संवत् 2083 विक्रमी | चैत्र कृष्ण चतुर्दशी | गुरुवार
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद | योग: इंद्र | करण: विष्टि
पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अप्रैल 2026
यह विचारपूर्ण लेख रामायण और रामचरितमानस के आधार पर रामराज्य की आदर्श शासन व्यवस्था का विस्तृत चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें श्रीराम के चरित्र, धर्मनिष्ठ शासन, सामाजिक समरसता और प्रकृति के संतुलन के माध्यम से एक आदर्श राष्ट्र की अवधारणा को स्पष्ट किया गया है।
यह शोधपरक लेख असम में रामकथा की समृद्ध परम्परा और उसके स्थानीय स्वरूपों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। माधव कन्दली, श्रीमन्त शंकरदेव और माधवदेव जैसे संतों एवं कवियों द्वारा रामायण को असमिया लोकजीवन के अनुरूप ढालकर जन-जन तक पहुँचाने की प्रक्रिया का अत्यन्त सारगर्भित विवेचन किया गया है।
यह लेख भगवान श्रीराम के जीवन को सामाजिक समरसता, न्याय और समन्वय की सर्वोच्च आदर्श परंपरा के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें दर्शाया गया है कि किस प्रकार श्रीराम ने अपने आचरण से परिवार, समाज और राज्य में समानता, करुणा और धर्म की स्थापना की। निषादराज, शबरी और केवट…
यह भावपूर्ण लेख श्रीराम और हनुमान जी के अद्वितीय प्रेम, भक्ति और समर्पण के दिव्य संबंध का वर्णन करता है। रामायण के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि निस्वार्थ सेवा, अटूट विश्वास और भक्ति ही जीवन के सभी संकटों का समाधान है।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति में श्रीराम केवल एक देवता नहीं, बल्कि जनजीवन के अभिन्न अंग के रूप में विद्यमान हैं। यह लेख बताता है कि किस प्रकार यहाँ के दैनिक व्यवहार, कृषि परम्पराओं, लोकगीतों और ऐतिहासिक स्थलों में सगुण और निर्गुण दोनों रूपों में राम गहराई से समाहित हैं।
छत्तीसगढ़ की भुंजिया जनजाति में भगवान श्रीराम केवल देवता नहीं, बल्कि परम सखा और रक्षक के रूप में पूजित हैं। यह लेख उनके अद्भुत लोकविश्वास, लाल बंगला परम्परा और लक्ष्मण रेखा से जुड़ी अनोखी कथा के माध्यम से वनवासी जीवन में रची-बसी रामभक्ति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।
तिरुपुल्लाणी स्थित ‘आदि जगन्नाथ पेरुमल मन्दिर’ भगवान श्रीराम के उस दुर्लभ क्रोधित स्वरूप का साक्षी है, जब उन्होंने समुद्र के अहंकार को चुनौती दी थी। यह लेख श्रीराम के प्रेम, संकल्प, शरणागति और करुणा के अद्भुत प्रसंगों को प्रस्तुत करता है, जिसमें रामसेतु निर्माण, विभीषण की शरणागति और ‘दर्भशयनम’ रूप…
यह लेख श्रीराम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप की व्यापक व्याख्या करता है, जिसमें वेदों, उपनिषदों और विभिन्न क्षेत्रीय रामकथाओं के माध्यम से उनकी सार्वभौमिक उपस्थिति को दर्शाया गया है। विशेष रूप से असम की कार्बी जनजाति में प्रचलित ‘छाबिन आलुन’ रामायण के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया…
उदयपुर के निकट नागदा स्थित सास-बहू मन्दिर की हजार वर्ष पुरानी पाषाण शिल्पकला में रामायण के विविध प्रसंगों का अद्भुत अंकन भारतीय सांस्कृतिक चेतना की अनुपम अभिव्यक्ति है। गुहिलकालीन इस मन्दिर में श्रीराम के वनवास, किष्किन्धा और लंका काण्ड के दृश्य अत्यन्त सूक्ष्मता और सजीवता के साथ उकेरे गए हैं…
यह लेख उत्तराखण्ड के गढ़वाल क्षेत्र में प्रचलित रामायण की समृद्ध लोक नाट्य परम्परा का भावपूर्ण और शोधपरक चित्रण प्रस्तुत करता है। ‘रम्माण’ से लेकर गढ़वाली रामलीला तक, इसमें स्थानीय संस्कृति, लोकगीतों और रीति-रिवाजों के साथ रामकथा के अद्भुत समन्वय को दर्शाया गया है, जो इस अमूल्य धरोहर के संरक्षण…
डॉ. रत्ना त्रिवेदी का यह शोधपरक लेख दक्षिण गुजरात के डांग क्षेत्र में प्रचलित ‘कुंकना रामकथा’ की विशिष्ट लोकपरम्परा का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें राम को वनवासी नायक और सीता को सशक्त स्त्री के रूप में चित्रित किया गया है, जो जनजातीय जीवन-दर्शन और प्रकृति-संबंध को अभिव्यक्त करता…
यह लेख छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति में रचे-बसे भगवान श्रीराम के आत्मीय, पारिवारिक और लोकजीवन से जुड़े स्वरूप का मार्मिक चित्रण करता है। यहाँ श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि दुलारे भांजे के रूप में पूजे जाते हैं, जिनकी उपस्थिति विवाह गीतों, सोहर, फाग, ददरिया और नाचा जैसे लोक रूपों में सहज…
माता शबरी का जीवन असीम धैर्य, निष्कपट प्रेम और अनन्य भक्ति का अद्वितीय उदाहरण है, जहाँ एक साधारण वनवासी स्त्री अपनी अटूट श्रद्धा के बल पर स्वयं भगवान श्रीराम को अपने आश्रम तक आने के लिए विवश कर देती है। यह लेख शबरी के वैराग्य, सेवा, प्रतीक्षा और नवधा भक्ति…
यह लेख मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरित पाँच ऐसे ‘पंच प्रण’ का विवेचन प्रस्तुत करता है, जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। श्रीराम के आदर्श चरित्र, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और धर्मपालन से प्रेरणा लेते हुए यह लेख जीवन को अनुशासित, समरस और…
यह लेख श्रीरामकथा की वैश्विक लोकप्रियता और उसकी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं मानवीय महत्ता का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें दर्शाया गया है कि रामायण केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक मानव जीवन के आदर्शों का मार्गदर्शन करती है। विविध धर्मों और…
यह लेख हनुमान जी के व्यक्तित्व के उन गूढ़ और कम चर्चित आयामों को उजागर करता है, जो उन्हें केवल बलशाली नायक ही नहीं, बल्कि एक विद्वान, कुशल संचारक, मनोवैज्ञानिक और उत्कृष्ट कूटनीतिज्ञ के रूप में स्थापित करते हैं। हनुमान जी के वाक्-कौशल, विभीषण के साथ उनकी रणनीतिक भूमिका, संघर्ष…
भगवान श्रीराम का वनवास उत्तर से दक्षिण तक केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि प्रेम, समरसता और लोकमंगल का महान अभियान था। निषादराज, केवट और शबरी जैसे प्रसंग यह दर्शाते हैं कि श्रीराम ने समाज के प्रत्येक वर्ग को आत्मीयता से अपनाकर एक सांस्कृतिक एकता का निर्माण किया। यह लेख हमें…
भगवान श्रीराम का वनवास केवल राजसी त्याग की कथा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है। निषादराज, केवट, शबरी और वनवासी समाज के साथ उनके आत्मीय संबंध यह सिद्ध करते हैं कि सच्ची मर्यादा समाज के अंतिम व्यक्ति को सम्मान देने में निहित है। यह लेख…
राम नवमी के पावन अवसर पर प्रस्तुत यह कथा भरत के त्याग, संयम और राजधर्म के अद्वितीय आदर्श को उजागर करती है। श्रीराम की अनुपस्थिति में भरत ने खड़ाऊँ को सिंहासन पर स्थापित कर यह सिद्ध किया कि सच्चा शासन सत्ता नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और न्याय पर आधारित होता…
यह लेख भगवान श्रीराम के दंडकारण्य प्रवास को एक सांस्कृतिक एकता और समरसता के महाभियान के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि श्रीराम ने वनवासी समाज के साथ एक साधारण मनुष्य की भाँति जीवन जीते हुए उनके जीवन-मूल्यों, स्त्री-सम्मान और लोक-परम्पराओं को समृद्ध किया। आज भी…
वैदिक काल से ध्वज राजचिह्नों में सर्वोच्च स्थान रखता था। युद्ध में योद्धाओं की पहचान, सेना का उत्साह और राजगौरव का प्रतीक यही ध्वज था। पताका, ध्वजदंड, चिह्न और अवचूल — इन अंगों से निर्मित ध्वज भारतीय साहित्य और कला दोनों में विस्तार से वर्णित है।
पृथ्वीसिंह आजाद (1892-1989) गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य और महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने अमेरिका, रूस और भारत में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। सेलुलर जेल में कठोर सजा भोगी। स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा के सदस्य बने और 1977 में पद्म भूषण से सम्मानित हुए।
यह लेख गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। इसमें शिवाजी को केवल क्षेत्रीय नायक नहीं, बल्कि अखंड भारत की राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लेख विभाजनकारी राजनीति और इतिहास में फैलाए गए मिथ्यावाद की आलोचना करते हुए…
जब भगवान शिव बारात लेकर आए तो रानी मैना ने राख से सने, सर्पों को धारण किए भोलेनाथ को देखकर विवाह से मना कर दिया। लेकिन पार्वती ने विश्वास और प्रेम से क्या उत्तर दिया? महाशिवरात्रि पर जानिए यह अद्भुत कथा।
अजयमेरु की अजेय पर्वतीय अस्मिता, चौहान-कालीन स्थापत्य की गौरवगाथा, मुगलकालीन परकोटों की सामरिक संरचना तथा राजवंशीय हवेलियों का वैभव—इन सबका समन्वित इतिहास अजमेर की दीर्घ सांस्कृतिक चेतना का दर्पण है। इसके द्वारों और कोठियों में निहित विरासत को जानने हेतु पूर्ण आलेख अवश्य पढ़ें।
11 फरवरी हमें उस अग्निपुत्र का स्मरण कराता है, जिसने वनांचल से उठकर साम्राज्यवादी अन्याय को ललकारा। तिलका मांझी ने सिद्ध किया कि स्वाधीनता भिक्षा नहीं, साहस से अर्जित अधिकार है। उनका जीवन त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का ज्वलंत मंत्र है।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रामगढ़ की रानी अवंती बाई लोधी के अद्भुत शौर्य, बलिदान और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का प्रामाणिक ऐतिहासिक विवरण।
सिल्क मार्ग केवल व्यापार का पथ ही नहीं, वह सुरों, वाद्यों और संस्कृतियों का जीवंत संगम था। भारत, चीन, फ्रांस और मध्य एशिया में संगीत कैसे यात्राओं के साथ रूपांतरित हुआ, यह आलेख उसी साझा मानवीय रचनात्मकता और सांस्कृतिक संवाद की कथा खोलता है।
खैरागढ़, छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला होते हुए भी एशिया के प्रथम संगीत विश्वविद्यालय के कारण वैश्विक पहचान रखता है। 1956 में राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और महारानी पद्मावती देवी ने अपनी पुत्री इंदिरा की स्मृति में इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना की, जहाँ संगीत, नृत्य और ललित कलाओं…
गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित मोढेरा का सूर्य मंदिर भारतीय स्थापत्य, खगोल विज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान परंपरा का अद्भुत उदाहरण है। सोलंकी शासक भीम प्रथम द्वारा 11वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर मारू-गुर्जर शैली, सूर्य उपासना, ज्यामितीय संरचना और खगोलीय सटीकता का अनुपम संगम प्रस्तुत करता है। सूर्यकुंड, नृत्यमंडप…