आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख शुक्ल षष्ठी | बुधवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: अतिगंड | करण: कौलव

पर्व विशेष : | तदनुसार 22 अप्रैल 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख शुक्ल षष्ठी | बुधवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: अतिगंड | करण: कौलव

पर्व विशेष : | तदनुसार 22 अप्रैल 2026

रामगढ़ की रानी अवंती बाई

1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रामगढ़ की रानी अवंती बाई लोधी के अद्भुत शौर्य, बलिदान और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का प्रामाणिक ऐतिहासिक विवरण।

वाद्ययंत्रों की यात्राः सिल्क मार्ग पर सुरों का प्रवास

सिल्क मार्ग केवल व्यापार का पथ ही नहीं, वह सुरों, वाद्यों और संस्कृतियों का जीवंत संगम था। भारत, चीन, फ्रांस और मध्य एशिया में संगीत कैसे यात्राओं के साथ रूपांतरित हुआ, यह आलेख उसी साझा मानवीय रचनात्मकता और सांस्कृतिक संवाद की कथा खोलता है।

खैरागढ़ – एशिया का प्रथम संगीत विश्वविद्यालय

खैरागढ़, छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला होते हुए भी एशिया के प्रथम संगीत विश्वविद्यालय के कारण वैश्विक पहचान रखता है। 1956 में राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और महारानी पद्मावती देवी ने अपनी पुत्री इंदिरा की स्मृति में इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना की, जहाँ संगीत, नृत्य और ललित कलाओं…

"नारी शक्ति की अपरिमितता का द्योतक हैं, दुर्दम्य वीरांगना ऊदा देवी पासी"

वीरांगना ऊदा देवी पासी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की अदम्य योद्धा थीं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ सिकंदर बाग की लड़ाई में अद्भुत साहस का परिचय दिया। पुरुष वेश में पीपल के पेड़ पर चढ़कर 36 अंग्रेज सिपाहियों को मार गिराया। उनका जीवन नारी शक्ति की अपरिमितता और मातृभूमि के लिए…

11 जून 1897 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म

राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने संगठन, लेखन और सशस्त्र संघर्ष के ज़रिए देश की आज़ादी की नींव मज़बूत की। काकोरी कांड में उनके नेतृत्व ने अंग्रेज़ी हुकूमत की नींव हिला दी। उनकी लेखनी, संगठन क्षमता और बलिदान भारतीय युवाओं के लिए आज भी प्रेरणा…

असम के चाय बगान समुदाय का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

असम का चाय जनजाति समुदाय कहा जाता है, औपनिवेशिक काल में विभिन्न भारतीय राज्यों से लाए गए मजदूरों का समूह है, जिन्होंने असम की चाय उद्योग, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष, विद्रोह, शहादत और समृद्ध सांस्कृतिक पहचान असम के इतिहास का एक…

जनजातीय समाज द्वारा इस्लामी आक्रमण का प्रतिकार

जब हम भारत के स्वाधीनता संग्राम की चर्चा करते हैं, तो अंग्रेजों के शासन के विरुद्ध अपने संघर्ष का ही ब्यौरा देते हैं। इस दौरान हम अपने उस संघर्ष को विस्मृत कर देते हैं, जो हमने 9वीं सदी से 18वीं सदी तक इस्लामी आक्रमणकारियों के विरुद्ध किया था। और अंग्रेजों…

जब जंगलों से उठी आज़ादी की पहली आवाज़

इतिहास को ठीक-ठीक न जानने के कारण जब हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं, तो केवल अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष को ही देखते हैं, और उसमें भी 1857 से 1947 तक का ही। 1857 के संग्राम को ही हम अज्ञानवश भारतीयों द्वारा अंग्रेजों के प्रतिकार का पहला प्रयास…

सबसे छोटा युद्ध 97 हजार सैनिकों ने किया था आत्मसमर्पण

पाकिस्तान भारत का ही हिस्सा है, उसका जन्म भारत की भूमि पर हुआ, भारत के भूभाग पर ही पाकिस्तान अस्तित्व में आया । वहां रहने वाले लोग भी भारतीय पूर्वजों के वंशज हैं । फिर भी वे लोग दिन रात भारत के विरुद्ध विष वमन और भारत को मिटाने का…

दो व्यवस्थाओं की खींचतान के बीच पहला आमचुनाव और बस्तर (आलेख - 1)

चुनावी मौसम है, और हर ओर चर्चा चुनावों की ही हो रही है। मैं बस्तर मे हुए पहले लोकसभा चुनावों से ले कर अब तक की परिस्थिति पर केंद्रित एक आलेख श्रंखला आप मित्रों के साथ साझा करने जा रहा हूँ। इस आलेख श्रंखला में हम स-विस्तार और क्रमवार बस्तर…

एक सौ इकसठ वर्ष की कानूनी लड़ाई एवं महत्वपूर्ण घटनाक्रम

अयोध्या में रामजन्म स्थान मुक्ति के लिये सशस्त्र संघर्ष और बलिदान का ही सबसे लंबा इतिहास नहीं है। इतनी लंबी अवधि तक चलने वाली कानूनी लड़ाई का उदाहरण भी दुनियाँ में दूसरा नहीं है। कोई पाँच सौ वर्षों के कुल संघर्ष में लगभग एक सौ साठ साल कानूनी लड़ाई के…

संघर्ष और बलिदान का ऐसा उदाहरण विश्व के इतिहास में कहीं नहीं : अयोध्या

अपने जन्मस्थान अयोध्या में अब रामलला विराजने जा रहे हैं। यह क्षण असाधारण संघर्ष और बलिदान के बाद आया है। जितने आक्रमण अयोध्या पर हुये और बचाने लिये जितने बलिदान अयोध्या में हुये ऐसा उदाहरण विश्व के इतिहास में कहीं नहीं मिलता। सनातनी समाज की हजारों पीढ़ियाँ यह सपना संजोये…

समान नागरिक संहिता और अखंड भारत के समर्थक: श्री के. एम. मुंशी

30 दिसम्बर 1887 सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लेखक और पत्रकार के एम मुंशी का जन्म दिवस

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में कुछ ऐसी दूरदर्शी विभूतियाँ रहीं हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिये सार्वजनिक संघर्ष किया, अनेक बार जेल गये और इसके साथ ही सांस्कृतिक मूल्यों की पुर्नप्रतिष्ठा का अभियान भी चलाया। ऐसे…

भारतीय सांस्कृतिक गौरव पर चिन्तन का माह है दिसम्बर

‘उठो! जागो!…और लक्ष्य प्राप्ति तक रूको मत!‘ भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का गौरव विश्वभर में स्थापित करते हुए मानवता के कल्याण और राष्ट्र पुनरूत्थान के प्रति जीवन समर्पित कर देने वाले युवा सन्यासी स्वामी विवेकानन्द का यह हृदयभेदी आह्वान आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरणा…

बलिदानी सैनिकों की सहायता के लिए मनाया जाता है सशस्त्र सेना झंडा दिवस

भारत में प्रति वर्ष सशस्त्र सेना झंडा दिवस 7 दिसंबर 1949 से हर साल मनाया जाता है। यह भारतीय सशस्त्र सेना बलों के कर्मियों के कल्याण के लिए भारत की जनता से धन जमा करने के प्रति समर्पित एक दिन हैं। इस दिन शहीदों और वीर सेनानियों को सम्मानित किया…

वीर बालिका मैना देवी का बलिदान

3 सितम्बर 1857 चौदह वर्षीय बालिका अंग्रेजों ने कठोर यातनाएँ देकर जिन्दा जलाया

पराधीनता काल के भीषण अत्याचारों से केवल सल्तनकाल का इतिहास ही रक्त रंजित नहीं है, अंग्रेजी शासन काल में भी दर्जनों ऐसी क्रूरतम घटनाएँ इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं जिन्हें पढ़कर आज भी प्रत्येक भारतीय आत्मा…

तत्कालीन कहानियों में विभाजन की त्रासदी

वर्तमान पीढ़ी को स्वतंत्रता मायने ही नहीं जानती, क्योकि इनका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ है। इस स्वतंत्रता को प्राप्त करने में पूर्व की पीढ़ी ने कितने कष्ट सहे और क्या-क्या अत्याचार झेले, इसके विषय में वर्तमान पीढ़ी को जानना आवश्यक है तभी स्वतंत्रता का सही मुल्यांकन कर उसकी रक्षा…

बिंद्रानवागढ़ की जमींदारी

बिंद्रानवागढ जमींदारी का इतिहास शुरु होता है लांजीगढ के राजकुमार सिंघलशाह के छुरा में आकर बसने से। तत्कालीन समय में यहां भुंजिया जाति के राजा चिंडा भुंजिया का शासन था। यहां की जमींदारी मरदा जमींदारी कहलाती थी। राजकुमार सिंघलशाह चूंकि एक राजपुत्र था, उसके छुरा में आकर बसने से चिंडा…

जानिए ऑपरेशन पोलो क्या है?

भारत देश पर ब्रिटेन के लंबे शोषण, उत्पीड़नपूर्ण औपनिवेशिक शासन से 1947 मे स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद लौह व्यक्तित्व और अदम्य साहस के धनी तत्कालीन गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के अथक प्रयासों से 562 देशी रियासतों मे से अधिकतर का भारत विलय हो गया।

जिन्ना जहां एक ओर द्विराष्ट्र…