संघर्ष, साधना और विजय: निराला की कालजयी कृति ‘राम की शक्ति पूजा’
October 17, 2026
संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर
पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

पंडवानी छत्तीसगढ़ के अनोखा एकल नाट्य-गायन कला आय, जेन मं गायन, अभिनय, संगीत अऊ कथावाचन के जबर संगम रहिथे। वेदमती अऊ कपालिक दू शैली हवंय, अऊ कपालिक शैली मं पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के योगदान ले पंडवानी ला अंतरराष्ट्रीय मंच तक नई ऊँचाई मिलिस।
पंडवानी छत्तीसगढ़ के एक अनोखा एकल नाट्य-गायन कला आय, जेन अपन खास प्रस्तुति के दम मं देश-विदेश के मंच मं छत्तीसगढ़ ला अलग पहचान दिलाय हवय। ए लोक कला मं गायन, अभिनय, संगीत अऊ कथावाचन के अइसन संगम रहिथे, जेन ला देख के दर्शक सीधे महाभारत के पात्र अऊ घटना संग जुड़ जाथें ।
पंडवानी के जनम छत्तीसगढ़ के देवार अऊ पारधी जाति के पारंपरिक गायन शैली मं विकसित होके वैश्विक रूप पाय हवे। ये जाति मन सैकड़ों बछर ले गोंड राजा मन के दरबार मं, या अपन यजमान के घर-घर जाके कथा सुनावत रहिन।
ए मन महाभारत के कथा ला छत्तीसगढ़ी बोली अऊ गोंडी लोककथा संग मिलाके नवा रूप दीन। धीरे-धीरे ए सामूहिक गायन ले बढ़ के एक अलग पहिचान वाले एकल नाट्य कला बन गीस।

महाभारत की कथाओं पर आधारित है पंडवानी
पंडवानी नांव दू सब्द ले बने हवय-: पांडव + वाणी = पंडवानी जेकर मतलब होथे - पांडव मन के कथा या पांडव मन के गाथा। ए कला मं खास करके भीम के कथा ला छत्तीसगढ़ के लोक रंग मं रंग के गाए जाथे।
प्रस्तुति के ढंग के आधार मं पंडवानी गायन के शैली ला दू भाग मं बांटे जाथे-: वेदमती शैली अऊ कपालिक शैली। वेदमती शैली मं गायक मंच मं बइठ के शांति ले कथा सुनाथे। एमा संगीत अऊ कथा ऊपर जियादा जोर रहिथे, देह अभिनय कम रहिथे। एला पंडवानी के शास्त्रीय रूप माने जाथे।
दूसर तरफ कपालिक शैली मं गायक खड़े होके अभिनय के संग गाथे। ए शैली मं शास्त्र सम्मत कथा के संग कल्पना के भी समावेश रहिथे।पंडवानी कला ला जन-जन तक पहुँचाय अऊ अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाय मं कई कलाकार मन के योगदान रहिस।

कापालिक शैली (बाएं), वेदमती शैली (दाएं)
झाडूराम देवांगन ला पंडवानी के पितामह कहे जाथे। वो पंडवानी के रूप अऊ प्रस्तुति मं बड़े बदलाव लाके एला प्रतिष्ठा दिलाइस। वो वेदमती शैली के महान कलाकार रहिन। पुनाराम निषाद घलो वेदमती शैली के बड़े कलाकार रहिन, जेन मन पंडवानी ला नवॉं ऊँचाई दे हवे।
शांतिबाई चेलक कपालिक शैली के प्रमुख गायिका रहिन। पद्मश्री उषाबाई बारले घलो कपालिक शैली के प्रसिद्ध गायिका आवय। लेकिन पंडवानी के सबले ज्यादा नाम कमाय वाली गायिका तीजन बाई आयं। कपालिक शैली मं पंडवानी ला जऊन मुकाम तक लेगिन, वो कल्पना ले परे आय।

पंडवानी के भीष्म पितामह - श्री झाडूराम देवांगन
वो पंडवानी के सबले बड़े हस्ताक्षर बनके पंडवानी लोक कला ला देश के सीमा ले बहिर ले जाके दुनिया भर मं पहिचान दिलाइन। तीजन बाई शैली मं बदलाव करत, पारंपरिक वेदमती शैली ले निकल के कपालिक शैली मं पंडवानी गाना शुरू करिन। एखर पहिली के सबे माईंलोगन मन बइठ के ही पंडवानी गावैं, अऊ कपालिक शैली सिरिफ मरद मन बर रहिस।
तीजन बाई ए परंपरा ला तोड़िस अऊ वो पहिली महिला बनिस, जेन कपालिक शैली मं पंडवानी प्रस्तुत करिन। ऊँकर गायन मं ओज, तेज अऊ गजब के अभिनय रहिथे। वो कथा के हर पात्र ला जिंदा कर देथें। ऊँकर तंबूरा ही ऊँकर सह-कलाकार बनजथे, जेन ले वो युद्ध, संवाद अऊ भावना ला देखाथें।

तीजन बाई -पंडवानी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया
कभू वो भीम के गदा बन जाथें, कभू हनुमान के पुछी, कभू दुर्योधन के जंघा अऊ कभू जरासंध के टांग, कभू कृष्ण भगवान के बॉंसुरी बनके दर्शक मन ऊपर जादू चला देथे। कपालिक शैली के पंडवानी गायन ले वो विश्वविख्यात बनगे।
ऊँकर कला ले प्रभावित होके भारत सरकार ह वोला कई बड़े सम्मान ले नवाजे हवय 1988 मं पद्मश्री, 2003 मं पद्मभूषण,अऊ 2019 मं पद्मविभूषण जैसन सम्मान ले सम्मानित होय हवे, तीजन बाई ह पद्मविभूषण पाने वाली छत्तीसगढ़ के पहिली कलाकार आय।

पद्मविभूषण से सम्मानित छत्तीसगढ़ की प्रथम कलाकार
तीजन बाई ये साबित करदिस के पंडवानी सिरिफ लोकगीत नहीं, बल्कि एक सशक्त नाट्य कला आय, जेन छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक धरोहर अऊ इहाँ के लोगन के अदम्य साहस ला देखाथे। पंडवानी छत्तीसगढ़ के अस्मिता के प्रतीक आय, जेन हमन ला अपन भाषा, इतिहास अऊ सांस्कृतिक जड़ संग जोड़े रखथे।
तीजन बाई पंडवानी छत्तीसगढ़ के अइसन लोक कलाकार आय, जेन अपन ओजस्वी प्रस्तुति ले देश अऊ दुनिया भर मं बड़े-बड़े सम्मान पाय हवय। पंडवानी कलाकार के रूप मं तीजन बाई ला भारत सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मान (पद्म पुरस्कार) मिले हवय, जेन ए कला के महत्ता ला प्रमाणित करथे। पंडवानी गायकी बर तीजन बाई ला 1995 मं संगीत नाटक अकादमी ले सम्मानित करे गे रहिस।
एखर अलावा ओला कतकोन राष्ट्रीय अऊ अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले हवय - फुकुओका एशियाई संस्कृति पुरस्कार (2018, जापान),बिलासपुर विश्वविद्यालय ले डी.लिट. के मानद उपाधि, नृत्य शिरोमणि सम्मान अऊ बहुत कुछ। पंडवानी ला दुनिया भर मं पहचान दिलाय के सबले बड़े श्रेय तीजन बाई ल जाथे।
वो लंदन, न्यूयॉर्क, पेरिस, रोम, जापान समेत यूरोप, अमेरिका अऊ एशिया के कई देश मं पंडवानी के प्रस्तुति दे हवंय। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल अपन टीवी सीरियल ‘भारत एक खोज’ मं घलो उनकर प्रस्तुति शामिल करिन, जेन ले उनला देश भर मं पहिचान मिलिस।
तीजन बाई अइसन कलाकार आयँ, जेनला सच मं विश्वविख्यात कहे जा सके। ऊँकर सेती पंडवानी छत्तीसगढ़ के वैश्विक पहचान बनगे हवय। छत्तीसगढ़ सरकार घलो ऊँकर जीवन अऊ कृतित्व ऊपर वृत्तचित्र बनाके आम जनता तक पहुँचाय के काम करत हवय।
मोला गरब हावय कि ऊँकर ऊपर बने फीचर फिलिम के कहानी अऊ संवाद लिखे के मोला सुअवसर मिलिस। पंडवानी के महारानी पद्मविभूषण डॉ.तीजन बाई जैसन कलाकार न पहिली कभू होइस, न आगू कभू होही।
लेख-
डॉ.अशोक आकाश
बालोद, छत्तीसगढ़
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