स्वाभिमान के अनन्य शिखर: महाराणा प्रताप
June 17, 2026
संवत् 2083 विक्रमी | श्रवण कृष्ण दशमी | रविवार
नक्षत्र: आर्द्रा | योग: व्यतिपात | करण: विष्टि
पर्व विशेष : | तदनुसार 06 सितंबर 2026

स्वाधीनता के लिये संघर्ष जितना महत्वपूर्ण है उतना ही महत्वपूर्ण है समाज में स्वत्व जागरण का अभियान। यदि स्वत्ववोध नहीं होगा तो स्वतंत्रता की चेतना कैसे जाग्रत होगी। अपने लेखन से स्वत्व चेतना का यही अभियान चलाया आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने। उन्होने अपना सार्वजनिक जीवन स्वतंत्रता संग्राम से आरंभ किया लेकिन शीघ्र ही आँदोलन से अलग होकर साहित्य से सामाजिक जागरण का अभियान चलाया।
उन्होंने अपने रचना संसार से भारतीय समाज को अपने अतीत की गरिमा एवं गलतियों दोनों से अवगत कराया। उनकी भाषा बहुत रोचक और प्रवाहमयी थी। कथा कहानी, उपन्यास कविता और आलेख सभी विधाओं के सुप्रसिद्ध रचनाकार आचार्य चतुरसेन शास्त्री का जन्म 26 अगस्त 1891को उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले के अंतर्गत ग्राम चांदोख में हुआ था। उनके पिता केवलराम ठाकुर अपने क्षेत्र के एक प्रभावशाली वैद्य थे और आर्यसमाज से जुड़े थे। माता नन्हींदेवी राजस्थान से थीं और भारतीय परंपराओं एवं स्वाभिमान के प्रति समर्पित थीं।
जब आचार्य चतुरसेन जी का जन्म हुआ तो परिवार ने उनका नाम चतुर्भुज रखा। उनकी शिक्षा दीक्षा और आरंभिक जीवन इसी नाम से जाना गया। बालक चतुर्भुज की प्राथमिक शिक्षा पास के गाँव सिकन्दराबाद में हुई। आगे की शिक्षा के लिये जयपुर संस्कृत महाविद्यालय में प्रवेश लिया।
1915 में आयुर्वेदाचार्य एवं संस्कृत में शास्त्री की उपाधि प्राप्त की। वे बचपन से बहुत भावुक और विचारशील स्वभाव के थे और इतने कल्पनाशील कि किसी घटना के एक दो वाक्य सुनकर पूरा दृश्यांकन कर दें। लेखन का शौक बचपन से था। छोटी छोटी कहानियाँ लिखा करते थे।
शिक्षा पूरी करके दिल्ली आये। दिल्ली में आयुर्वेदिक चिकित्सालय आरंभ किया। संवेदनशील इतने थे कि गरीब और बेबश लोगो का इलाज निशुल्क किया करते थे इससे उनका चिकित्सालय न चल पाया। रोगी तो आते पर चिकित्सालय घाटे में रहा। लगातार घाटे के कारण चिकित्सालय बंद कर दिया और पच्चीस रुपये के वेतन पर एक अन्य धर्मार्थ औषधालय में नौकरी कर ली।
लगभग दो वर्ष के इस संघर्ष के बाद 1917 में, वे डीएवी कॉलेज, लाहौर में आयुर्वेद के प्रोफेसर बने। लेकिन यहाँ भी उनका तालमेल न बैठ सका और त्यागपत्र देकर राजस्थान के अजमेर आ गये। यहाँ उनके ससुरजी का औषधालय था। आचार्य चतुरसेन इसी औषधालय जुड़ गये। यहाँ उनके जीवन में स्थायित्व आया और लेखन कार्य को भी गति मिली।
एक लेखक के रूप में उन्होंने अपना नाम चतुरसेन रखा और वे इसी नाम से प्रसिद्ध हुये। उन्होंने साहित्य की प्रत्येक विधा में लेखन किया। उपन्यास, कहानी, गीत, संस्मरण, धार्मिक, ऐतिहासिक, सामाजिक जीवन, चिकित्सा, स्वास्थ्य और तिलस्मी आदि विषयों पर भी लिखा। उनके संपूर्ण लेखकीय जीवन में उनके द्वारा सृजित और प्रकाशित रचनाओं की संख्या 186 है।
जबकि कुछ कहानियाँ और अन्य रचनाएँ प्रकाशित नहीं हो सकीं इन्हें मिलाकर कुल संख्या साढ़े चार सौ से अधिक है। कहानियों और उपन्यासों में उनकी रुचि ऐतिहासिक घटनाओं के प्रति अधिक रही। वे ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से अतीत की विशेषताओं और वर्जनाओं दोनों के प्रति समाज को जाग्रत करना चाहते थे। उनकी भाषा शैली बहुत रोचक और जिज्ञासु थी। अपनी इसी विधा से ही वे अपने समय के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार माने गये।
स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी
दिल्ली और लाहौर में अपने आरंभिक जीवन में आचार्य चतुरसेन शास्त्री स्वाधीनता आँदोलन से जुड़े। 1920 के असहयोग आँदोलन से जुड़े पर दो घटनाओं से उद्वेलित हुये। उनकी दृष्टि में असहयोग आँदोलन में खिलाफत आँदोलन को जोड़ना उचित नहीं था। दूसरा मालाबार हिंसा पर गाँधी जी की भूमिका पर भी उनकी असहमति थी। इसलिये वे स्वतंत्रता संग्राम से दूर हुये और उन्होने गाँधीजी पर भूमिका पर व्यंग करते हुये लेखन आरंभ किया। साहित्य जगत में गाँधीजी पर यह पहली आलोचनात्मक रचना थी।
उनका रचना संसार
आचार्य चतुरसेन शास्त्री का पहला उपन्यास "हृदय की परख" 1918 में प्रकाशित हुआ। 1921 में सत्याग्रह और असहयोग विषय पर गांधीजी पर केन्द्रित आलोचनात्मक कृति आई, जो अपने समय की सर्वाधिक चर्चित रचना रही। उनके उपन्यासों की कुल संख्या बत्तीस है और लगभग सौ नाटक नाटक लिखे।
उनके प्रमुख उपन्यासों में ”वैशाली की नगरवधू”, ”सोमनाथ”, ”वयं रक्षामः”, “सौना और खून”, ”आलमगीर” आदि अपने समय बहुत प्रसिद्ध रहे। उनकी रचनाओं में ग्रामीण, नगरीय, राजसी और सामान्य सभी प्रकार की जीवनशैली की झलक मिलती है।
वे पुराण, इतिहास, संस्कृत, मानव साहित्य और स्वास्थ्य विषयक साहित्य पर बड़ी गम्भीरता और ईमानदारी से लिखते रहे। उनके चिकित्सा एवं आरोग्य शास्त्रों में नारी केन्द्रित अधिक रहे। इनमें महिलाओं की चिकित्सा, आहार और जीवन शैली से स्वस्थ्य रहना, मातृकला तथा अविवाहित युवक-युवतियों के लिए आरोग्य आदि विषयों पर भी उनके ग्रंथों की संख्या एक दर्जन से अधिक है।
एक रचना ”यादों की परछाई" को उन्होने एक ऐसी आत्मकथा के रूप में प्रस्तुत की जिसमें ‘राम’ के ईश्वरीय स्वरूप के बजाय एक पुरुषोत्तम स्वरूप पर केन्द्रित किया ताकि समाज में एक आदर्श जीवन कला विकसित हो।
सोमनाथ’, ‘वयं रक्षाम:’, ‘वैशाली की नगरबधु’, ‘सह्याद्रि की चट्टानें’, ‘अपराजिता’, ‘केसरी सिंह की रिहाई’, ‘अमर सिंह’, चार खंडों में 'सोना और ख़ून', ‘आलमगीर’, ‘धर्मपुत्र’, ‘खग्रास’, ‘मंदिर की नर्तकी’, ‘रक्त की प्यास’, ‘पत्थर युग के दो बुत’, ‘बगुला के पंख’, ‘ह्रदय की परख’ आदि उनके महत्त्वपूर्ण उपन्यास हैं।
हालांकि उनके उपन्यासों में जो शोहरत 'वैशाली की नगरवधू', 'वयं रक्षामः' और 'सोमनाथ' को मिली, वह अन्य को हासिल नहीं है. 'वैशाली की नगरवधू' के बारे में उन्होंने खुद ही लिखा था, 'मैं अब तक की अपनी सारी रचनाओं को रद्द करता हूं, और वैशाली की नगरवधू को अपनी एकमात्र रचना घोषित करता हूं।' यह कृति साल 1957 में पहली बार छपी। तबसे अब तक न जाने इसके कितने संस्करण छप चुके।
यूँ तो उनकी प्रत्येक रचना में व्यापक संदेश फिर भी दो रचनाओं का प्रस्तुतिकरण बहुत अलग अंदाज में है। एक उपन्यास गोला गोली और दूसरा वयम् रक्षाम। कुछ रियासतों में "गोला- गोली" परंपरा थी। इस विसंगति पूर्ण प्रथा का चलन बढ़ गया था। राजमहलों में राजा महाराजाओं और उनकी दासियों के बीच चलने वाली इस विसंगति परंपरा पर उन्होने उपन्यास लिखा और देश के गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल को समर्पित किया था।
आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने इसके माध्यम से दास दासियों के प्रति मानवीय संवेदना और सम्मान को झकझौरा उससे चेतना आई और यह प्रथा को समाप्त होने का वातावरण बना। दूसरा "वयम् रक्षाम" उपन्यास रावण पर केन्द्रित है। किस प्रकार अधिकार भाव एक व्यक्ति को अहंकारी बनाता है उससे मानवीय मूल्यों के दमन की तस्वीर इस रचना में है।
आचार्य जी का बचपन आर्यसमाजी वातावरण में बीता था। यह वैचारिक प्रभाव उनके जीवन भर रहा। जो उनकी रचनाओं में भी झलकता है। दिल्ली में बसने की इच्छा बचपन से थी और दिल्ली की अनाज मंडी शाहदरा में उन्होंने एक घर बनाया जो घर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड को दान कर दिया था, जिसमें आजकल विशाल लाइब्रेरी है।
पूरा जीवन समाज और साहित्य को समर्पित करने वाले आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने 2 फरवरी 1960 को जीवन से विदा ली। उन्होंने अपने शरीर से संसार छोड़ा पर उनकी रचनाएँ आज भी समाज के सामने है।
आलेख
श्री रमेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार, भोपाल, मध्य प्रदेश
स्वाभिमान के अनन्य शिखर: महाराणा प्रताप
June 17, 2026
पुरुषोत्तम मास: भारतीय विज्ञान और अध्यात्म की समृद्ध परम्परा का संगम
June 01, 2026
बलिदान दिवस : वीर हरिसिंह नलवा
April 30, 2026
सुप्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी, चिन्तक व विचारक : पृथ्वीसिंह आजाद (आज पुण्यतिथि)
March 05, 2026
अंग्रेजों के विरुद्ध परलकोट संग्राम: अमर सेनानी गेंद सिंह का बलिदान
February 17, 2026
11 जून 1897 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म
November 27, 2025
समरस, स्वत्व, साँस्कृतिक और सशक्त राष्ट्र स्वरूप के पक्षधर थे सरदार वल्लभ भाई पटेल
October 31, 2025
आषाढ़ी पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाने का रहस्य
July 10, 2025
सोमनाथ मंदिर की लूट और पुजारियों और पचास हजार भक्तों का बलिदान
June 21, 2025
जानिए दानवीर भामाशाह कौन थे
June 20, 2025
अंग्रेजों के विरोध का अलख जगाने वाले भगवान बिरसा मुंडा ||
April 30, 2025
सबसे छोटा युद्ध 97 हजार सैनिकों ने किया था आत्मसमर्पण
April 30, 2025
मराठा साम्राज्य को विस्तार देने वाले सेनानायक बाजीराव पेशवा
April 28, 2024
अस्सी वर्ष की आयु में क्रांति की कमान संभालने वाले बाबू कुंअर सिंह
April 26, 2024
वनवासी युवाओं को संगठित कर सशस्त्र संघर्ष करने वाले तेलंगा खड़िया का बलिदान
April 23, 2024
षड्यंत्रकारी नासिक कलेक्टर को गोली मारने वाले तीन क्रांतिकारी
April 19, 2024
पन्द्रह माह तक क्राँति को जीवन्त रखने वाले क्राँतिकारी तात्या टोपे
April 18, 2024
मंगल पाण्डेय के स्वाभिमान की चिंगारी क्राँति का दावानल बनी
April 08, 2024
स्वाभिमान और आर्य संस्कृति की रक्षा के लिये महाशय राजपाल का बलिदान
April 06, 2024
आर्य और द्रविड़ संस्कृति अलग-अलग नहीं : डॉ. हरिभाऊ वाकणकर
April 03, 2024
क्रांतिकारी पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान
March 25, 2024
झालावंश की सात पीढ़ियों ने राष्ट्र के लिये प्राण न्यौछावर किये
March 17, 2024
गदरपार्टी के संस्थापक : क्रान्तिकारी लाला हरदयाल
March 04, 2024
सामाजिक समरसता एवं भक्ति की अनुपम प्रतीक देवी शबरी
March 03, 2024
सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी गोपीनाथ साहा का बलिदान
March 01, 2024
राष्ट्र और समाज को सारा जीवन देने वाले भारत रत्न नाना जी देशमुख
February 27, 2024
जिन्हें दो बार आजीवन कारावास मिला : स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर
February 26, 2024
चित्तौड़ में तीसरा बड़ा जौहर
February 23, 2024
सशस्त्र क्राँति के नायक उय्यलावडा नरसिम्हा रेड्डी
February 22, 2024
स्वतंत्रता के बाद समाज-संस्कृति प्रतिष्ठा का संघर्ष : उद्धवदास जी मेहता
February 20, 2024
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पत्रकार पंडित रामदहिन ओझा का बलिदान
February 18, 2024
क्राँतिकारी पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुमाऊँ केशरी बद्रीदत्त पांडेय
February 15, 2024
वीर बुधु भगत का बलिदान : अंग्रेजों द्वारा क्रूर सामुहिक नरसंहार
February 13, 2024
अंग्रेजों के विरुद्ध वनवासी संघर्ष के नायक : तिलका मांझी
February 11, 2024
सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी डॉ गया प्रसाद कटियार
February 10, 2024
धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज
February 07, 2024
गीतों की शब्द शक्ति से राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान जागरण की यात्रा
February 06, 2024
उपन्यास और लेखन से स्वत्व जागरण : आचार्य चतुरसेन शास्त्री
February 02, 2024
वैश्विक संस्कृति में श्रीराम एवं रामकथाएं
January 26, 2024
अंग्रेजों एवं ईसाई मिशनरियों के छक्के छुड़ाने वाली क्रांतिकारी रानी गाइदिनल्यू
January 26, 2024
स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानी : हेमू कालाणी
January 21, 2024
अंग्रेजों से मुक्ति के लिये छत्तीसगढ़ के परलकोट में सशस्त्र क्राँति
January 20, 2024
भारत के एक प्रकाशमान नक्षत्र महाराणा प्रताप
January 19, 2024
असीरगढ़ के किले पर धोखे से कब्जा किया अकबर ने
January 17, 2024
संघर्ष और बलिदान का ऐसा उदाहरण विश्व के इतिहास में कहीं नहीं : अयोध्या
January 16, 2024
फाँसी से पहले हथौड़े से जिनके दाँत तोड़े, नाखून उखाड़े गये
January 12, 2024
राष्ट्ररक्षा करते हुये दत्ता जी शिन्दे बलिदान
January 10, 2024
भारतीय इतिहास में मुगलों का बड़ा सैन्य समर्पण
January 07, 2024
युवकों को सशस्त्र क्रान्ति का प्रशिक्षण देने वाले क्रांतिकारी बारीन्द्रनाथ घोष
January 05, 2024
जानिए प्राचीन काल गणना का इतिहास
January 01, 2024
प्राण दे दिये पर धर्म न बदला
January 01, 2024
समान नागरिक संहिता और अखंड भारत के समर्थक: श्री के. एम. मुंशी
December 30, 2023
धर्म पर प्राण वार दिये पर इस्लाम न कबूला साहबजादों ने
December 26, 2023
राष्ट्र के स्वत्व और स्वाभिमान की प्रतिष्ठापना के लिये समर्पित जीवन : स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती
December 23, 2023
भव्य होगी अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा
December 21, 2023
स्वतंत्रता के लिए बलिदान होने वाले चार क्रांतिकारी
December 19, 2023
बंगाल के अंग्रेज कलेक्टर को गोली मारने वाली बहादूर बालिकाएं
December 14, 2023
क्राँतिकारियों का मिलन केन्द्र था यह आश्रम
December 12, 2023
निर्भीक चिंतक और इतिहासकार वैद्य गुरुदत्त
December 08, 2023
राजनैतिक संघर्ष के साथ स्वाभिमान और सामाजिक जागरण अभियान चलाने वाले काका कालेलकर
December 01, 2023
स्वदेशी और स्वाधीनता आँदोलन को गति देने वालों में अग्रणी विपिन चंद्र पाल
November 07, 2023
काले पानी की सजा काट भगतसिंह राजगुरु जैसे क्राँतिकारी तैयार करने वाले भाई परमानंद
November 04, 2023
संसार का पहला महाकाव्य रचने वाले महर्षि वाल्मीकि
October 28, 2023
तेरह वर्ष की आयु से चला गिरफ्तारी और रिहाई का सिलसिला : क्राँतिकारी मन्मन्थनाथ गुप्त
October 26, 2023
सत्य की स्थापना के लिये शक्ति, शस्त्र और सक्षमता आवश्यक : दशहरा विशेष
October 23, 2023
गौरक्षा के लिये 166 दिन अनशन कर देश में जाग्रति उत्पन्न की : संत रामचंद्र वीर
October 12, 2023
राष्ट्र जागरण और गौरक्षा के लिये समर्पित जीवन : संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी
October 09, 2023
रानी दुर्गावती से युद्घ में मारा गया था शेरशाह सूरी
October 05, 2023
रानी हंसादेवे सहित नौ सौ क्षत्राणियों का जौहर
September 27, 2023
पुरुषार्थ चतुष्टय का व्यावहारिक स्वरुप एकात्म मानव दर्शन
September 25, 2023
अंग्रेजों के मनोरंजन क्लब को बम से उड़ाने वाली महिला क्रांतिकारी
September 24, 2023
भविष्य में वैश्विक एकता का प्रतीक बनेगी हिंदी
September 21, 2023
गणों के अधिपति गणपति
September 19, 2023
डिप्टी कलेक्टर पद त्यागकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले सेनानी
September 18, 2023
ऐसे क्रांतिकारी जिनका निर्जीव शरीर समुद्र में फेक दिया गया
September 16, 2023
गौरक्षा और सामाजिक समरसता के लिये जीवन समर्पित करने वाले स्वामी ब्रह्मानंद
September 13, 2023
विश्व हितैषी स्वामी विवेकानन्द
September 11, 2023
वीर बालिका मैना देवी का बलिदान
September 03, 2023
अमर शहीदों का चारण राष्ट्र कवि श्रीकृष्ण सरल
September 02, 2023
गांधी युग के महान राजनीतिज्ञ लोकनायक
August 29, 2023
अंग्रेज गवर्नर पर गोली चलाने वाली महिला क्रांतिकारी, जिन्होंने गुमनामी में प्राण त्यागे
August 24, 2023
डायरेक्ट एक्शन का आह्वान : स्वातंत्र्य समर
August 23, 2023
लंदन में अंग्रेज अधिकारी वायली को गोली मारने वाले क्रांतिकारी
August 17, 2023
आँसुओं और रक्त की धारा के बीच भारत विभाजन की त्रासदी
August 14, 2023
औरंगजेब को पराजित कर अपनी शर्तें मनवाने वाले वीर दुर्गादास राठौड़
August 13, 2023
तिरंगे की शान के लिए सीने पर गोली खाने वाले क्रांतिकारी
August 12, 2023
बालकपन में फ़ाँसी चढ़ने वाले क्रांतिकारी : खुदीराम बोस
August 11, 2023
सुप्रसिद्ध झंडा गीत रचने वाले पत्रकार श्याम लाल गुप्त
August 10, 2023
अगस्त क्रान्ति : स्वाधीनता के सूर्योदय के लिये निर्णायक आँदोलन का उद्घोष
August 09, 2023
काकोरी क्रांति के लिए शस्त्र उपलब्ध कराने वाले सेनानी
August 03, 2023
सुविख्यात वेदान्त विभूति श्रीपाद दामोदर सातवलेकर
July 31, 2023
जलियां वाला बाग नरसंहार का लंदन में बदला लेने वाले वीर उधम सिंह
July 30, 2023
स्वदेशी आंदोलन के प्रणेता गणेश वासुदेव जोशी
July 25, 2023
अंग्रेजी शासन की जड़ें हिलाने वाले अद्भुत योद्धा
July 23, 2023
अंग्रेजों की प्रताड़ना से प्राण त्यागने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी : यतीन्द्र मोहन सेनगुप्त
July 22, 2023
भारतीय इतिहास का भयानक नरसंहार : सत्तीचौरा घाट
July 21, 2023
सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी बटुकेश्वर दत्त : पुण्यतिथि विशेष
July 20, 2023
अधिकमास होने के पीछे का आध्यात्म एवं विज्ञान
July 19, 2023
रानी रंगा देवी एवं इतिहास का सबसे बड़ा जौहर
July 09, 2023
नारी जागृति की अग्रदूत लक्ष्मी बाई केलकर
July 06, 2023
आषाढ़ी पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाने का रहस्य
July 03, 2023
जिनके नाम से मनाया जाता है डॉक्टर्स दिवस : डॉ विधान चंद्र राय
July 01, 2023
राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् रचने वाले कालजयी रचनाकार
June 27, 2023
राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिये सर्वोच्च बलिदान
June 23, 2023
पुत्र को हिन्दवी स्वराज के सिंहासन तक पहुंचाने वाली आदर्श माता
June 17, 2023
बलिदानी क्राँतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल
June 11, 2023
कालेपानी में सर्वाधिक प्रताड़ना झेलने वाले क्रान्तिकारी
May 28, 2023
जब सैकड़ों क्षत्राणियों ने अपने बच्चों के साथ किया था अग्नि प्रवेश : 6 मई सन् 1532
May 06, 2023
हिन्दू योद्धा जिसका पूरा जीवन युद्ध में बीता
April 28, 2023
व्यापक और प्रचण्ड अवतार : परशुराम जी
April 22, 2023
आज तीन महान क्राँतिकारियों का बलिदान दिवस
April 19, 2023
स्वाधीनता संग्राम के दो ऐसे वीर जिनकी मृत्यु का कारण विश्वासघाती बने
April 18, 2023
भारत के हर कोने में नरसंहार किये थे अंग्रेजों ने
April 13, 2023
रंगून की जेल में बलिदान देने वाला क्रांतिकारी
April 10, 2023
स्वाभिमान की चिंगारी क्राँति का दावानल बनी
April 08, 2023
भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता : नव वर्ष विशेष
March 21, 2023
राजस्थान में प्रकृति से जुड़ा लोकोत्सव है- गाँव बारो
September 06, 2026
शिक्षक दिवस विशेष: संविधान सभा में डॉ. राधाकृष्णन के विचार
September 05, 2026
रायपुर : विशेष लेख : नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर
September 05, 2026
डॉ.राधाकृष्णन और भारतीय ज्ञान परम्परा
September 04, 2026
छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण का लोक स्वरूप और रासलीला
September 04, 2026
“कोटा (नंदगाँव) की कृष्ण जन्माष्टमी की अनूठी परम्परा”
September 04, 2026
देवकी के त्याग से तारणहार का प्राकट्य
September 04, 2026
श्री कृष्ण का वैदिक स्वरूप
September 03, 2026
संतान सुख और रक्षा, मातृत्व का पर्व: हलषष्ठी (खमरछठ)
September 02, 2026
बघेरा(केकड़ी) के मूर्ति शिल्प में विष्णु अवतार बलराम
September 02, 2026
लोक-अनुभव का भंडार: हमारी वाचिक परंपरा
September 01, 2026
प्रकृति और नारी के उल्लास का पर्व- कजली तीज
August 31, 2026
सांस्कृतिक व शैक्षिक तत्वों से भरपूर है:छतीसगढ़ी लोक खेल
August 30, 2026
संस्कृत ध्वनियों का उच्चारण एक सहज योग
August 29, 2026
लोकपर्व भोजली
August 29, 2026
रक्षाबन्धन : भारतीय मानस में रक्षासूत्र का दर्शन
August 28, 2026
संस्कृत ग्रन्थों का अनुवाद समय की मांग है!
August 27, 2026
ओणम पर्व की मान्यता और परम्पराएँ
August 26, 2026
आखेटक: भारतीय सभ्यता के प्रहरी
August 25, 2026
आधुनिक AI के युग में संस्कृत भाषा का महत्व
August 24, 2026
राजस्थान में प्रकृति से जुड़ा लोकोत्सव है- गाँव बारो
September 06, 2026
शिक्षक दिवस विशेष: संविधान सभा में डॉ. राधाकृष्णन के विचार
September 05, 2026
रायपुर : विशेष लेख : नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर
September 05, 2026
डॉ.राधाकृष्णन और भारतीय ज्ञान परम्परा
September 04, 2026
छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण का लोक स्वरूप और रासलीला
September 04, 2026
“कोटा (नंदगाँव) की कृष्ण जन्माष्टमी की अनूठी परम्परा”
September 04, 2026
देवकी के त्याग से तारणहार का प्राकट्य
September 04, 2026
श्री कृष्ण का वैदिक स्वरूप
September 03, 2026
संतान सुख और रक्षा, मातृत्व का पर्व: हलषष्ठी (खमरछठ)
September 02, 2026
बघेरा(केकड़ी) के मूर्ति शिल्प में विष्णु अवतार बलराम
September 02, 2026
लोक-अनुभव का भंडार: हमारी वाचिक परंपरा
September 01, 2026
प्रकृति और नारी के उल्लास का पर्व- कजली तीज
August 31, 2026
सांस्कृतिक व शैक्षिक तत्वों से भरपूर है:छतीसगढ़ी लोक खेल
August 30, 2026
संस्कृत ध्वनियों का उच्चारण एक सहज योग
August 29, 2026
लोकपर्व भोजली
August 29, 2026
रक्षाबन्धन : भारतीय मानस में रक्षासूत्र का दर्शन
August 28, 2026
संस्कृत ग्रन्थों का अनुवाद समय की मांग है!
August 27, 2026
ओणम पर्व की मान्यता और परम्पराएँ
August 26, 2026
आखेटक: भारतीय सभ्यता के प्रहरी
August 25, 2026
आधुनिक AI के युग में संस्कृत भाषा का महत्व
August 24, 2026
This is the commets tab content.
This is the Tags tab content.
Note * Your email address will not be published. Required fields are marked
मातृभाषा, स्वदेशी और नारी-कल्याण: ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी एक युग प्रवर्तक
July 30, 2026