नागपंचमी: आस्था और भारतीय परंपरा
August 16, 2026
संवत् 2083 विक्रमी | भाद्रपद कृष्ण द्वादशी | बुद्धवार
नक्षत्र: मघा | योग: शुभ | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 07 अक्टूबर 2026

भगवान श्री राम मनुष्य के जीवन सुख दुख के साथी हैं, मनुष्य सुख हो या दुख दोनों में उन्हें याद करता है। श्री राम को सदा याद रहते हैं, कभी विस्मृत नहीं होते। वे लोक संस्कृति में समाये हुए हैं, कहा जा सकता है कि रोम रोम में बसे बसे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के लोक में रामधुन के रुप में भी स्मरण किए जाते हैं । कई स्थान ऐसे है कि जहाँ शताब्दियों से राम नाम सप्ताह का आयोजन होता है। छत्तीसगढ़ में ऐसा ही एक स्थान है भाटापारा, जहां 81 बरसों से अखंड रामधुन का आयोजन किया जाता है।
जय रघुपति राघव राजा राम,जय पतित पावन सीताराम की अखंड राम धुन एक सप्ताह तक चलती है भाटापारा में। 81 बरस से हर साल भादो मास की द्वितीया से नवमी तक संकीर्तन चलता है और फिर निकलती है श्री राम की शोभा यात्रा। रथ पर राम दरबार की तस्वीर और उसकी अगुवाई करती है गांव गांव से आई भजन मंडलियां। सैकड़ों की तादाद में रंग-बिरंगी वेशभूषा लिए नाचती गाती भजन मंडलियां जब निकलती हैं वह दृश्य देखते ही बनता है।

अकाल के भय से शुरु हुआ राम नाम का सुमिरन
अखंड राम नाम सप्ताह ऐसे ही नहीं शुरू हुआ सन 1937 में आषाढ़ और सावन माह में पानी नहीं बरसा था, नदी सुख रही थी, कुंए तालाब तो सुख चुके थे, खेतों में दरार पड़ रही थी, पीने के पानी के लिए मारामारी होने लगी थी, भयावह अकाल की आशंका से लोग भयभीत हो उठे थे। अकाल का संकट समक्ष दिखाई दे रहा था।
अकाल के संकट से उबरने के लिए जनसमूह तब जा पहुंचा अयोध्या के रामानंदी महंत सालिकराम दास जी के पास। महंत जी उस समय भाटापारा में अपना चतुर्मास व्यतीत करने के लिए रुके थे। लोगो ने महंत जी से समस्या से मुक्ति के लिए उपाय पूछा, महंत सालिकराम ने "कलयुग केवल नाम अधारा, सुमीर सुमीर उतरही भवपारा" बोलते हुए समझाया कि कलयुग में राम का नाम लेने से सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है, इसलिए जय रघुपति राघव राजा राम, जय पतित पावन सीताराम महामंत्र का अखंड जाप करें, श्री राम सब संकट हर लेंगे।
फिर क्या था, मोहनदास मंदिर, चना मंदिर के पुजारी भगवान दास जी दीक्षित की अगुवाई में लोग जुट गए। अखंड जाप में रामलाल गुप्ता, कन्हैया लाल कारीगर, पुत्ती लाल गुप्ता, शिव प्रसाद सोनी, ददुआ पंडित, मन्नूलाल तिवारी आदि लोगों ने अखंड राम धुन आरंभ की और तब देव योग्य से 48 घंटे में बारिश शुरू हुई, मगर राम धुन थमी नहीं बारिश होते ही लोगों के चेहरों में रौनक लौट आई।

फिर साल दर साल अखंड राम नाम सप्ताह का सिलसिला प्रारंभ हुआ। ब्रह्मा विष्णु शंकर की प्रेरणा से नियमित होने लगा। वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम पुरोहित बताते हैं कि वर्तमान चना मंदिर के दूसरी ओर लटूरिया मंदिर और पीछे करिया तालाब के बीच एक बड़ा मैदान था,जहां तुलसी चौरा था। इसी स्थान पर अस्थाई रूप से मंडप 1938 में तैयार हुआ, सन 1960 में इसे भव्य रूप प्रदान किया जो वर्तमान में है फिर गांव गांव भजन मंडलियों को आमंत्रित किया गया जो शोभायात्रा में शामिल होती है।
अखंड राम नाम सप्ताह और शोभायात्रा धीरे-धीरे विशाल जन उत्सव में बदल गई, इसमें सभी धर्म जाति के लोग बिना भेदभाव आ जुटते थे हर साल। समारोह का गुरुतर भार संभालने के लिए रामनारायण चांडक, मदन गोपाल राठी, शिव प्रसाद अग्रवाल, मीठालाल मल, दुली चंद गांधी जैसे लोग सामने आए। जन सहयोग से गांव-गांव से आई मंडलियों के जलपान भोजन की व्यवस्था शुरू हुई।
उत्तरायण संस्था ने जुलूस के दर्शकों के लिए नाम मात्र शुल्क लेकर भोजन का इंतजाम प्रारंभ किया। इसका अनुकरण करते हुए व्यापारी संघ एवं विभिन्न समाज के लोग दर्शकों को लिए उत्तम भोजन का इंतजाम करने लगे जो आज भी चल रहा है। शोभा यात्रा के दौरान हर गली मोहल्ले में तरह-तरह की भोज्य सामग्री नि:शुल्क बाटी जाती है। विशाल जनमानस को देखते हुए तमाम नामी कंपनियां आ जूटती है,बड़े आग्रह से दर्शकों को भोजन के लिए बुलाया जाता है।
भाटापारा के अखंड राम नाम सप्ताह को बनाए रखने मे लोग आगे आते रहे, तुलसीराम मूंदड़ा, तारा नाथ मिश्रा, प्रताप चंद अग्रवाल, गोवर्धन भट्टर, मदनलाल लाहोटी, करमचंद बाबू, मुरलीधर सेठ, माधव वाढेर, प्रभु लाल, रामप्रसाद पुरोहित के सहयोग से अखंड राम नाम सप्ताह का आयोजन निर्बाध चलता रहा।

अकाल के संकट से उपजा अखंड कीर्तन छत्तीसगढ़ का अनूठा जन्म उत्सव बन गया है, जहां श्री राम की शोभायात्रा में भाग लेने गांव गांव से हजारों की तादाद में भजन मंडलिया भाटापारा पहुंचती हैं, एक के बाद एक सैकड़ों भजन मंडली राम धुन की अगुवाई करती चलती है। शोभा यात्रा दोपहर से शुरू होकर नगर भ्रमण कर सुबह राम नाम सप्ताह मंडप में समाप्त होती है। पूरा नगर भजन मंडली स्वागत के लिए जाता है।
1960 में अखंड राम नाम सप्ताह का भव्य मंडप तैयार हुआ, मदन लाल अग्रवाल, रमेश शर्मा ने बताया कि इसी के साथ 2 दिन महिलाओं का कीर्तन शुरू हुआ। भादो कृष्ण एकादशी से त्रयोदशी चलता है। 81 बरस से अखंड कीर्तन आज भी चला आ रहा है, धार्मिक उत्सव होते हुए भी जहां जात-पात, छुआछूत नामोनिशान नहीं दिखता। राम सप्ताह और शोभायात्रा में सभी भक्तजन सराबोर होते दिखते हैं…..
कोरोना काल में शोभायात्रा नहीं
82 वां अखंड राम नाम सप्ताह में कोरोना महामारी के चलते उनके स्वरूप में परिवर्तन किया गया है। मंडप में भगवान विराजमान होंगे, कीर्तन चलेगा तो 4 लोग ही शामिल होंगे, दर्शन के लिए भीड़ नहीं लगेगी, गुलाल का टीका नहीं लगेगा, ना ही प्रसाद का वितरण होगा, केवल अखंड राम धुन चलेगी। शोभायात्रा में गांव-गांव से भजन मंडलियां भी नहीं आएगी ताकि भीड़ भाड़ ना हो और शोभायात्रा भी नहीं निकाली जाएगी। इस बार करोना महामारी के संकट से बचने के लिए महामंत्र की अखंड धुन चलेगी।
आलेख
श्री रविन्द्र गिन्नौरे,
भाटापारा, छत्तीसगढ़
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