संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर
पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026
अनेकता में एकता ही भारतीय संस्कृति है और उस अनेकता के मूल में निश्चित रुप से भारत के विभिन्न प्रदेशों में स्थित जनजातीय है। भारत में घुमंतू जनजातियों के लोग हर क्षेत्र में निवास करते हैं इनकी जीवन पद्धति अन्य लोगों से भिन्न है। घुमंतू जनजातियों की वेशभूषा, खान पान…
दक्षिण कोसल यानी प्राचीन छत्तीसगढ़ को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। लोक प्रचलित मान्यता है कि इस अंचल में उनकी माता कौशल्या का मायका रहा है।इस नाते भगवान श्रीराम छत्तीसगढ़ वासियों के भांजे हुए। उनके साथ मामा -भांजा का यह रिश्ता सैकड़ों-हजारों वर्षों से यहाँ के…
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस एक नवम्बर 2022 पर विशेष
भारत के प्रत्येक राज्य और वहाँ के प्रत्येक अंचल की अपनी भाषाएँ, अपनी बोलियाँ, अपना साहित्य, अपना संगीत और अपनी संस्कृति होती है । ये रंग -बिरंगी विविधताएँ ही भारत की राष्ट्रीय पहचान है, जो इस देश को एकता के मज़बूत…
जानिए पर्यटन के चार आधार, सुरक्षा, साधन, आवास आहार।
भारतीय गणराज्य का नवनिर्मित प्रदेश छत्तीसगढ़ है तथा इससे पूर्व यह मध्यप्रदेश का भाग था। प्रकृति ने इस भू-भाग को अपने हाथों से दुलार देकर संवारा है। जब हम भमण करते है तो ज्ञात होता है कि प्रकृति की लाडली संतान…
पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा संघ शिक्षा वर्ग, बौद्धिक वर्ग मैसूर, मई 19, 1967 को दिया गया व्याख्यान
प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सुख की भावना लेकर चलता है। मानव ही नहीं, तो प्राणिमात्र सुख के लिए लालयित है। दुःख को टालना और सुख को प्राप्त करना, यह एक उसकी स्वाभाविक…
भीतर अपने टटोल के देख।
मुख से राम तू बोल के देख।
स्पष्ट नजर आयेगी दुनिया,
अंतस द्वार तू खोल के देख।
राम नाम का ले हाथ तराजू,
खुद को ही तू तोल के देख।
है कीमत तेरा कितना प्यारे,
जा बाजार तू मोल के देख।
कितना मीठा कड़ुवा है…
भाषा भावों और विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम होती है। हिंदी एक प्रवाहमान, सशक्त भाषा है। हिंदी पहले साधारण बोलचाल की भाषा से धीरे-धीरे विकसित हो कर सम्पर्क एवं साहित्य की भाषा बनी। सम्पर्क भाषा बनने में स्थानीय क्षेत्रीय बोलियों का बड़ा योगदान होता है, इन बोलियों के बहुतेरे शब्द…
जब तक नहीं विचार मिलेगा।
बदतर यह संसार मिलेगा।
अफवाहों के बाजारों में,
है भारी कालाबाजारी।
भाईचारे का अभाव है,
सस्ती में तलवार दुधारी।
गोली, बम, बारूद जखीरा,
जगह-जगह अंगार मिलेगा।
जब तक नहीं विचार मिलेगा।
बदतर यह संसार मिलेगा।
शरद पूर्णिमा है महलों में,
बाहर गहन अमावस काली।
कहीं…
(आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष आलेख)
प्रसिद्ध इतिहासकार ई. एच. कार ने कहा था-"इतिहास वर्तमान काल और भूत काल के बीच एक निरंतर संवाद है। इतिहास का दोहरा काम मनुष्य को अतीत के समाज को समझने और वर्तमान समाज के अपने ज्ञान को बढ़ाने में सक्षम बनाना है।" इतिहासकार…
विभाजन विभिषिक स्मृति दिवस 14 अगस्त : विशेष आलेख
देश का विभाजन एक अमानवीय त्रासदी थी जो अपने साथ भारतवर्ष का दुर्भाग्य भी लेकर आई थी। विश्व इतिहास के किसी दौर में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं है कि आप आजादी के लिए संघर्ष करें, आंदोलन चलाएं और जब आजाद…
भारत की कृषिप्रधान और ऋषि परम्परा की संस्कृति में त्योहारों और पर्व उत्सवों का विशेष महत्वपूर्ण स्थान प्राचीन काल से ही रह है। यहां बाराहोमास ऋतु, तिथि, कर्म, धर्मानुसार पर्व और उपासना का विशेष महत्व रहा है ताकि जीवन मे रंग और उत्स बना रहे यद्यपि कुछ पर्वों के मनाने…
बस्तर अंचल अपनी सांस्कृतिक सम्पन्नता के लिए देश ही नहीं, अपितु विदेशों में भी चर्चित है। क्षेत्र चाहे रुपंकर कला का हो या कि प्रदर्शनकारी कलाओं या फिर मौखिक परम्परा का। प्रकृति के अवदान को कभी न भुलाने वाला बस्तर का जन मूलत: प्रकृति का उपासक है। उसके सभी पर्वों…
नागपंचमी विशेष आलेख
प्राचीनकाल में नागों की सत्ता पूरी दुनिया पर थी, जिसके प्रमाण हमें आज भी मिलते हैं। भूगोल की शायद ऐसी कोई संस्कृति या सभ्यता न हो जहाँ नागों का वर्चस्व या प्रभाव न दिखाई देता हो। चाहे भारतीय संस्कृति/सभ्यता हो, चाहे माया सभ्यता हो चाहे मिश्र की…
एक हजार साल से भी पुराना है छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य का इतिहास
भारत के प्रत्येक राज्य और वहाँ के प्रत्येक अंचल की अपनी भाषाएँ, अपनी बोलियाँ, अपना साहित्य, अपना संगीत और अपनी संस्कृति होती है। ये रंग -बिरंगी विविधताएँ ही भारत की राष्ट्रीय पहचान है, जो इस देश को…
प्राचीन भारत में प्रतिमा तथा मूर्ति निर्माण की परंम्परा अत्यतं प्राचीन है, हड़प्पा सभ्यता की कला विश्व प्रसिद्ध है इसके बाद ऐतिहासिक काल के विभिन्न राजवंशों यथा मौर्य, शुगं, कुषाण, सातवाहन तथा गुप्त आदि ने कला को खूब पुष्पित एवं पल्लवित किया। पूर्व मध्य कालीन मूर्तिकला एवं प्रतिमा निर्माण की…
काव्य मीमांसा में राजशेखर ने एक मत देते हुए कहा है कि- "इतिहास पुराणाभ्यां चक्षुर्भ्यामिव सत्कविः. विवेकांजनशुद्धाभ्यां सूक्ष्मप्यर्थमीक्षते !"अर्थात इतिहास लेखन में जितनी दक्षता और सतर्कता अपेक्षित होती है संभवतया उतनी अन्य विधाओं में प्रायः नही होती।" मेरे विचार में यह इतिहास के बारे में शत प्रतिशत सही वक्तव्य है…
छत्तीसगढ़ में रथयात्रा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, यह पर्व उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ राज्य की सांझी संस्कृति की एक मिसाल के रुप में व्याप्त है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रथयात्रा पर्व उतना ही महत्व रखता है, जितना उड़ीसा की संस्कृति में। यहाँ प्राचीन काल से यह पर्व उल्लासपूर्वक…
शराब, मय, मयकदा, रिन्द, जाम, पैमाना, सुराही, साकी आदि विषय-वस्तु पर हजारों गजलें बनी, फिल्मों के गीत बने, कव्वालियाँ बनी। बच्चन ने अपनी मधुशाला में इस विषय-वस्तु में जीवन-दर्शन दिखाया। सभी संत, महात्माओं, ज्ञानियों और विचारकों ने शराब को सामाजिक बुराई ही बताया है। छत्तीसगढ़ी कविताओं में मदिरा का गुणगान…
‘‘यत्र नार्यस्तु पूजयंते, रमंते तत्र देवता,‘‘ अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवताओं का वास होता है। भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का स्थान दिया गया है। देश में माँ दुर्गा को शक्ति की देवी, लक्ष्मी को धन की देवी, सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी…
संत परम्परा के अद्भुत संत सद्गुरू कबीर के जन्म के विषय में अनेक किंवदन्तियाँ प्रचलित हैं, परन्तु एक चर्चा सर्वमान्य कही जाती है कि काशी में लहरतारा- तालाब पर नीरू तथा नीमा नामक जुलाहा दम्पति को एक नवजात शिशु अनाथ रूप में प्राप्त हो गया। इन दोनों ने ही इस…
इतिहास में ऐसे नायक बिरले ही होते हैं जो समाज उद्धार के लिए जन्म लेते हैं तथा समाज को अंधेरे से उजाले की ओर लेकर आते हुए तमसो मा गमय की सुक्ति को चरितार्थ करते हैं। अंग्रेजों के संरक्षण में ईसाईयों द्वारा मचाये गये धर्म परिवर्तन अंधेरे को दूर करने…
सबसे सुंदर रंग-बिरंगी तितली कौन-सी है! सुन्दर तितली का चयन विश्व सुंदरी की तर्ज पर हुआ। तितली सुन्दरी प्रतियोगिता में 'ऑरेंज ऑकलीफ' ने बाजी मारी और उसका नाम भारत की राष्ट्रीय तितली में दर्ज हो गया। छत्तीसगढ़ के भोरमदेव अभ्यारण में पाई जाने वाली तितली को राष्ट्रीय तितली का खिताब…
छत्तीसगढ़ की प्राचीनता और उसकी महत्ता के संदर्भ में अनेक प्रमाण उपलब्ध हैं। इसके बावजूद प्राचीन काल के संदर्भ में कोई उपयुक्त रुप से कालक्रमानुसार वृतांत नहीं मिला है जिससे क्रमबध्द प्रामाणिक इतिहास की पुनर्रचना की जा सके। इसके लिए एक अंश तक ही पौराणिक साहित्य पर निर्भर किया जाता…
भारत की महान संस्कृति को छुद्र दिखाने के लिए विघ्न संतोषियों ने ऐसे झूठ फ़ैलाये जो कि सभ्य समाज के गले से नीचे नहीं उतरते। इनके झूठों को आगे बढ़ाने का कार्य इनके कुशिष्यों ने किया। जो कि कॉपी पेस्ट के रुप में अभी तक चल रहा है। इसमें एक…
संग्रहालय मनुष्य को अतीत की सैर कराता है, जैसे आप टाईम मशीन में प्रवेश कर हजारों साल पुरानी विरासत एवं सभ्यता का अवलोकन कर आते हैं। मानव इतिहास एवं प्राचीन सभ्यता जानने का संग्रहालय प्रमुख साधन है। इसलिए संग्रहालयों का निर्माण किया जाता है, इतिहास को संरक्षित किया जाता है…
गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई 1866 को रत्नागिरी जिले के गुहालक तालुका के कोटलक ग्रामवासी चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी फिर भी इनके लिए अंग्रेजी शिक्षा की व्यवस्था की गई ताकि गोपाल कृष्ण गोखले ब्रिटिश शासन में क्लर्क की…
आठ वर्ष की आयु में दक्षिण से निकले और नर्मदा तट के ओमकारेश्वर में गुरु गोविंदपाद के आश्रम पर जा पहुंचे। जहां समाधिस्थ गुरु ने पूछा, "बालक! तुम कौन हो"?
बालक शंकर ने उत्तर दिया," स्वामी! मैं ना तो मैं पृथ्वी हूं, ना जल हूं ना अग्नि, ना वायु, ना…
हमारे गाँव के बड़े बुजुर्गों ने जब से होश संभाला तब उन्होंने देखा कि उनके पूर्वज ग्राम की पहाड़ी पर पूजन सामग्री लेकर आदि शक्ति मां जगदम्बा भवानी की नित्य पूजा अर्चना करते रहते हैं और अपने ग्राम्य जीवन की सुख-शांति, खुशहाली की कामना करते हैं। आज भी इसी रीति…
छत्तीसगढ के उत्तर पश्चिम सीमांत भाग में स्थित कोरिया जिले का भरतपुर तहसील प्राकृतिक सौदंर्य, पुरातत्वीय धरोहर एवं जनजातीय/सांस्कृतिक विविधताओं से परिपूर्ण भू-भाग है। जन मानस में यह भू-भाग राम के वनगमन मार्ग तथा महाभारत कालीन दंतकथाओं से जुड़ा हुआ है। नवीन सर्वेक्षण से इस क्षेत्र से प्रागैतिहासिक काल के…
राजनांदगांव से 36 कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित डोंगरगढ नगरी धार्मिक विश्वास एवं श्रध्दा का प्रतीक है। डोंगरगढ की पहाड़ी पर स्थित शक्तिरुपा माँ बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर सभी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां मां बम्लेश्वरी देवी के दो विख्यात मंदिर है। डोंगरगढ की पहाड़ी पर 1600…