फागुन मंडई- देवी के शक्तिपीठ स्थापना का देव दुर्लभ पर्व
March 10, 2026
संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर
पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

प्रकृति ने बस्तर में जी भर कर अपना सौंदर्य लुटाया है, अद्वितीय प्राकृतिक खुबसूरती ने बस्तर को पर्यटकों का लाडला बनाया है। यहाँ की हरी-भरी वादियाँ, गगनचुम्बी चोटियाँ, खूबसूरत झरने किसी भी व्यक्ति का मनमोह लेते हैं। बस्तर में दंतेवाड़ा जिला भी पर्यटन स्थलों के मामले में अग्रणी है।
दंतेवाड़ा में जहाँ घने जंगलो में ऊँची पर्वत चोटी पर गणेश जी विराजित हैं, वहाँ प्रकृति एवँ इतिहास का अनूठा संगम दिखाई देता हैं, इसके साथ ही विशाल, भव्यतम झरना हांदावाड़ा जाने का मार्ग भी दंतेवाड़ा से ही जाता है। बस्तर के युवाओं में और बस्तर को करीब से जानने वालों लोगों में ढोलकल के बाद हांदावाड़ा जाने की इच्छा देखने को मिलती है।
कुछ दिनों पूर्व यहां पर बाहूबली-2 के फ़िल्मांकन की बात चली थी जिसके फलस्वरूप पर्यटकों में हांदावाड़ा जलप्रपात को देखने की इच्छा अधिक हो गई। अपनी इसी इच्छा के कारण स्थानीय लोगों ने इस जलप्रपात के सौंदर्य को करीब से निहारा है। हर सप्ताह यहां स्थानीय पर्यटको का मेला सा लगने लग गया था।
यह जलप्रपात बाहुबली फिल्म के जलप्रपात की विशालता के तुलना में किसी भी तरह से कम नहीं हैं। पास के गांव हांदावाड़ा के कारण यह हांदावाड़ा जलप्रपात के नाम से जाना जाता हैं, परंतु इसके साथ बाहूबली फ़िल्मांकन का नाम जुड़ने एवँ बस्तर का विशाल झरना होने के कारण स्थानीय युवाओं में यह बाहूबली जलपर्वत के रूप में प्रचारित है।
हांदावाड़ा जलप्रपात नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड में आता हैं। जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से 20 किलोमीटर की दूरी पर ऐतिहासिक नगरी बारसूर स्थित है। बारसूर से 04 किलोमीटर की दूरी पर मूचनार नामक ग्राम में बस्तर की जीवनदायिनी इन्द्रावती बहती हैं।
इंद्रावती नदी के पार लगभग 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर अबूझमाड़ में हांदावाड़ा नाम का छोटा सा ग्राम है। इस ग्राम से ०4 किलोमीटर की दुरी पर धारा डोंगरी की पहाड़ी में गोयदेर नदी लगभग 350 फीट की ऊँचाई से गिरकर बहुत ही खूबसूरत एवं चरणबद्ध विशाल जलप्रपात का निर्माण करती है।
बांस के झुरमुटों से निकलते ही पर्यटकों को हांदावाड़ा झरने की विशालता एकदम से अचंभित कर देती है। इसकी विशालता के सामने मुख से धीमी आवाज में बस एक शब्द निकलता है “अदभूत।” झरने खूबसूरती में पर्यटक इतना रम जाता है कि उसे वहाँ से हटने का मन ही नहीं करता है। बस एकटक इस झरने की विशालता को देखते रहो। बहुत ही रोमांचक एवं मन को आनंदित करने वाला यह दृश्य कई दिनों तक आँखों के सामने घुमता रहता है।
जलप्रपात तक पहूँचने के लिये चार किलो मीटर के घने जंगल में पैदल चलना पड़ता है। जंगल बेहद घना एवँ डरावना हैं। गांव वालो की मदद के बिना यहां जाना असंभव एवँ खतरनाक हैं। जलप्रपात की विशालता , अप्रतिम सुन्दरता चार किलोमीटर की पैदल थकान दूर कर देती है। झरने की फुहारें तन-मन को पुनः ताजा कर देती है।
इस जलप्रपात के ऊपर एक छोटा सा झरना भी है। झरना छोटा है आस-पास की कुश की झाडियां के कारण वह काफी सुन्दर लगता है। झरने के ऊपर से घाटी में चारों तरफ फैली हरियाली एवं नीचे गिरते पानी की कल-कल ध्वनि मन को रोमांचित कर देती है।
इस झरने की आवाज 4 किलोमीटर की दुरी पर स्थित बस्ती में साफ साफ सुनाई देती है। बरसात के दिनों में यह जलप्रपात अपने विशाल रूप को पा लेता है। गर्मी के दिनों में नदी में पानी कम होने के कारण इसकी भव्यता थोड़ी कम हो जाती है। वर्षाकाल में इन्द्रावती नदी अपने उफान पर होती है। इसलिए उस समय यहाँ पहुचना बहुत ही कष्ट दायक होता है।
नवम्बर से मार्च तक के समय में इस झरने का पर्यटन का किया जा सकता है। यहाँ पहुंचने के लिये पैदल ही जाना पड़ता है । माओवाद से प्रभावित क्षेत्र होने के कारण नदी के उस पार सड़क नहीं है। पतली पगडण्डी में चलते हुए यहाँ पंहुचा जा सकता है।
दोपहिया वाहन से अगर जाना हो तो मूचनार में इन्द्रावती नदी पार कर जाना पड़ता है। डोंगी से बाईक समेत नदी पारकर हांदावाड़ा जा सकते है। यहाँ जाने के लिए किसी जानकार व्यक्ति को साथ ले जाना ही उचित है अन्यथा कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
आलेख एवं फ़ोटो
[caption id="attachment_667" align="alignleft" width="150"]
ओम सोनी
गीदम, दंतेवाड़ा बस्तर
छत्तीसगढ़[/caption]
फागुन मंडई- देवी के शक्तिपीठ स्थापना का देव दुर्लभ पर्व
March 10, 2026
अठारह शक्ति पीठों में एक: बस्तर की माई दंतेश्वरी
January 15, 2026
मावली ही दंतेश्वरी माई है।
September 28, 2025
भोरमदेव शिवालय: इतिहास, कला स्थापत्य का अनूठा तीर्थ
July 14, 2025
सिंधुघाटी की परंपराएं अभी शेष हैं बस्तर में
May 19, 2024
ऐसा भव्य जलप्रपात जिसके सामने बाहूबली भी लगता है बौना
January 08, 2019
दक्षिण कोसल का एक ऐसा स्थान जहाँ भयंकर युद्ध के अवशेष मिलते हैं
December 22, 2018
संघर्ष, साधना और विजय: निराला की कालजयी कृति ‘राम की शक्ति पूजा’
October 17, 2026
शारदीय नवरात्रि: छत्तीसगढ़ के सोनपैरी और लचकेरा ग्राम की लोकपरम्पराएँ
October 17, 2026
छत्तीसगढ़ में शाक्त परंपरा: वैदिक और लोक-आस्था का संगम
October 17, 2026
चौहान सम्राटों की इष्टदेवी: महाशक्ति चामुण्डा
October 16, 2026
जनजातीय युवती वल्ली और भगवान कार्तिकेय का विवाह
October 16, 2026
शत्रु पर विजय का वरदान प्राप्त होता है बगुलामुखी देवी मन्दिर
October 15, 2026
विज्ञान, मानवीय संवेदना एवं राष्ट्र के प्रेरणापुंज - डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
October 15, 2026
भील जनजाति की लोकआस्था में रायकुंडा की महिषासुरमर्दिनी
October 15, 2026
सप्तमातृका: छत्तीसगढ़ और बस्तर की शक्ति परम्परा
October 15, 2026
हाड़ौती अंचल के प्रमुख देवी मन्दिर
October 14, 2026
प्रतियोगी परीक्षा की विफलता से राष्ट्रपति पद तक: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जीवन यात्रा
October 14, 2026
डंगचघिन दाई : दारिका नटनी की समाधि से लोकदेवी तक
October 13, 2026
राजा विक्रमादित्य की आराध्या: हरसिद्धी देवी
October 12, 2026
शक्ति उपासना का पर्व नवरात्र
October 11, 2026
सर्वपितृ अमावस्या: तर्पण और श्राद्ध का महात्म्य
October 10, 2026
भारतीय डाक सेवा की ऐतिहासिक यात्रा
October 09, 2026
पितृपक्ष: लोकजीवन में पुरखों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व
October 09, 2026
भारतीय ज्ञान परम्परा में सामाजिक समरसता
October 08, 2026
बैगा समुदाय में बच्चों के खेल
October 07, 2026
सौम्यता: भारतीय संस्कृति का मूल स्वभाव
October 06, 2026
संघर्ष, साधना और विजय: निराला की कालजयी कृति ‘राम की शक्ति पूजा’
October 17, 2026
शारदीय नवरात्रि: छत्तीसगढ़ के सोनपैरी और लचकेरा ग्राम की लोकपरम्पराएँ
October 17, 2026
छत्तीसगढ़ में शाक्त परंपरा: वैदिक और लोक-आस्था का संगम
October 17, 2026
चौहान सम्राटों की इष्टदेवी: महाशक्ति चामुण्डा
October 16, 2026
जनजातीय युवती वल्ली और भगवान कार्तिकेय का विवाह
October 16, 2026
शत्रु पर विजय का वरदान प्राप्त होता है बगुलामुखी देवी मन्दिर
October 15, 2026
विज्ञान, मानवीय संवेदना एवं राष्ट्र के प्रेरणापुंज - डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
October 15, 2026
भील जनजाति की लोकआस्था में रायकुंडा की महिषासुरमर्दिनी
October 15, 2026
सप्तमातृका: छत्तीसगढ़ और बस्तर की शक्ति परम्परा
October 15, 2026
हाड़ौती अंचल के प्रमुख देवी मन्दिर
October 14, 2026
प्रतियोगी परीक्षा की विफलता से राष्ट्रपति पद तक: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जीवन यात्रा
October 14, 2026
डंगचघिन दाई : दारिका नटनी की समाधि से लोकदेवी तक
October 13, 2026
राजा विक्रमादित्य की आराध्या: हरसिद्धी देवी
October 12, 2026
शक्ति उपासना का पर्व नवरात्र
October 11, 2026
सर्वपितृ अमावस्या: तर्पण और श्राद्ध का महात्म्य
October 10, 2026
भारतीय डाक सेवा की ऐतिहासिक यात्रा
October 09, 2026
पितृपक्ष: लोकजीवन में पुरखों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व
October 09, 2026
भारतीय ज्ञान परम्परा में सामाजिक समरसता
October 08, 2026
बैगा समुदाय में बच्चों के खेल
October 07, 2026
सौम्यता: भारतीय संस्कृति का मूल स्वभाव
October 06, 2026
This is the commets tab content.
This is the Tags tab content.
Note * Your email address will not be published. Required fields are marked



बारसूर नगर का नामकरण
July 24, 2026