आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख शुक्ल षष्ठी | बुधवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: अतिगंड | करण: कौलव

पर्व विशेष : | तदनुसार 22 अप्रैल 2026

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सनातन के संवाहक जनजातीय समाज

सनातन के संवाहक जनजातीय समाज

कुछ लोग प्रचार कर रहे हैं कि आदिवासी को हिन्दू बनाया जा रहा है। किसी को कोई बनाता नहीं है, यदि बनाता है तो गलत है। कुछ लोगों को तकलीफ है कि वो अपने को व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं, कुछ स्वयं को पता नहीं किस प्रकार सरना बोलते हैं। कुछ लोग स्वयं को हिन्दू बोलते हैं, इससे कुछ लोगों को तकलीफ होती है।

आप लोगों को बता दें कि जब आदमी पैदा हुआ था तो कोई धर्म नहीं था, लोग जंगलों पहाड़ों में रहते थे। धीरे धीरे ज्ञान बढ़ता गया, तब लोगों ने धीरे धीरे पूजा पाठ शुरू किया। उस समय सभी लोग प्रकृति की पूजा करते थे, प्रकृति पूजा आरंभिक काल से चलता रहा है। बीच के काल खंड में जब दुनिया के अन्य देशों से लोग आये तो इस धर्म के लोगों में फूट डालने के दृष्टिकोण से, भड़काने के दृष्टिकोण से ऐसा प्रचार प्रारंभ किया। उनके देशों में इतने धर्म भी नहीं हैं, उन्हें पंथ कह सकते हैं। हमारे इस देश में सनातन धर्म ही सबसे पुराना है और सनातन संस्कृति ही सबसे प्राचीन है, और हम भी उसके भागीदार हैं। पहले कोई पुजारी नहीं था, उस समय जीवन के अनुभव के आधार पर उनका जीवन चलता था, वंश बढ़ता था, इन सभी चीजों को लेकर उन्होंने प्रकृति की पूजा की। प्रकृति के बिना हम शून्य हैं, जल, वायु, अग्नि, सूर्य, चन्द्र और धरती के बिना हम कैसे जियेंगे, इनकी पूजा कुछ गलत नहीं है


प्रकृति की उपासना

बाद में पंडित लोग आये ऋषि-मुनि हुए, गुरु लोग हुए पहले ऐसा कुछ नहीं था। हिन्दू धर्म में अग्नि, जल, वायु, धरती, आकाश, वनस्पतियों ओषधियों और सभी जीव जंतुओं की पूजा की जाति है, हम भी तो वही करते हैं। इसीलिए तो कहते हैं की असली सनातनी आज यदि धरती पर बचा हुआ है तो सिर्फ आदिवासी ही है। बाकी लोग तो पंथ में बदल गए कोई जैन, बौद्ध हो गया कोई शैव, वैष्णव हो गया हम तो नहीं बदले। हाँ कुछ लोग गिरजा घर जाने लगे हैं, लेकिन वो भी धोखे में बदले हैं, कोई बाइबिल पढ़कर प्रेरित होकर ईसाई बना हो ऐसा नहीं है। उन्हें ईसाई बनकर भी यह नहीं पता है की बाइबिल में क्या लिखा है। यह कोई सोच समझकर गंभीरता से लिया हुआ फैसला नहीं था, कोई किसी करणवश हो गया है। हिन्दू कोई धर्म नहीं है ना जात ही है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की हिन्दू जीवन पद्धति है। कुछ ईसाई बन गए लोग कहते हैं की हम लोगों को हिन्दू बनाया जा रहा है। हमें अपने आत्मविश्वास को हिमालय के सामान दृढ बनाना है। किसी के बहकावे में नहीं आना है। किसी के बहकावे में आने से ही हमलोग ठगे जाते हैं।

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पंच तत्व

इस संगोष्ठी में जो लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं, उसमे सभी कर्मकांड और परम्पराएं लगभग एक जैसी हैं। नाम थोडा बदलता है, कुछ ऊपर नीचे हुआ है परन्तु सब लोगों ने मूल रूप से एक ही बात कही है कि हमारा धर्म एक है। जन्म से मृत्य तक की सभी परम्पराएँ एक सामान है, भाषा और परिस्थितियों के अनुसार कुछ छोटे मोटे परिवर्तन हैं लेकिन हमारा मूल एक ही है। समाज के सम्बन्ध में जब कोई बड़ी बात हो तो हम लोगों को मिलकर आवाज उठाना चाहिए, समाज के भीतर की बातों को हम आपस में तय कर लेंगे। बड़ी बड़ी समस्याएँ जो देशहित और समाजहित में हो तो दृढ संकल्प हो कर एक आवाज में बोलना चाहिए की आवाज सुनकर सामने वाला डर जाए, यह आवाज अभी तक नहीं आ पा रहा है।

अभी सरना धर्म कोड पर चर्चा चल रही है। मुख्य रूप से उराँव लोग, कुछ मुंडा और एकाध संताली लोग ही इसकी बात कर रहे हैं। समाज में कुछ पागल लोग होते ही हैं। अगर हमें सरना धर्म कोड मिल जायेगा तो जो लोग हमें सरना धर्म कोड के लिए प्रेरणा दे रहे है, बाध्य कर रहे हैं क्या वो अपना धर्म छोड़कर सरना में आ जायेंगे? वो नहीं आयेंगे ये बातें गलत प्रचार कर रहे हैं। दुनिया में कोई धर्म पूजा स्थल के नाम से नहीं है। कोई अपने धर्म को गिरजा धर्म, मस्जिद धर्म या मंदिर धर्म नहीं बोलता है तो आदिवासियों को सरना धर्म का नाम क्यों दिया जा रहा है?


सरना पूजा

दूसरी बात देश के 500-600 आदिवासी समुदाय के लोग स्वयं को सरना बोलते हैं क्या? झारखंड, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के लोग ही सरना शब्द का बोलते है, बाकी लोग सरना शब्द का उपयोग नहीं करते हैं। इन बातों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, बिखराव नहीं हो इसपर तर्क-वितर्क करना चाहिए। तब होगा की आपके मन में आत्मविश्वास जागेगा। तब आपको लगेगा की आप जो बोल रहे हैं वो ठीक बोल रहे हैं इसका विश्वास होगा तब आपको बरगलाने वाले लोग आगे नहीं आयेंगे। आपके अन्दर आत्मविश्वास की कमी रहेगी तो कोई भी आपको कुछ भी समझाएगा तो आप बोलेंगे की आप जो बोल रहे हैं वो ठीक ही बोल रहे होंगे क्योंकि हम तो नहीं जानते हैं, तब वह आपको ठग सकता है। आपमें आत्मविश्वास नहीं रहेगा तो आप कोई भी बड़ा काम नहीं कर सकते हैं, हमारा धर्म सरना नहीं है, उसको पुराना धर्म बोलिए या सनातन धर्म बोलिए कोई हर्ज नहीं है। सनातन धर्म है, सरना धर्म नहीं हो सकता है।

लेख 
डॉ कड़िया मुंडा 

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