आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी | रविवार

नक्षत्र: रोहिणी | योग: धृति | करण: शकुनि

पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जून 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी | रविवार

नक्षत्र: रोहिणी | योग: धृति | करण: शकुनि

पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जून 2026

गोत्रोद्भव : संस्कृत वाङ्मय

भारतीय समाज की कुछ प्रधान विशेषताओं में से एक है - गोत्र परम्परा। पाणिनि के अनुसार तीसरी पीढ़ी से आगे की संतान 'गोत्र' कहलाती है। यह व्यवस्था वंशावली पहचान, विवाह नियमन और सामाजिक संगठन का आधार रही है।

मानव इतिहास को सहेजती गोत्र प्रणाली

गोत्र प्रणाली मानव जाति के इतिहास, वंश परंपरा और सामाजिक पहचान को सहेजने वाली प्राचीन भारतीय व्यवस्था है। यह न केवल पीढ़ियों को जोड़ती है, बल्कि सांस्कृतिक और जैविक विरासत की भी रक्षा करती है।

मानव इतिहास को सहेजती गोत्र प्रणाली

जो समाज अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी नहीं रखता, अपने पुरखों की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण न कर उन्हें भूल जाता है ,वहां समाजीकरण में अत्यंत वीभत्स दृश्य पैदा होते है और अंततः विप्लप या आतंक का कारण बनते है। प्राचीन भारतीय मनीषी इस मनोवैज्ञानिक सत्य से भलीभांति परिचित थे…