आज का पंचांग

संवत् 2082 विक्रमी | पौसा कृष्ण एकादशी | बुधवार

नक्षत्र: अनुराधा | योग: गंड | करण: बालव

पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जनवरी 2026

आज का पंचांग

संवत् 2082 विक्रमी | पौसा कृष्ण एकादशी | बुधवार

नक्षत्र: अनुराधा | योग: गंड | करण: बालव

पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जनवरी 2026

वनवासी विरासत पर आधारित आज का विश्व

माता भूमि की संतति होकर मानव ने वन से नगर तक की यात्रा की, पर अपनी मूल प्रकृति नहीं छोड़ी। यह आलेख बताता है कि आज का विश्व प्राचीन वनवासियों की प्रकृति-आधारित जीवनशैली का ऋणी है, और क्यों भारतीय संस्कृति आज भी जीवित सभ्यता है। पढ़ने हेतु लिंक देखें।

भारतीयता की पहचान

भारतीयता केवल भाषा या वेष-भूषा से नहीं, बल्कि उसके मूल्यों, सहिष्णुता और आध्यात्मिक परंपराओं से पहचानी जाती है। सत्य, धर्म और विविधता के सम्मान पर आधारित यह संस्कृति जगत को एकात्मता और मर्यादा का संदेश देती है।

छत्तीसगढ़ी में हाना (मुहावरे/लोकोक्ति)

यह आलेख छत्तीसगढ़ की वाचिक परंपराओं में हाना (मुहावरे/लोकोक्तियों) की महत्ता को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे हाना लोकजीवन के अनुभवों, प्रकृति, इतिहास, धर्म, समाज और पारिवारिक जीवन से जन्म लेकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति का दर्पण बनते हैं। कम शब्दों में गहरी बात कहने की क्षमता, हास्य…

भारतीय संस्कृति का स्वरूप

यह आलेख भारतीय संस्कृति की समृद्ध यात्रा, उसकी कलात्मक, दार्शनिक और सामाजिक विशेषताओं का व्यापक वर्णन करता है। इसमें प्राचीन भारत की मूर्तिकला, चित्रकला, नाट्यकला, नृत्यकला, शिक्षा, दर्शन और जीवन मूल्यों से लेकर वर्तमान समय में संस्कृति पर पड़ते पाश्चात्य प्रभाव तक की चर्चा की गई है। आलेख यह भी…

सामाजिकता और संस्कृति

यह आलेख सामाजिक संरचना में संस्कृति की केंद्रीय भूमिका, नैतिक मूल्यों के क्षरण, और औद्योगीकरण व पाश्चात्य प्रभाव के चलते बदलते सामाजिक संबंधों का सूक्ष्म विश्लेषण करता है। लेख बताता है कि कैसे आधुनिकता के आकर्षण में हमारी सांस्कृतिक विरासत, लोककलाएँ, और पारंपरिक जीवन मूल्य धीरे-धीरे नष्ट हो रहे हैं…

सामाजिकता और संस्कृति

यह आलेख समाज और संस्कृति के गहरे संबंधों पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि संस्कृति समाज का नैतिक और आदर्श रूप होती है, जो व्यक्ति के आचरण, विचार और जीवन-मूल्यों से निर्मित होती है। औद्योगीकरण, पाश्चात्य प्रभाव और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के चलते भारतीय समाज में पारंपरिक मूल्य…

सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य एवं पुस्तकालय

यह आलेख भारतीय लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक मूल्यों की पृष्ठभूमि में सार्वजनिक पुस्तकालयों की भूमिका पर प्रकाश डालता है। भारत की प्राचीन संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के सेतु के रूप में पुस्तकालय एक सांस्कृतिक केंद्र बनते हैं। राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान जैसी संस्थाएं देशभर में पठन-पाठन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और…

बदलता सांस्कृतिक परिदृश्य

यह आलेख इक्कीसवीं सदी में संस्कृति के स्वरूप और उसके परिवर्तनशील आयामों की पड़ताल करता है। आधुनिक तकनीकी, संचार क्रांति और सामाजिक उथल-पुथल के बीच यह संस्कृति के स्थायित्व, पुनर्प्रतिष्ठा और आत्मिक वापसी की संभावना को रेखांकित करता है। आलेख इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि यद्यपि जीवनशैली में तीव्र…

भोजन में निहित है मनुष्य के स्वास्थ्य का राज

भोजन न केवल शरीर का पोषण करता है बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य, चेतना और जीवनशैली को भी प्रभावित करता है। प्राचीन वेदों और परंपराओं में ऋतु के अनुसार भोजन, पथ्य-कुपथ्य का विचार और अन्न के वैज्ञानिक भंडारण की परंपरा रही है। आज बदलती कृषि तकनीक, अनियमित खानपान और अस्वास्थ्यकर तेलों…

लोकसाहित्य में लोकसंस्कृति

यह लेख लोक साहित्य और लोक संस्कृति की उस जीवन्त परंपरा को उजागर करता है, जो भारतीय जनमानस की आत्मा, संवेदनाओं और संस्कारों का प्रतिबिंब है। इसमें लोकगीतों, कथाओं, गाथाओं, रीति-रिवाजों, त्योहारों और जन-विश्वासों के माध्यम से भारतीय संस्कृति के गहरे अर्थ, सामाजिक मूल्य, और जीवन-दर्शन को रेखांकित किया गया…

नील की गोदी में सोये मिश्र का भारत से प्राचीन सम्बन्ध

नील नदी की गोद में बसे मिश्र और भारत के प्राचीन व्यापार, संस्कृति व आध्यात्मिक संबंधों की रोचक झलक।

उन्नत खेती का अविष्कारक - भारत

यह लेख भारत की प्राचीन और उन्नत खेती की परंपरा का प्रमाण प्रस्तुत करता है। मेहरगढ़ से लेकर कौटिल्य के अर्थशास्त्र और वराहमिहिर की भविष्यवाणियों तक, यह लेख बताता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्ष पूर्व वैज्ञानिक पद्धति से खेती होती थी। भारत ही वह भूमि है, जहां मानव…

स्वास्थ्य के लिए महाऔषधि है योग : विश्व योग दिवस

योग आत्मा और परमात्मा के मिलन की प्रक्रिया है, जो चित्त की वृत्तियों को नियंत्रित करता है। यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली और आत्मिक उन्नति का मार्ग है। मानव कल्याण हेतु योग एक वैज्ञानिक, सार्वभौमिक और व्यवहारिक साधना है। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मानवता को भारत…

छत्तीसगढ़ की खड़िया जनजाति की जीवन शैली

खड़िया जाति भारत मे सर्वाधिक उड़ीसा, झारखंड के बाद छत्तीसगढ़ में पाई जाती है। जनगणना के अनुसार छतीसगढ़ में खड़िया 49032 है, जिसमें रायगढ़, फरसाबहार, जशपुर के बाद महासमुन्द जिले में इनकी आबादी अधिक है। बागबाहरा के जंगल क्षेत्र व बसना विकास खण्ड में भी इनकी बसाहट है।

बस्तर की जनजातियों में संस्कार

बस्तर सम्भाग में आदिवासियों की विभिन्न प्रकार की प्रजातियाँ निवास करती हैं जिनमें  मुरिया, माड़िया, अबूझमाड़िया, दंडामी माड़िया, परजा, धुरवा इसी तरह गदबा, मुंडा, हल्बा और भतरा आदि प्रमुख जनजातियाँ प्रमुख हैं। इन जनजातियों की बोली-भाषा, रहन-सहन आदि में काफी समानता है। इन्हें केवल अध्ययन की दृष्टि से अलग किया

उंराव जनजाति है भगवान राम की वंशज

पूरी दुनिया में श्री राम मंदिर के निर्माण को लेकर जबरजस्त उत्साह देखा जा रहा है। देश में भगवान श्री राम से जुड़ी कई कथाओं की चर्चा हो रही है लोग अपने अपने ढंग से भगवान श्री राम को अपने से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं यहां तक कि…

प्राचीन मूर्तिकला में केश विन्यास एवं अलंकरण

सौंदर्य के प्रति मानव प्राचीन काल से ही सजग रहा है, देह के अलंकरण में उसने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी एवं नख सिख से लेकर गुह्यांग तक अलंकरण करने के लिए नवोन्मेष किए। सौंदर्य वृद्धि के लिए किए गए भिन्न भिन्न अलंकरण हमें तत्कालीन प्रतिमा शिल्प में दिखाई देते…

भोजन में निहित है मनुष्य के स्वास्थ्य का राज

धरती के किसी भी प्राणी को जीवन संचालन के लिए उर्जा की आवश्यकता होती है एवं प्राण संचालन की उर्जा भोजन से प्राप्त होती है। मनुष्य भी चौरासी लाख योनियों में एक विवेकशील प्राणी माना गया है, इसे भी उर्जा के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। अन्य सभी प्राणियों…

प्राचीन भारतीय योग विज्ञान सर्वकाल में उपयोगी

युञ्ज्यते असौ योग:, योग शब्द संस्कृत के युञ्ज धातु से बना है। जिसका अर्थ है जुड़ना, मिलना या एकजुट होना। योग, विश्व को प्राचीन भारतीय परंपरा एवं संस्कृति की अनुपम देन है। योग द्वारा मनुष्य अपने शरीर एवं मन-मस्तिष्क को आत्मबल प्रदान कर प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाता है…

जनजातीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग : महुआ

आम तौर पर महुआ का नाम आते ही इसका सम्बन्ध शराब से जोड़ दिया जाता है। जबकि यह एक बहुपयोगी वृक्ष है। इस वृक्ष के फल, फूल, पत्ती, लकड़ी, तने की छाल सबका अपना उपयोग है। इस वृक्ष के बहुपयोगी होने के कारण जनजातीय समाज इस वृक्ष को पवित्र मानता…

जानिए लाल बंगला का रहस्य क्या है

छत्तीसगढ़ पर प्रकृति ने अपना अपार स्नेह लुटाया है। यहां के नदी, पहाड़, जीव-जंतु, सघन वन्यांचल, जनजातीय परंपराएं और लोक जीवन इस राज्य की सुषमा में चार चांद लगाते हैं। अपनी विशिष्ट जीवनशैली और परंपरा को सहेजने में जनजातीय समूह विशिष्टता है। इनके विशिष्ट रीति-रिवाज और परंपराएं देश और विदेश…

दक्षिण कोसल की संस्कृति में पैली-काठा का महत्व

दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) प्रांत प्राचीनकाल से दो बातों के लिए प्रसिद्ध है, पहला धान की खेती और दूसरा माता कौसल्या की जन्मभूमि याने भगवान राम की ननिहाल। यहाँ का कृषक धान एवं राम, दोनों से जुड़ा हुआ है। यहाँ धान की खेती प्रचूर मात्रा में होती है, इसके साथ ही…

प्रकृति का आभूषण कटुमकसा घुमर : बस्तर

पहाड़ियाँ, घाटियाँ, जंगल, पठार, नदियाँ, झरने आदि न जाने कितने प्रकार के गहनों से सजाकर प्रकृति ने बस्तर को खूबसूरत बना दिया है। बस्तर के इन्हीं आभूषणों में से एक है, कटुमकसा घुमर। कुएमारी (पठार) से बहता हुआ एक नाला घोड़ाझर गाँव की सीमा में आता है।

यहाँ एक जलप्रपात…

छत्तीसगढ़ में संग्रहालय : अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस विशेष

‘संग्रह’ न केवल मनुष्य वरन अनेक जीवों की आदिम प्रवृत्ति है। इस जैविक प्रवृत्ति का उदय कदाचित् जीवितता के लिये हुआ हो, किन्तु अन्य जीव-जन्तुओं की संचयी प्रवृत्ति जीवन की मूलभूत आवश्यकता ‘भोजन-वस्त्र-आवास’ के इर्द-गिर्द केन्द्रित रही जबकि मनुष्य के बौद्धिक विकास के साथ उसकी संचयी-वृत्ति ने अनेक महत्वपूर्ण आयामों…

परिवार मनुष्य की प्रथम पाठशाला

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस विशेष

परिवार मनुष्य की प्रथम पाठशाला है यह एक ऐसी सामाजिक संस्था है जो सदस्यों के प्रेम, स्नेह एवं भाईचारा पूर्वक निर्वाहन करते हुए उनके आपसी सहयोग व समन्वय से क्रियान्वित होती है। सुसंस्कार, मर्यादा, सम्मान, समर्पण, आदर, अनुशासन आदि किसी भी सुखी-संपन्न एवं खुशहाल परिवार के…

बच्चों के मानसिक विकास के लिए मातृभाषा उतनी ही आवश्यक है जितना शारीरिक विकास के लिए माँ का दूध : महात्मा गांधी

अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस विशेष आलेख

मातृभाषा का रिश्ता जन्मदायिनी माता के साथ स्थूल रूप से जोड़ा जाता है, परंतु मातृभाषा से अभिप्राय उस परिवेश, स्थान,समूह में बोली जाने वाली भाषा से है जिसमें रहकर मनुष्य अपने बाल्यकाल में दुनियां के संपर्क में आता है, अर्थात मातृभाषा ही शिशु को…

बुद्ध प्रतिमाओं की मुद्राएं

भारत में एक दौर ऐसा आया कि भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं बहुतायत में निर्मित होने लगी। स्थानक बुद्ध से लेकर ध्यानस्थ बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित होने लगी। ज्ञात हो कि भारतीय शिल्पकला में हिन्दू एवं बौद्ध प्रतिमाओं में प्रमुखता से आसन एवं हस्त मुद्राएं अंकित की जाती है।

हमें प्राचीन…

बहुआयामी जीवन संदर्भों के रचनाकार: नारायण लाल परमार

01 जनवरी, परमार जी के जन्मदिन पर केन्द्रित लेख

कवि एक शब्द जरूर है, किन्तु कवि होने का अर्थ हर युग में एक नहीं रहा है। यह केवल कालगत सत्य नहीं है। एक ही समय में भी, विभिन्न परिस्थितियों वाले देशों में कवि होने का अर्थ बदल जाता है। कभी-कभी…

अत्यावश्यक है प्राचीन पद्धति से वर्षा जल सरंक्षण

मानसून की पहली फ़ुहार के साथ वर्षा ॠतु आगमन हो गया है। मई-जून की भीषण गर्मी में जिस तरह लोगों ने जल संकट का सामना किया उसे देखकर लगता है कि आने वाले भविष्य में जल संकट भयानक रुप लेने वाला है। वर्षा जल का संग्रहण आवश्यक हो गया है…

योगश्चित्त वृत्ति निरोध: योग दिवस विशेष

भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा योग है, यह विद्या भारत में प्राचीन काल से है और योगी जन के साथ सामान्य जन भी इसका लाभ उठा रहे हैं। योग न केवल आपके शरीर को रोगों से दूर रखता है बल्कि आपके मन को भी शांत रखने का काम करता है।