वाले, चार बाहु एवं दस बाहु वाले तथा एक मुख, चार मुख एवं पंचमुख वाले। देवों के देव भगवान श्री विश्वकर्मा ने सदैव कर्म को ही सर्वोपरि बतलाया है। यह…
भारत की कृषिप्रधान और ऋषि परम्परा की संस्कृति में त्योहारों और पर्व उत्सवों का विशेष महत्वपूर्ण स्थान प्राचीन काल से ही रह है। यहां बाराहोमास ऋतु, तिथि, कर्म, धर्मानुसार पर्व और उपासना का विशेष महत्व रहा है ताकि जीवन मे रंग और उत्स बना रहे यद्यपि कुछ पर्वों के मनाने…
प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त कर करने के लिए छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है हरेली का त्यौहार। छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार हरेली सावन मास की अमावस्या को मनाया जाता है। खेती किसानी का काम जब संपन्न हो जाता है और इस दिन कृषि औजारों को साफ कर उनकी पूजा की…