संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर
पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026
बाँस से व्यक्ति का प्रथम परिचय सुर के साथ होता है तथा जब सुर की बात हो तो कृष्ण की बांसूरी आँखों के सामने दिखाई देने लगती है। इसकी मधुर धुन मन को मोहित कर लेती है। इस सुरीले पौधे का दैनिक जीवन में अत्यधिक महत्व एवं मानव मन को…
विजयादशमी जिसे सामान्यतः दशहरा के नाम से जाना जाता है। असत्य पर सत्य की जीत और पराक्रम का पर्व है। जिसे संपूर्ण भारतवर्ष में अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा देश भर में प्रसिद्ध है, जो लगभग चार महीने तक चलता है। बस्तर दशहरे के बाद…
हमारा छत्तीसगढ़, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की ननिहाल, जो अतीत में दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था। यहां भगवान श्रीराम से जुड़ी अनेक घटनाएं घटित हुई है। यह पुण्य धरा भगवान श्रीराम से जुड़ी अनेक घटनाओं का साक्षी रही है।
कदम कदम पर बिखरी लोकगाथाओं में रामायण से…
बहुत से व्यक्ति किसी विधा-विशेष में दक्ष होते हैं, उन्हें हम उनकी विशेष विधा के कारण पहचानते हैं। कुछ व्यक्ति अनेक विधाओं में दक्ष होते हैं, उन्हें हम बहु-आयामी प्रतिभा के रूप में जानते हैं। बहुत से प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्ति केवल अपनी प्रतिभा के प्रचार-प्रसार में…
बहुत पुरानी बात है जब बालाघाट लांजीगढ़ रियासत के राजा सिंहलसाय ध्रुव थे। राजा राजा की रानी गागिन अपूर्व सुंदरी थी। लांजीगढ़ पहाड़ी और दुर्गम जंगलों से घिरा था। यहां गेहूं ज्वार और बाजरा की खेती होती थी, भरपूर फसल होने के कारण लांजीगढ़ एक मजबूत रियासत मानी जाती थी…
जो पत्थरों से जितना रहे दूर
उतने रहे असभ्य
उतने रहे क्रूर।
जो पत्थरों से करते रहे प्यार
चिनते रहे दीवार
बन बैठे सरदार।
फेंकते रहे पत्थर होते रहे दूर,
नियति ने सपने भी
किये चूर चूर।
पत्थरों को रगड़ पैदा की आग,
उन्ही की बुझी भूख,
उन्ही के जागे…
प्राचीन महाकाव्यों के प्रसिद्ध पात्रों पर उपन्यास लेखन किसी भी साहित्यकार के लिए एक चुनौतीपूर्ण और जोख़िम भरा कार्य होता है। चुनौतीपूर्ण इसलिए कि लेखक को उन पात्रों से जुड़े पौराणिक प्रसंगों और तथ्यों का बहुत गहराई से अध्ययन करना पड़ता है। इतना ही नहीं, बल्कि उसे उन पात्रों की…
हमारे अनेक विद्वान साहित्यकारों और महान नेताओं ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में महिमामण्डित किया है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय एकता की भाषा भी कहा है। उनके विचारों से हम सहमत भी हैं। हमने 15 अगस्त 2021 को अपनी आजादी के 74 साल पूरे कर लिए और हिन्दी को राजभाषा…
एक नवंबर 2020 को पृथक राज्य बनने से पूर्व छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का अविभाज्य अंग था। प्राकृतिक सौंदर्य एवं अपार खनिज संपदा तथा समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक भंडार होने के बावजूद पहले उसकी कोई अलग पहचान से नहीं थी। दुष्यंत कुमार का यह शेर छ.ग. पर सटीक बैठता था और कई…
कबीर पंथ के चौदहवे आचार्य पंथश्री गृन्धमुनिनाम साहब ने अपने ग्रंथ ‘सद्गुरु कबीर ज्ञान पयोनिधि’ की प्रस्तावना में लिखा है,- “संसार के लोग राख के ढेर पर ही पैर रखकर चलते हैं- जलती आग पर नहीं। किन्तु जो इसके ठीक विपरीत होते हैं, आग पर चलकर अग्नि परीक्षा देते हैं–…
प्रकृति और मानव का अटूट संबंध सृष्टि के निर्माण के साथ ही चला आ रहा है। धरती सदैव ही समस्त जीव-जन्तुओं का भरण-पोषण करने वाली रही है। 'क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा, पंच रचित अति अधम सरीरा ।' इन पाँच तत्वों से सृष्टि की संरचना हुई है। बिना प्रकृति के…
भारतीय धर्म दर्शन तो सनातन है, अगर ऋग्वेद को भारतीय सभ्यता और धर्म का आधार मानें तो कम से कम 10,000 वर्ष से देश के सामाजिक, सांस्कृतिक तत्वों की निरंतरता बनी हुई है। किसी देश में रहने वाले लोगों की पहचान का आधार उनकी भाषा है जैसे फ्रांस के लोग…
लोक गीत लोक जीवन के अन्तर्मन की अतल गहराइयों से उपजी भावानुभूति है। इसलिए लोकगीतों में लोक समाज का क्रिया-व्यापार, जय-पराजय, हर्ष-विषाद उत्थान-पतन, सुख-दुख सब समाहित रहता है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा है कि "ये गीत प्रकृति के उद्गम और आर्येत्तर के वेद है।" उक्त कथन लोक गीत की…
प्रकृति मनुष्य को सहचरी है, यह सर्वविदित है। किन्तु मनुष्य प्रकृति का कितना सहचर है? यह प्रश्न हमें निरूत्तर कर देता है। हम सोचने के लिए विवश हो जाते हैं कि सचमुच प्रकृति जिस तरह से अपने दायित्वों का निर्वाह कर रही हैं? क्या मनुष्य प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों…
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ राम की पुरातन एवं सनातन ऐतिहासिकता के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की स्थापना भी हो जाएगी। अब विभिन्न रामायणों में दर्ज उस विज्ञान की वैज्ञानिकताओं को भी मान्यता देने की आवश्यकता है, जिन्हें वामपंथी पूर्वाग्रहों के चलते वैज्ञानिक एवं बुद्धिजीवी न केवल नकारते रहे…
प्राचीनकाल से भारत भूमि में संत-महात्माओं, ॠषि-मुनियों की सुदीर्घ परम्परा रही है। संत-महात्माओं के आशीषों के फ़लों की किंदन्तियो, किस्से कहानियों के रुप में वर्तमान में चर्चा होती है तो उनके द्वारा दिए गये शापों की भी चर्चा होती है। ऐसा ही एक शाप लखनपुर को मिला था।
जानकारों की…
दुनिया अजब गजब है, इस धरती पर इतने रहस्य छुपे हुए हैं, जिनकी कल्पना नहीं की जा सकती। भले ही आज मानव चाँद पर पहुंचकर मंगल ग्रह पर बस्ती बसाने का प्रयत्न कर हो, पर धरती के रहस्य उसे अचंभे में डाल ही देते हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश भी कुछ ऐसा…
ग्लोबल इनसायक्लोपीडिया ऑफ़ रामायण को तैयार करने के दृष्टिकोण से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेब शोध संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 29 अगस्त से 31 अगस्त 2020 तक किया गया। जिसका आयोजन गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़, अयोध्या शोध संस्थान अयोध्या उत्तर प्रदेश एवं सेंटर फॉर स्टडीज एंड हॉलिस्टिक डेवलपमेंट रायपुर…
गोस्वामी तुलसीदास भारत के गिने-चुने महान कवियों में हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से मानव-समाज को सतत् ऊपर उठाने का प्रयत्न किया है। यही कारण है कि रामचरित मानस विनयपत्रिका, हनुमान चालीसा जैसी उनकी रचनाएँ आज भी लाखों लोगों के द्वारा रोज घर-घर में पढ़ी जाती है। भारत के…
वाचिक परम्पराएं सभी संस्कृतियों का एक महत्वपूर्ण अंग होती हैं। लिखित भाषा का प्रयोग न करने वाले लोक समुदाय में संस्कृति का ढांचा अधिकतर मौखिक परम्परा पर आधारित होता है। कथा, गाथा, गीत, भजन, नाटिका, प्रहसन, मुहावरा, लोकोक्ति, मंत्र आदि रूपों में मौखिक साधनों द्वारा परम्परा का संचार ही वाचिक…
ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण, सेंटर फॉर स्टडी ऑन हॉलिस्टिक डेवलपमेंट रायपुर और दक्षिण कोशल टुडे छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में ऑन लाईन शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया यह वेबीनार ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण के संयोजक ललित शर्मा की होस्टिंग में राम वनगमन पथ में रामगढ़ का महत्व विषय पर आयोजन…
कोरबा जिला 20°01' उत्तरी अक्षांश और 82°07' पूर्वी देशांतर पर बसा है। इसका गठन 25 मई 1998 को हुआ, उसके पहले यह बिलासपुर जिले का ही एक भाग था। यहाँ का क्षेत्रफल 712000 हेक्टेयर है। जिले में चैतुरगढ़ का किला, तुमान का शिव मंदिर और पाली का शिव मंदिर भारत…
सेंटर फ़ॉर स्टडी ऑन होलिस्टिक डेवलपमेंट, रायपुर नामक संस्था एवं वेबपोर्टल दक्षिण कोसल टुडे के संयुक्त तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 18 मई 2020 सोमवार को सिसको वेबेक्स मीटिंगस् एप के माध्यम ऑनलाईन व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता डॉ प्रवीण कुमार मिश्र, क्षेत्रीय निदेशक भारतीय पुरातत्त्व एवं…
‘संग्रह’ न केवल मनुष्य वरन अनेक जीवों की आदिम प्रवृत्ति है। इस जैविक प्रवृत्ति का उदय कदाचित् जीवितता के लिये हुआ हो, किन्तु अन्य जीव-जन्तुओं की संचयी प्रवृत्ति जीवन की मूलभूत आवश्यकता ‘भोजन-वस्त्र-आवास’ के इर्द-गिर्द केन्द्रित रही जबकि मनुष्य के बौद्धिक विकास के साथ उसकी संचयी-वृत्ति ने अनेक महत्वपूर्ण आयामों…
महिलाओं को अपना समय व ऊर्जा, गप्पें हांकने में, अफवाहें फैलाने में, दूसरों का दोष निकालने में, भौतिक सम्पदा के लिए मुकाबला करने में, झूठा स्तर बनाए रखने में और घमण्ड इत्यादि में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। इससे चारों ओर अप्रसन्नता फैलेगी व ईर्ष्या का प्रादुर्भाव होगा। इन सब पर…
आज हम पद्मश्री श्री विष्णु श्रीधर वाकणकर जी जिसे हम हरिभाऊ के नाम से भी जानते हैं, की जन्मशताब्दी मना रहें हैं। इस महामना का जन्म आज ही के दिन ४ मई १९१९ को मध्यप्रदेश के नीमच नामक स्थान पर हुआ था। आपके माता जी श्रीमती…
पौराणिक ग्रन्थों, साहित्यों में नल और दमयन्ती के प्रेमकथा व संघर्षगाथा का अद्भुत चित्रण किया गया है। नल निषध देश का प्रतापी राजा था, उसकी ख्याति शौर्य से देवताओं को ईर्ष्या होती थी। वे जन नायक के रूप में प्रस्तुत हुए। उन्ही दिनों विदर्भ देश के राजा भीम की पुत्री…
वैदिक कालीन मानव का जीवन सोलह संस्कारों में विभक्त था एवं उसी के अनुसार उनके कार्य और व्यवहार थे। परन्तु जनजातीय समुदाय में संस्कार तो होते हैं पर सोलह संस्कारों जैसी कोई सामाजिक मान्यता नहीं है। जनजातीय समाज मुख्य रुप से जन्म, नामकरण, विवाह और मृत्यु संस्कार को मानता है…
संगीत मनुष्य की आत्मा में निवास करता है, जब भी कहीं सुगम संगीत बजता हुआ सुनाई दे जाए मन तरंगित हो उठता है। प्राचीन भारतीय संस्कृति में संगीत का प्रमुख स्थान है। धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष नामक पुरुषार्थ चतुष्टय में इसे मोक्ष प्राप्ति का सुगम मार्ग माना जाता है…