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पर्व विशेष : | तदनुसार 06 सितंबर 2026

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सतपुड़ा के अरण्य में सनातन संस्कृति और नागद्वारी यात्रा

सतपुड़ा के अरण्य में सनातन संस्कृति और नागद्वारी यात्रा


सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल ग्रन्थों तक सीमित कोई सिद्धांत नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक ऐसी जीवंत कला है जो प्रकृति के कण कण में परमात्मा के दर्शन करती है हिंदू परंपरा में प्रकृति के प्रत्येक घटक में ईश्वर के दर्शन किए जाते हैं और इसलिए प्रत्येक जीव वृक्ष वनस्पतियां पर्वत नदियां सब हमारे आराध्य हैं। 

इसी दिव्य और आदिम परंपरा की एक सबसे अनूठी कड़ी है नाग पंचमी और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के अंतर्गत सतपुड़ा की रहस्यमयी पर्वत श्रृंखलाओं में आयोजित होने वाली नागद्वारी यात्रा यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है बल्कि यह मनुष्य के प्रकृति के साथ तादात्म्य अपार श्रद्धा कठिन तप और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। 


सतपुड़ा के वन

हिंदू समाज आदिकाल से ही प्रकृति का पूजक रहा है हमारे पूर्वजों ने यह भली भांति समझ लिया था कि मानव का अस्तित्व प्रकृति के संतुलन पर ही निर्भर है। वृक्ष वनस्पतियों की पूजा- बरगद पीपल तुलसी और नीम जैसे पौधों को पूजनीय बनाकर सनातन धर्म ने न केवल ऑक्सीजन के स्रोतों को बचाया बल्कि जैव विविधता का भी संरक्षण किया। हिमालय सतपुड़ा विंध्याचल जैसे पर्वतों को देवों का वास और गंगा नर्मदा यमुना जैसी नदियों को मां मानकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया गया। 

जीव जंतुओं और नाग पूजा का महत्व- नागों को भगवान शिव के गले का हार और भगवान विष्णु की शय्या शेषनाग मानकर पूजनीय बनाया गया कृषि प्रधान देश होने के कारण नागों को क्षेत्रपाल या किसानों का मित्र भी कहा जाता है क्योंकि वे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और चूहों को नियंत्रित करते हैं।  नाग पंचमी का पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि विषैले जीवों के प्रति भी हमारे मन में करुणा और उनके अस्तित्व के प्रति सम्मान होना चाहिए। 

नागद्वारी धाम सतपुड़ा की गोद में बसा आध्यात्मिक केंद्र
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र और पचमढ़ी के समीप सतपुड़ा की घने जंगलों से घिरी घाटियों में नागद्वारी धाम स्थित है। यह स्थान अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत है। पचमढ़ी से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस पावन धाम की यात्रा वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के 10 दिन पूर्व प्रारंभ होती है। इस दुर्गम यात्रा को इसके कठिन रास्तों ऊंची पहाड़ियों और अलौकिक अनुभवों के कारण मध्य प्रदेश की अमरनाथ यात्रा के रूप में जाना जाता है।

अमरनाथ यात्रा जैसी दुर्गम 17 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर
नागद्वारी की यह यात्रा लगभग 17 किलोमीटर के कठिन और पथरीले पैदल मार्ग से होकर गुजरती है। सतपुड़ा के घने जंगलों गहरी खाइयों बहते झरनों और विशाल चट्टानों के बीच से रास्ता बनाते हुए श्रद्धालु नागराज के दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं। 

इस यात्रा में मध्य प्रदेश के स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से बहुत बड़ी संख्या में लाखों की तादाद में शिवभक्त और नागभक्त पहुंचते हैं। भाषा प्रांत और संस्कृति की विविधताओं के बावजूद सभी भक्त यहाँ आकर एक अनूठे सूत्र में बंध जाते हैं। 

यात्रा के प्रमुख पड़ाव और उनका धार्मिक महत्व
17 किलोमीटर के इस दुर्गम मार्ग में कई ऐसे पड़ाव आते हैं। जहां श्रद्धालु विश्राम करते हैं और प्रकृति के विहंगम दृश्यों का आनंद लेते हैं। इन पड़ावों का अपना एक विशेष पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व है। 

काजरी- यह यात्रा का शुरुआती और अत्यंत सुंदर पड़ाव है यहाँ की हरियाली और शुद्ध वातावरण भक्तों की थकान मिटा देता है। 

कालीचटार - यहाँ की काली चट्टानें और घने जंगल भक्तों को रोमांचित कर देते हैं इस स्थान पर शिव पार्वती की अदृश्य उपस्थिति की मान्यता है। 

चिंतामन - माना जाता है कि यहाँ पहुँचकर भक्तों की सभी मानसिक चिंताएं दूर हो जाती हैं यहाँ भगवान गणेश और शिव जी की आराधना की जाती है। 

स्वर्गद्वार- यह इस यात्रा का सबसे कठिन और खड़ी चढ़ाई वाला हिस्सा है संकरी गुफाओं और ऊंची चट्टानों से होकर गुजरते हुए ऐसा प्रतीत होता है मानो भक्त स्वर्ग के द्वार की ओर बढ़ रहे हों। 

नागद्वारी मंदिर- मुख्य गुफा और मंदिर जहाँ नागराज साक्षात विराजमान माने जाते हैं यहाँ श्रद्धालु नागदेवता की प्रतिमा और शिवलिंग पर दूध व जल अर्पित कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। 

माई की गिरी भजिया गिरी नांदिया खेड़ा आदि कई दार्शनिक और प्राकृतिक सौंदर्यता आध्यात्मिक शान्ति से ओतप्रोत स्थान है। इस यात्रा की सबसे सुंदर और भावुक कर देने वाली विशेषता यहाँ के भक्तों के बीच का आपसी संबंध है जब श्रद्धालु इस 17 किलोमीटर की यात्रा पर निकलते हैं तो उनके भीतर का अहंकार पूरी तरह विलीन हो जाता है। यात्रा के दौरान कोई अमीर कोई गरीब कोई छोटा या बड़ा नहीं होता सभी भक्त एक दूसरे को भगत (Bhagat) कहकर पुकारते हैं। यदि कोई किसी की मदद करता है तो उसे अत्यंत आदर के साथ सेवा भगत (Seva Bhagat) कहा जाता है।  पूरी राह में अपरिचित लोग भी एक दूसरे का हाथ पकड़कर चढ़ाई चढ़ते हैं। पानी पिलाते हैं और उत्साह बढ़ाते हैं। 

गृहस्थ सुख का त्याग और सवा महीने की अनन्य शिव भक्ति
नागद्वारी यात्रा केवल शारीरिक श्रम या पर्यटन नहीं है बल्कि यह एक गहरी आध्यात्मिक साधना है। इस यात्रा की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यात्रा पूरी कर जब भक्त अपने घरों को लौटते हैं तो वे एक कठिन संकल्प लेते हैं। श्रद्धालु आने वाले सवा महीने लगभग 35 से 40 दिन तक सभी प्रकार के सांसारिक और पारिवारिक सुख सुविधाओं का स्वेच्छा से त्याग कर देते हैं। इस अवधि में वे केवल सात्विक जीवन जीते हैं।  भूमि पर शयन करते हैं।  ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।  और अपना संपूर्ण समय भोलेनाथ और नागराज की भक्ति संकीर्तन एवं ध्यान में व्यतीत करते हैं। यह त्याग आधुनिक जीवन की भौतिकता से दूर जाकर अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक अद्भुत प्रयास है। 

जैसा कि चित्र में रेखांकित किया गया है,  नाग पंचमी का पर्व हमें केवल पूजा अर्चना तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि इसके पीछे छिपे पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी समझना चाहिए।  जैव विविधता का सम्मान नागों और अन्य सरीसृपों को बिना कारण मारने से बचें वे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र Ecosystem का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वनों का संरक्षण सतपुड़ा जैसे घने जंगलों और पर्वतों को पर्यटन के नाम पर प्रदूषित न करें प्लास्टिक और कचरा जंगलों में न फेंकें।  जल स्रोतों की रक्षा यात्रा के दौरान पड़ने वाले नदी झरनों और प्राकृतिक जलधाराओं की पवित्रता बनाए रखें। 
तामिया छिंदवाड़ा की सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं में आयोजित होने वाली नागद्वारी यात्रा वास्तव में इस बात का साक्षात प्रमाण है कि सनातन धर्म प्रकृति के साथ सह अस्तित्व की भावना पर टिका हुआ है। कठिन रास्तों को पार कर भगत और सेवा भगत के आपसी प्रेम को आत्मसात करते हुए जब कोई भक्त नागराज के चरणों में शीश नवाता है तो उसे असीम शांति की अनुभूति होती है। यह यात्रा हमें सिखाती है कि ईश्वर मंदिर की चारदीवारी में ही नहीं बल्कि सतपुड़ा के इन ऊंचे पर्वतों कल कल बहते झरनों और हर एक मूक जीव के भीतर भी समान रूप से स्पंदित हो रहा है। 

लेख-
नकुल सारंग, छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश

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