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पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अप्रैल 2026

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छत्तीसगढ़ के सुघ्घर प्राकृतिक ठउर ओनाकोना

छत्तीसगढ़ के सुघ्घर प्राकृतिक ठउर ओनाकोना

 छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक ठउर ओनाकोना छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर ले करीबन 28 कोस दुरिहा धमतरी जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में बालोद जिला के छोर अउ  गंगरेल बांध के पार म गांव ओनाकोना हमर छत्तीसगढ़ के अचरा म एक अघाते चिनहार नाव हे। अपन प्राकृतिक सुघरइ  बर शोर मचाय गांव ओनाकोना म छत्तीसगढ़ ही नहीं भलुक आन प्रदेश के मनखे मन घलो इहां घूमे बर आथे।

ओनाकोना म बने नवा मंदिर अपन जबर सुघरइ  देखते बनथे। गंगरेल बांध के डुबान ठउर होय के सेती एकर बिस्तार आँखी ल भाथे। बांध म लबालब भरे जलरंग पानी अउ  जंगल के मनमोहना सुघ्घर रूप लोगन ल अपन कोती  खिंचे के चुंबक असन काम करथे। गांव के नाव, रहवास अउ इहां के मनखे  मन  के जीविका अइसे लागथे ए गांव के नाव कोनाकोना एकर सेती परे होही कि  ए गांव सबो कोती ले कोनहा म बसे हे। तेकर सेती सबो जहान ले अलग हो जाथे।

ए बस्ती के बसाहट पहाड़ी के नीचे एक छोटे भाटा म हे। बस उही छोटकुन भाटा म बसे हे ए गांव। ए बस्ती के लोगन मन के गुजर बसर पूरा-पूरा जल जंगल अउ  जमीन ले जुड़े हे। एकर तीर-तखर एको बड़े बस्ती नइ हे। तेखर सेती सरी दुनिया ले अलग लागथे। इहां के रहवासी मन के जीवन पूरा-पूरा जंगल जल जंगल और जमीन ऊपर आश्रित हे। इहां के लोगन मन बांध ले मछरी  पकड़ के अपन जीवन चलाथे।

महुआ तेंदूपत्ता अमली जइसन कतको जंगली जीनिस ले अपन जीवन चलाथें । कबर कि इहां कोन्हो बड़का खेतिखार के जमीन नइ  हे जेकर ले अन्न उपजा सके । गंगरेल बांध के डुबान ठउर म सब्जी भाजी के खेती करके अउ इहां घुमे बर अवइया मन ल डोंगा चढ़ाई के एवज म मिले रुपया पैसा म अपन गुजारा करथे। 

ओनाकोना म आधा सिरजे मंदिर-

ओनाकोना म बनत अधूरा मंदिर फुटान बेड़ा के उदिम ले बनत हे। जेन ह बढ़ सुघ्घर हे। ए मंदिर  के जब्बर बनावट खजुराहो के कारीगरी अउ  कहीं-कहीं फनी नागवंशी राजा के समय के मूर्ति के कारीगरी के अंगोट म हे। गौतमबुद्ध, सूर्य ,चंद्रमा, नाग ,सिंहासन म बिराजे राजा के मूर्ति मंदिर के भिठिया के सुघरइ ल बढ़ाय हे। मंदिर के आगू म नाचनी अउ नचकारा  के नाचे के भाव मूर्ति म देखे ल मिल जाथे  जेनहा इहां  अवइया मनखे मन ला बड़ भाथे।

वास्तुकला ल निहारे ले पता चलथे कि ए मंदिर तीन कूटका म बनत हे। ए मंदिर भगवान शंकर बर बनाय जावत हे। जेकर उत्ती बुड़ती अउ  भंडार कोती एकक दरवाजा हे। मंदिर के तीनों दरवाजा अउ  दिशा,मंदिर बनाय म वास्तु शिल्प के महत्ता ल उकेरत हे। इहां के कारीगरी( शिल्प शैली) नवा बनत दूसर मंदिर ले अलगे हे।

 ओनाकोना म आधा सिरजे जब्बर मंदिर-

 भगवान शंकर बर बने ए मंदिर अपन वास्तुकला ले अभीन के सिरजन ल ललकारत हे अइसे लगथे। मंदिर के चारों मुड़ा नाचनी राजकुमार राजकुमारी के कतको भाव वाले मूर्ति बनाय गे हे। मंदिर के भीतरी घलो राजा रानी अउ  चिरई चिरगुन के सुघ्घर-सुघ्घर फोटू  छपाय हवे। भल्ले  उचहा मंदिर ओमा बने मूर्ति फोटू  दूसर मंदिर मन ले अलगे हे। ए अपन सुघरइ बर अभीन ले प्रसिद्ध होगे हवे।

रोज इहां मनखे मन के आवा-जाही हे। बिहनिया ले लेके संझा तक इहां भीड़ लगे रथे। मंदिर देखत ,बांध  पार ले बांध के पानी के लहरा देखत, डोंगा चढ़त छोकरा छोकरी मन इहां मजा उड़ावत रथे। मंदिर के नीचे कोती छपाय फोटू  मन ल देख के छोकरा छोकरी मन बउरा जाथे। दूरिहा के पहाड़ी मन बड़  शोभायमान हे जेन ह हर कोई ल इहां घेरी बेरी आय बर खींचथे। पानी घरी  म इहां के शोभा जादा रमणीक होथे। हरिहर-हरिहर जंगल अउ  सागर कस पानी देखते बनथे।

 यात्रा के संजोग (भूमिका)
 

ओनाकोना आय के संजोग मोला हमर बालोद जिला के महान मनखे पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सेवानिवृत्ति सेवा ले निवृत्त अपर कलेक्टर माननीय जी. आर. राणा  जी के नेवता ले होइस। जी आर राणा जी ले मोर भेंट छत्तीसगढ़ी साहित्य महोत्सव म जब में रायपुर गेय रहेंव तब 21 मार्च के वैभव प्रकाशन रायपुर म होइस। 19अउ  20 मार्च के दु  दिन के छत्तीसगढ़ी साहित्य महोत्सव होटल क्लार्क इन म शामिल होय के पाछू 21 मार्च के छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के आयोजन म आय के पहिली मोर पुस्तक सांघदीप के प्रूफ रीडिंग बर वैभव प्रकाशन गेय रहेंव हो जिहां जी आर राणा जी ले भेंट होइस।

मे ओकर चेहरा ले नइ चिनहत रहेंव फेर मोला लागिस कि  कोनो भला मनखे होही। तब ओकर ले परिचित  होयेंव अपन नाव बताइस जी आर राणा तब मेंहां खुशी के मारे उछल गेंव अउ  महू अपन नाव  बतायेंव। हमन एक दूसर ल जानत रहेन फेर कभू मिले नइ  रेहेन। वो मोला 23 मार्च के छोटकुन होली मिलन बर नेवता दिस। वो बताइस कि ए कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद चितरंजन कर संपादक स्वराज करूण  अउ  हमर छत्तीसगढ़ के महान गुन्निक मनखे मन के इहां आना होही ,तब मेहां उही बेरा हव कहि देंव,अउ ओकर फोन नंबर ल लेयेंव।

 यात्रा के रद्दा

छत्तीसगढ़ी साहित्य महोत्सव के बढ़िया आयोजन के खतम होय के बाद सुरता ल मन में संजोवत दूसर दिन घर आयेन, तब 23 मार्च 2021 के दिन हमन देव जोशी गुलाब के संग पहिली ले सोच रहेन कि  हमन ल कोनाकोना जाना हे। तेखर सेती ओनाकोना जाय बर घर ले निकल गयेन। देव जोशी गुलाब ह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मंगचुवा म गणित के व्याख्याता हवे।

अपन स्कूल ले छुट्टी होय के बाद हमर गांव कोहंगाटोला पहुंचिस तब तक 1:00 बजे रहिस। जोशी के आय के बाद हमन तुरते निकलेन। हमला रद्दा के उवाट नइ रिहिस। हमन चाहत रहेन कि  ओनाकोना जल्दी पहुंच जावन। 2:00 बजे तक हमन ल पहुंचना रिहिस। बालोद ले रानी माई मंदिर होवत बेलोदा केशवपुर के रद्दा ल पूछत पूछत आगू बढ़त गेन। सड़क अभिन बनत रिहिस तेकर सेती हमन ल गाड़ी चलाय म  बड़  मुसकुल होइस हुई तभो ले 3:30 बजे आदिवासी तीर्थ राजा राव पठार पहुंच गयेंन।

इहां हर बछर 10 दिसंबर के बीर मेला लगथे। शहीद वीर नारायण सिंह के त्याग बलिदान अउ  गौरव कथा के आठ दिनी तिहार में लाखों मनखे मन इहां  जुरियाथे। इहं जेवनी कोती अंगार मोती गउ घाट अउ डेरि कोती ओनाकोना बर लिखाय मिलिस। थोरिक समे म हमन ढुलाव वाले रद्दा म उतर के ओनाकोना गांव पहुंच गयेन।

 वन श्री बगीचा मे पहुनइ

हमन नइ  जानत रहेन कि  राणा सर जी के वनश्री बगीचा कहां हे? हमन ओकर बगीचा ल नाहक के ओनाकोना गांव पहुंच गेय  रहेन। हमन ओकर बगीचा के पता पूछेन त बताइस कि ओनाकोना ले 2 किलोमीटर पीछू हे। हमन फेर लहुटेन। बगीचा के पहुंचती म राणा सर फोन लगाइस। मेहा फोन उठायेंव तब पूछिस "कहां पहुंचे हो? "
हां कहेंव- "अभिन गाड़ी ले उतरत हन।"

एक झन टूरा ल हमर पहुनइ  बर भेजिस। जेकर नाव राजेश रिहिस। ओहा हमन ल अपन संग चले बर किहिस। आगू म चितरंजन कर जी अउ  उकर टोली बइठे दिखिस। चितरंजन कर जी ओमन ल कुछु बतावत रिहिस तभे राणा सर जी हमन ल भीतर बलाइस। राणा सर जी किहिस- "पहिली तुमन जेवन कर लेव।"  ओला पता रिहिस कि  हमन भूखाय होबो। भटकत भटकत बड़  मुस्कुल ले इहां पहुंचे हन । हमन ल भूख लागत रिहिस काबर कि  देव जोशी गुलाब बिहनिया ले अपन घर ले स्कूल गेय रिहिस।

राजेश अउ  पुरोहित हमन ल जेवन जेय बर पानी दिस। हाथ मुंह धोके हमन सुघ्घर बिछौना म बइठ के जेवन जेयेन। रमकलिया अउ  चना आलू राजेश बनाय रिहिस। वोहा बी एस सी एग्रीकल्चर के बिद्यार्थी रिहिस । चारामा ले इहां राणा  जी के फार्म हाउस म वन श्री बगीचा के हियाव  करे बर आय रिहिस। बहुत होशियार लइका हे। बने पढ़े लिखे गुन्निक लइका आय वोहा । हमन ला सुघ्घर ढंग ले जेवन जेवइस। खाना खाय के पाछू उहां  एक छोटकन सभा होइस।

जेमा चर्चा के गोठ रिहिस बालोद शहर के शायर सलीम अहमद जख्मी जी ओमा चर्चा करत स्वराज करूण  जी ओकर कविता संग्रह 'बूढ़े बरगद का पेड़ ' अउ आन रचना ऊपर बहुतेच ज्ञान के गोठ  गोठियाइस। ओकर कविता ल पढ़ के घलो सुनाइस। चितरंजन कर किहिस-" बालोदवी जी हिंदुस्तान के बड़े शायरों में शुमार रिहिन जेकर सोर हा देश अउ देश ले बाहिर घलो उड़त हे।"

स्वराज करूण  ह जगदलपुर के साहित्यिक समिति के बालोद ले जुड़ाव अउ सलीम अहमद जख्मी के बहुतेच गुन गाइस ।लोक बाबू अरमान अश्क अउ पूर्व विधायक लोकेंद्र यादव के प्रयास ले प्रकाशित बालोदवी जी के बढ़िया गजल ' बूढ़े बरगद का पेड़' के कविता पढ़ के  सुनाइस। महु ह बालोद के गांधी भवन म जन नाट्य संघ इप्टा  ले सन 1993 में आयोजित बलोदवी जी के सम्मान समारोह के सुरता ल देवायेंव।

गोठ  के बिषय बालोंदवी ल छोड़ के  अउ आने बिषय म घलो गोठ  बात होइस। जइसे जिला के स्वतंत्रता सेनानी बाघमार के कंगला माझी के बात होइस। जब कंगला मांझी के गोठ  निकलिस त महान लेखक डॉक्टर परदेसी राम वर्मा जी के बात घलो  करेन। डॉक्टर परदेसी राम वर्मा जइसन साहित्यिक मनखे के बालोद जिला के एक छोटकुन गांव बाघमार म अवइ  ओकर प्रयास ले संत कवि पवन दीवान अउ छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के आगमन ऊपर घलो चर्चा करेन।

कंगला मांझी ऊपर गोठ  करत मोर द्वारा लिखे कंगला माझी के जीवनी जेमा कंगना माझी के स्वतंत्रता संग्राम म योगदान कंगला मांझी धाम बघमार म होवइया तीन दिवसीय मेला ओकर सैनिक मन के आदर्श, कंगला मांझी के नाव ले रखे कॉलेज के नाव ऊपर घलो गोठ बात करेन। कंगला मांझी शासकीय महाविद्यालय डौण्डी  के वार्षिक पत्रिका कंगला मांझी के विमोचन करे के मोला सौभाग्य मिलिस तेकर सेती उहां के प्राचार्य के यू मिश्र ल सुरता करेन अउ महा विद्यालय म कंगला माझी के मूर्ति अनावरण के बेरा डॉक्टर परदेसी राम वर्मा के संग करें यात्रा के सुरता ताजा होंगे।

कुल मिला के कहे जाय तो ए गोठ बात म बालोद जिला के स्वतंत्रता सेनानी, गौरवशाली साहित्यिक अउ ऐतिहासिक धरहट ल हमन सुरता करेन । ए गोठ  बात म जी आर राणा, डॉक्टर चितरंजन कर जी, स्वरूप करूण, श्रीमती माधुरी कर, अनीता उइके, देव जोशी गुलाब अउ  दूसर जन मन  घलो रिहिन।

समे के पता नई चलिस कि कइसे गुजरीस। एक घंटा बीत गे। गोठ बात ल  खतम करत चाय पिये के मजा लेयेन।जी आर राणा जी अवइया बेरा म पावस गोष्ठी के आयोजन करबोन कहि के योजना बनाइस। अवइया समे म इहां अउ आय  के साध संजोवत सब खुश होइन।

 वनश्री  उद्यान के सुघरई

संझा बेरा म हमन राणा जी के फार्म हाउस म थोरिक रुकेन। उहां जामुनी रंग के पत्ता गोभी अउ आन फसल ल देखेन।  बड़ अच्छा लगिस। उहां उन्नत खेती करेे जावत हे। अभी तक इहां बिजली नइ पहुंचे हे। तभो ले सोलर पंप ले पानी पलो के खेती साल भर करे जावत हे। अउ कोनो बिजली आ जाही ते इहां बढ़िया खेती करे जा सकत हे। उहां के कमइया मन बताइन कि हमर वनश्री उद्यान म जंगली जानवर मन जइसे नीलगाय जंगली सुरा हर रात मे चरे बर आ जाथे। 

बालोद जिला में किंजरत चंदा हाथी के दल 20-25 ठन दुबेरा इहां हमला करे हे। फसल ल रौंद दे हे। सोलर पंप ल घलो उखान दे हे।तार के कांटा ल घलो नइ घेपिन। हमु मन किसान हरन तेखर सेती ए दुख ल समझेन। वनश्री के सुघरइ ल देखत हमर मन नइ थिराइस तभो ले बिदा ले के ओनाकोना मंदिर देखे बर अपन फटफटी म बइठ के ओनाकोना गांव आयेन।

ओनाकोना म मंदिर दर्शन

पहिली बेरा ओनाकोना आय के मौका मिलिस।  एकर पहिली ए गांव के बारे म बहुतेच सुन पढ़े बर मिले रिहिस ।बढ़ साध रिहिस इहां आय के फेर साध आज पूरा होइस। मंदिर म जाय बर हमन ल गांव के कोलकी गली ले बुलके बर परिस।  छोटे से गांव अउ इहां के सिधवा मनखे मन बढ़ निक लागिस। पूछे म बने ढंग ले मंदिर जाय  के  रद्दा ल बताइन अउ हमन मंदिर पहुंच गेन। मंदिर के बनई अभीन रुके हे। मंझोत म शिवलिंग रखे के ठउर बनाय हे।

अतिक बड़े मंदिर बनाय म बढ़ समे अउ धन लगे होही। लोगन मन बताइन कि धमतरी के रहवइया गट्टी  फूटान दु  करोड़ रूपया लगा के ए मंदिर ल सिरजाय हे। वो भला मानुष ह अपन जिंनगी भर के कमई ल ए मंदिर सिरजई म लगाय हे। ओकर ए धरम के काज ल सेहराय के लइक हे। अइसन मनखे देवता बरोबर होथे। ए मंदिर के बनावट सुघरइ अउ इहां के प्राकृतिक सुघरइ  के गोठ  पूरा छत्तीसगढ़ म बगरे हे। प्राकृतिक ठउर मन म ओनाकोना के एक अलगे महत्ता हे। जेकर दर्शन करे के सौभाग्य मिलिस।

 एकर हियाव  सरकार करय

हमन बड़भागमानी आवन कि हमर जिला बालोद म अतेक सुघ्घर पर्यटन ठउर छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक स्थल ओनाकोना हवे। मेहा सरकार ल विनती करत हंव कि ओनाकोना के प्राकृतिक ठउर ल पर्यटन ठउर के नाम मिलय। काबर कि  एला  पर्यटन ठउर नाव देय के बाद एकर हियाव होही। लोगान मन एला जानही। अइसन सुघ्घर जगा ल बचाय संवारे अउ नवा रूप देय बर लोगन मन ल चेत करे ल परही।

 उपसंहार

धीरे-धीरे बेरा ह मूंधियार होवत रिहिस । बेर ह बूड़े  बर जावत रिहिस । तेकर सेती  इहां के सुघरइ बाढ़ गे रिहिस । लोगन मन एकर मजा लेवत रिहिन। बेर बुड़े  के सुघरइ ल देख के बेर उवे के सुंदरता ल जाने जा सकत हे कि कतेक सुघ्घर लागत होही। आगू म बांध के पानी अउ चारों कोती हरिहर हरिहर जंगल देखे के लइक हे। मेहा अपन संगवारी देव जोशी संग इहां के सुघरइ ऊपर गोठियायेंव तब जोशी जी घलो इहां के बिहनिया बेरा के रूप ल सोच के खुश होइस। इहां के सुरता ल गठियाय बर हमन फोटू  खिचेन, सेल्फी लेयेन अउ बेर बूड़े  के पहिली इहां ले निकले की कोशिश करेन। काबर कि जंगलिहा रद्दा अउ जंगली जानवर मन के डर घलो रिहिस।

इहां के मनमोहना प्रकृति के रूप ल अपन मन मंदिर म बइठारत हमन घर आय बर निकल गेन। रद्दा म दोनों कोती जंगल के पेड़ पौधा अउ ओमा फूले फूल के खुशबू ले मन मंजूर कस नाचे लगिस। फागुन महीना म जंगल म फूले परसा के फूल अघाते सुहात राहय जइसे सरग धरती म उतरगे हवे। जंगल रही तभे सुंदरता दिखही। जल रही तभे काली रही। इही सीख देवत हे प्राकृतिक ठउर ओनाकोना।

लेख-
डॉक्टर अशोक आकाश
बालोद

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