आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी | सोमवार

नक्षत्र: पुनर्वसु | योग: वज्र | करण: गर

पर्व विशेष : | तदनुसार 10 अगस्त 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी | सोमवार

नक्षत्र: पुनर्वसु | योग: वज्र | करण: गर

पर्व विशेष : | तदनुसार 10 अगस्त 2026

मुख से राम तू बोल के देख

मुख से राम तू बोल के देख

भीतर अपने टटोल के देख।
मुख से राम तू बोल के देख।

स्पष्ट नजर आयेगी दुनिया,
अंतस द्वार तू खोल के देख।

राम नाम का ले हाथ तराजू,
खुद को ही तू तोल के देख।

है कीमत तेरा कितना प्यारे,
जा बाजार तू मोल के देख।

कितना मीठा कड़ुवा है तू,
ले पानी खुद घोल के देख।

बीच मोह यहाँ फंसा कौन है,
लगा के झोली झोल के देख।

डगमग दुनिया डोल रही है,
"दीप" जरा तू डोल के देख।

सप्ताह के कवि

कुलदीप सिन्हा "दीप"
कुकरेल सलोनी ( धमतरी )

Follow us on social media and share!