आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | चैत्र कृष्ण चतुर्दशी | गुरुवार

नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद | योग: इंद्र | करण: विष्टि

पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अप्रैल 2026

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छत्तीसगढ़ी में हाना (मुहावरे/लोकोक्ति)

यह आलेख छत्तीसगढ़ की वाचिक परंपराओं में हाना (मुहावरे/लोकोक्तियों) की महत्ता को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे हाना लोकजीवन के अनुभवों, प्रकृति, इतिहास, धर्म, समाज और पारिवारिक जीवन से जन्म लेकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति का दर्पण बनते हैं। कम शब्दों में गहरी बात कहने की क्षमता, हास्य…

उड़िया लोक साहित्य

उड़िया भाषा का विकास पूर्वमागधी अपभ्रंश से होकर 11वीं शताब्दी में प्रारंभ हुआ, जिसका प्रमाण उर्जाम शिलालेख एवं चर्यागीतिका में मिलता है। इस विस्तृत आलेख में उड़िया लोक साहित्य के विविध आयामों – जैसे लोकगीत, लोककथा, लोकनाट्य, गाथाएं, कहावतें, झूला गीत, श्रम गीत, मंत्र गीत आदि – का विश्लेषण किया…

भविष्य में वैश्विक एकता का प्रतीक बनेगी हिंदी

भाषा का लेकर चंदन, आओ कर लें अभिनंदन
की गर्व से हिन्दी बोलें, चलो हिन्दी के हो लें

संपूर्ण विश्व में एकमात्र भारत ही ऐसा देश है जो न केवल भौगोलिक क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से विशाल है अपितु हमें तो इस बात का भी गर्व है कि हमारे…

छत्तीसगढ़ी का व्याकरण रचने वाले काव्योपाध्याय हीरालाल

हमारा देश जब अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था और चारों ओर त्राहि त्राहि मची हुई थी तब छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं था। यहां भी गांधी, नेहरू और सुभाषचंद्र जैसे सपूत हुए जिन्होंने यहां जन जागृति फैलायी। इनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी काव्यधारा प्रवाहित…

छत्तीस भाषाओं के ज्ञाता थे छत्तीसगढ़ के हरिनाथ डे

12 अगस्त स्व: हरिनाथ डे जयंती विशेष आलेख

ज़िन्दगी के सफ़र में सिर्फ़ 34 साल की उम्र तक 36 भाषाओं का ज्ञाता बनना कोई मामूली बात नहीं है। संसार में अत्यधिक विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न ऐसे विद्वान गिने -चुने ही होते हैं। यहां तक कि ऐसी महान प्रतिभाओं के बारे में…

छत्तीसगढ़ी साहित्य अउ साहित्यकार

एक हजार साल से भी पुराना है छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य का इतिहास

भारत के प्रत्येक राज्य और वहाँ के प्रत्येक अंचल की अपनी भाषाएँ, अपनी बोलियाँ, अपना साहित्य, अपना संगीत और अपनी संस्कृति होती है। ये रंग -बिरंगी विविधताएँ ही भारत की राष्ट्रीय पहचान है, जो इस देश को…

राजभाषा के 72 साल : आज भी वही सवाल?

हमारे अनेक विद्वान साहित्यकारों और महान नेताओं ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में महिमामण्डित किया है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय एकता की भाषा भी कहा है। उनके विचारों से हम सहमत भी हैं। हमने 15 अगस्त 2021 को अपनी आजादी के 74 साल पूरे कर लिए और हिन्दी को राजभाषा…

छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति में हाना

वाचिक परम्पराएं सभी संस्कृतियों का एक महत्वपूर्ण अंग होती हैं। लिखित भाषा का प्रयोग न करने वाले लोक समुदाय में संस्कृति का ढांचा अधिकतर मौखिक परम्परा पर आधारित होता है। कथा, गाथा, गीत, भजन, नाटिका, प्रहसन, मुहावरा, लोकोक्ति, मंत्र आदि रूपों में मौखिक साधनों द्वारा परम्परा का संचार ही वाचिक…

गंडई का शिवालय जहाँ पाषाण बोलते हैं

छत्तीसगढ़ प्राचीनकाल से आस्था का केन्द्र बिंदु रहा है। यहां सिरपुर, शिवरीनारायण, राजिम, मल्हार, रतनपुर, पाली,  ताला, भोरमदेव, आरंग, जांजगीर, देवबलौदा, बारसूर, जैसे अनेक पुरातात्विक स्थलों का अपना पृथक-पृथक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व है।

यहां के मंदिरों में उत्कीर्ण शिल्पांकन तत्कालीन समाज की धार्मिक व सांस्कृतिक स्थितियों के जीवन्त…

सिंधड़ी दा, सेवण दा सखी शाहबाज कलंदर : संत झूलेलाल

भारत में विभिन्न धर्मों, समुदायों और जातियों का समावेश है इसलिए यहाँ अनेकता में एकता के दर्शन होते हैं। यह हमारे देश के लिए गर्व की बात है कि यहाँ सभी धर्मों के त्यौहारों को प्रमुखता से मनाया जाता है चाहे वह दीपावली हो, ईद हो, क्रिसमस हो या भगवान…

जानिए बस्तर की जनजातीय भाषा भतरी एवं उसकी व्याकरणिक संरचना

बस्तर की जनजातीय अथवा लोक-भाषाओं की चर्चा करते हुए अनायास ही इन लोक भाषाओं में प्रचलित रही लोक कथाओं की सुध आ जाती है। और फिर जब लोक कथाओं की बात हो तो इन पर बात करते हुए मुझे अपनी नानी स्व. चन्द्रवती वैष्णव (खोरखोसा) और छोटे नाना स्व. तुलसीदास…