आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार

नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर

पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार

नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर

पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

जनजातीय संस्कृति में पगड़ी का महत्व : बस्तर

भारतीय संस्कृति में पगड़ी का काफी महत्व है। प्राचिनकाल में राजा-महाराजा और आम जनता पगड़ी पहना करती थी। पगड़ी पहनने का प्रचलन उस काल से लेकर आज तक बना हुआ है। पगड़ी को सम्मान का प्रतीक माना जाता है। सिर पर बान्धने वाले परिधान को पगड़ी, साफा, पाग, कपालिका शिरस्त्राण…

डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर : जीवन कार्य

(14 अप्रेल, जयन्ती पर विशेष)

दलितों के मसीहा, संविधान निर्माता, बाबा साहब आदि अनेकों विशेषणों से सम्बोधित किए जानेवाले डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल, 1891 को हुआ। भीमराव, रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की चौदहवीं संतान थे। वे हिन्दू महार जाति से…

कब होगा मूल्यांकन अर्थशास्त्री डॉ. आम्बेडकर का?

आर्थिक जगत में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के योगदान को हमेशा कमतर आंका गया है। डॉ. अम्बेडकर का कद इतना बड़ा था कि उसका आकलन छोटी बात नहीं है। आमतौर पर जन-जन में उनकी छवि संविधान निर्माता और युगांतरकारी नेता के रूप में ही प्रमुखता से रही है। अर्थ जगत में…

दक्षिण कोसल के लोक साहित्य में राम

छत्तीसगढ़ी प्रहेलिकाओं में त्रेतायुगीन चरित्रों का भी संकेत मिलता है। राम यहां के जन जीवन में रमें हुए दिखाई देते हैं। विद्वानों का कथन है कि इस भू-भाग भगवान राम ने अपने वनवास का काफ़ी समय व्यतीत किया। छत्तीसगढ़ी की प्रहेलिकाओं में राम और सीता का स्थायीकरण हुआ है।

राम…

सुरही नदी के तीर देऊर भाना के पुरातात्विक अवशेष

गंडई की सुरही नदी सदानीरा है। बड़ी-बड़ी नदियाँ भीषण गर्मी में सूख जाती हैं, परन्तु सुरही नदी में जल प्रवाह बारहों महीने बना रहता है। सुरही नदी अपने उद्गम बंजारी से लेकर संगम कौहागुड़ी (शिवनाथ नदी) तक अनेकों पुरातातविक स्थलों को अपने आँचल में सेमेटी हुई है। गंडई अंचल अपनी…

दर्पण के ज़रिए समझिये समाज की सच्चाई

भारत जैसे बड़े देश में व् दुनिया भर में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा अथवा महत्वपूर्ण स्तम्भ बताया जाता है. मीडिया मतलब हर वह माध्यम है जिससे जनता तक जानकारियाँ, विचार व् नीतियाँ पहुँच सके. इस मीडिया के तंत्र में समाचार पत्र, पुस्तक, पत्रिकाएं, टेलीवीजन, रेडियो, इन्टरनेट इत्यादि हैं. टीवी…

गंडई का शिवालय जहाँ पाषाण बोलते हैं

छत्तीसगढ़ प्राचीनकाल से आस्था का केन्द्र बिंदु रहा है। यहां सिरपुर, शिवरीनारायण, राजिम, मल्हार, रतनपुर, पाली,  ताला, भोरमदेव, आरंग, जांजगीर, देवबलौदा, बारसूर, जैसे अनेक पुरातात्विक स्थलों का अपना पृथक-पृथक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व है।

यहां के मंदिरों में उत्कीर्ण शिल्पांकन तत्कालीन समाज की धार्मिक व सांस्कृतिक स्थितियों के जीवन्त…

वासंती नवसस्येष्टि पर्व : होलिकोत्सव

हमारा भारत देश उत्सवों एवं पर्वों का देश है, यहाँ की संस्कृति में बारहों मास उल्लास की व्यवस्था है। ॠतुओं के अनुसार एवं ॠतु परिवर्तन पर त्यौहार मनाए जाते हैं, जो समाज को सांस्कृतिक शिक्षा देते हैं तथा संस्कृति को समृद्ध करते हैं। फ़ाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई…

गाँव का रक्षक घुड़सवार देवता : बस्तर अंचल

एक फ़िल्म का गीत याद आता है, अंधेरी रातों में सुनसान राहों पर, हर ज़ुल्म मिटाने को एक मसीहा निकलता है…… कुछ ऐसी कहानी बस्तर के लोकदेवता राजा राव की है। खडग एवं खेटक धारण कर, घोड़े पर सवार होकर राजाराव गाँव की सरहद पर तैनात होते हैं और सभी…

सिंधड़ी दा, सेवण दा सखी शाहबाज कलंदर : संत झूलेलाल

भारत में विभिन्न धर्मों, समुदायों और जातियों का समावेश है इसलिए यहाँ अनेकता में एकता के दर्शन होते हैं। यह हमारे देश के लिए गर्व की बात है कि यहाँ सभी धर्मों के त्यौहारों को प्रमुखता से मनाया जाता है चाहे वह दीपावली हो, ईद हो, क्रिसमस हो या भगवान…

बच्चों के मानसिक विकास के लिए मातृभाषा उतनी ही आवश्यक है जितना शारीरिक विकास के लिए माँ का दूध : महात्मा गांधी

अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस विशेष आलेख

मातृभाषा का रिश्ता जन्मदायिनी माता के साथ स्थूल रूप से जोड़ा जाता है, परंतु मातृभाषा से अभिप्राय उस परिवेश, स्थान,समूह में बोली जाने वाली भाषा से है जिसमें रहकर मनुष्य अपने बाल्यकाल में दुनियां के संपर्क में आता है, अर्थात मातृभाषा ही शिशु को…

बस्तर का हल्बा विद्रोह और ताड़ झोंकनी

काकतीय (चालुक्य) वंश के राजा दलपत देव (1716-1775) की दलपत देव की पटरानी रामकुँअर चँदेलिन थी एवं छ: अन्य रानियाँ थी। पटरानी के पुत्र का नाम अजमेर सिंह और दूसरी रानी के पुत्र का नाम दरियाव देव था। दरियाव देव उम्र में बड़ा था, इसलिए राजगद्दी पर अपना अधिकार जमा…

बस्तर की महान क्रांति का नायक गुंडाधुर: भूमकाल विद्रोह

रायबहादुर पंडा बैजनाथ (1903 – 1910 ई.) राज्य में अधीक्षक की हैसियत से नियुक्त हुए थे। पंडा बैजनाथ का प्रशासन निरंकुशता का द्योतक था जबकि उनके कार्य प्रगतिशील प्रतीत होते थे। उदाहरण के लिये शिक्षा के प्रसार के लिये उन्होंने उर्जा झोंक दी किंतु इसके लिये आदिवासियों को विश्वास में…

प्राचीन दक्षिण कोसल के शिल्पकार : विश्वकर्मा जयंती विशेष

विश्वकर्मा जयंती, माघ सुदी त्रयोदशी विशेष आलेख

भारत में तीर्थाटन की परम्परा सहस्त्राब्दियों से रही है। परन्तु समय के साथ लोगों की रुचि एवं विचारधारा में परिवर्तन हो रहा है। काम से ऊबने पर मन मस्तिष्क को तरोताजा करने के लिए लोग प्राचीन पुरातात्विक एवं प्राकृतिक स्थलों के सपरिवार दर्शन…

इशारों की भाषा है ग़ज़ल : पद्मश्री मदन चौहान से एक साक्षात्कार

ग़ज़ल इशारों की भाषा है। सूफ़ी नज़्मों और ग़ज़लों में भी इशारों-इशारों में रूहानी प्रेम के जरिए ईश्वर तक पहुँचने की बात होती है। सूफ़ी एक स्वभाव का नाम है। सूफ़ी रचनाओं का सार भी यही है कि ईश्वरीय प्रेम के लिए धरती पर इंसान और इंसान के बीच परस्पर…

युवा बैगा वनवासियों का प्रिय दसेरा नृत्य

वनवासी संस्कृति में उत्सव मनाने के लिए नृत्य प्रधान होता है। जब भी कोई उत्सव मनाते हैं वहाँ नृत्य एवं गान आवश्यक हो जाता है। ढोल की थाप के साथ सामुहिक रुप से उठते हुए कदम अद्भुत दृश्य उत्पन्न करते हैं। यह नृत्य युवाओं को प्रिय है क्योंकि इससे ही…

ऐसी चित्रकारी जहाँ देह बन जाती है कैनवास

भारत विभिन्नताओं का देश है, यहाँ आदिम जातियाँ, आदिम संस्कृति से लेकर आधुनिक संस्कृति भी दिखाई देती है। यहाँ उत्तर से लेकर दक्षिण तक एक ही कालखंड में विभिन्न मौसम मिल जाएंगे तो विभिन्न प्रकार के खान पान के साथ विभिन्न बोली भाषाओं भी सुनने मिलती हैं, इतनी विभिन्नताएं होते…

'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा, नारा देने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस

(23 जनवरी, जयन्ती पर विशेष)

स्वर्गीय श्री कपिल दा कहते थे, “मेरी दृष्टि में स्वामी विवेकानन्द के सन्देश के प्राण स्वर को समझकर कार्यान्वित करनेवाले तीन व्यक्तित्व हुए। उनमें से प्रथम हैं - भगिनी निवेदिता, दूसरे हैं महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस और तीसरे हैं कन्याकुमारी स्थित विवेकानन्द शिला…

बुद्ध प्रतिमाओं की मुद्राएं

भारत में एक दौर ऐसा आया कि भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं बहुतायत में निर्मित होने लगी। स्थानक बुद्ध से लेकर ध्यानस्थ बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित होने लगी। ज्ञात हो कि भारतीय शिल्पकला में हिन्दू एवं बौद्ध प्रतिमाओं में प्रमुखता से आसन एवं हस्त मुद्राएं अंकित की जाती है।

हमें प्राचीन…

स्वामी विवेकानन्द का जीवन और जगत को उनकी देन

(12 जनवरी, स्वामी विवेकानन्द जयन्ती पर विशेष)

स्वामी विवेकानन्द भारत ही नहीं अपितु विश्व के महानतम आध्यात्मिक गुरुओं में से हैं। वे आध्यात्मिक चिंतक होने के साथ ही बहु आयामी विचारक, प्रभावशाली वक्ता, संवेदनशील समाज सुधारक, समाजसेवी और उत्कट राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने भारतीय अध्यात्म से ऊर्जित गुरु रामकृष्ण के चिंतन…

भगवान राजीव लोचन एवं भक्तिन राजिम माता : विशेष आलेख

राजिम दक्षिण कोसल का सबसे बड़ा सनातन तीर्थस्थल के रूप में चिन्हित रहा है क्योंकि यह नगर तीन नदियों उत्पलेश्वर (चित्रोत्पला) (सिहावा से राजिम तक महानदी) प्रेतोद्धारिणी (पैरी) एवं सुन्दराभूति (सोंधुर) के तट पर बसा है।

प्रेतोद्धारिणी की महत्ता महाभारत काल से पितृकर्म के लिए प्रतिष्ठित, चिन्हित रही है जिसका…

लोकगीतों में राम और रामायण के पात्र

लोगों के कंठ में लोकगीत समाहित रहते है, जो साहित्य की एक विधा है। हर एक भाषा के अपने लोकगीत है जो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं द्वारा विशेष अवसर पर गाये जाते है। जिसका अपना एक विशेष महत्व होता है, श्रीराम ऐसे महान विभुति है जिनके व्यक्तितव से सारा संसार…

बहुआयामी जीवन संदर्भों के रचनाकार: नारायण लाल परमार

01 जनवरी, परमार जी के जन्मदिन पर केन्द्रित लेख

कवि एक शब्द जरूर है, किन्तु कवि होने का अर्थ हर युग में एक नहीं रहा है। यह केवल कालगत सत्य नहीं है। एक ही समय में भी, विभिन्न परिस्थितियों वाले देशों में कवि होने का अर्थ बदल जाता है। कभी-कभी…

ह्रदय से अत्यंत ही भावुक लेकिन तेजस्वी नेता थे अटल बिहारी वाजपेयी : अशोक बजाज

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष है. हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं. पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं. कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है. यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है, यह तर्पण…

जन-जागरण तथा सामाजिक क्रांति के अग्रदूत : पंडित सुन्दरलाल शर्मा

छत्तीसगढ़ केवल एक जनजातीय क्षेत्र ही नहीं है। यह एक ऐसा वैचारिक केन्द्र भी रहा है,जहाँ से एक सामाजिक परिवर्तन का सूत्रपात हुआ। शोषित उपेक्षित दलित समाज को मुख्यधारा में जोड़नेे का कार्य जहां से प्रारंभ हुआ, वह छत्तीसगढ़ ही है। इसमें पंडित सुन्दरलाल शर्मा की एक महती भूमिका रही…

लाला जगदलपुरी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व हरिहर वैष्णव की कलम से

लाला जगदलपुरी बस्तर-साहित्याकाश के वे सूर्य हैं, जिनकी आभा से हिन्दी साहित्याकाश के कई नक्षत्र दीपित हुए और आज भी हो रहे हैं। ऐसे नक्षत्रों में शानी, डॉ. धनञ्जय वर्मा और लक्ष्मीनारायण "पयोधि" के नाम अग्रगण्य हैं। 17 दिसम्बर 1920 को जगदलपुर में जन्मे दण्डकारण्य के इस ऋषि, सन्त और…

जिनकी रचनाओं ने राष्ट्रीयता और देशप्रेम की भावना जगाई : राष्ट्रकवि पुण्यतिथि

आज राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि है। इनका जन्म 3 अगस्त 1886 को छोटे से कस्बे चिरगांव में हुआ था जो झांसी से 35 किमी की दूरी पर है। राष्ट्रजीवन की चेतना को मंत्र स्वर देने वाले राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को साहित्य जगत में दद्दा के नाम से जाना जाता…

संस्कृत ग्रंथ 'रामायण' का तमिल में अनुवाद : चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म दिसम्बर माह की दस तारीख को 1878 में मद्रास के थोरपल्ली ग्राम में हुआ था। आप राजनेता, वकील, लेखक, स्वतंत्रता सेनानी, भारत के अंतिम गवर्नर जनरल होने के साथ दार्शनिक भी थे। राजगोपालचारी को कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी के रूप में भी चुना गया था। अंतिम…

युद्ध के मैदान से आया जीवन दर्शन : गीता जयंती विशेष

आज महत्वपूर्ण तिथि है, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है, द्वापर युग में इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसलिए यह तिथि गीता जयंती के नाम से प्रसिद्ध है और यह तिथि भगवत् गीता के अवतरण दिवस के रुप में मनाई…

गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्व विद्यालय में 5-6 नवम्बर को दो दिवसीय शोध संगोष्ठी

दक्षिण कोसल का इतिहास, संस्कृति, सभ्यता एवं समाज विषयक राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का दो दिवसीय आयोजन 5 एवं 6 नवम्बर 2019 को गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय में सेंटर फ़ॉर स्टडीज ऑन हॉलेस्टिक डेवलपमेंट, रायपुर एवं गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में हो रहा है।

इस संगोष्ठी में…