चंद्र कलाओं पर आधारित हिन्दू त्यौहार : छेरछेरा पुन्नी विशेष
April 28, 2025
संवत् 2083 विक्रमी | भाद्रपद शुक्ल द्वितीया | शनिवार
नक्षत्र: हस्त | योग: शुभ | करण: बालव
पर्व विशेष : | तदनुसार 12 सितंबर 2026

माँ एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर मन आनन्द से भर कर हिलोर लेने लगता है। माता, जननी, मम्मी, आई, अम्माँ इत्यादि बहुत से नामों से माँ को पुकारते हैं भाषा चाहे कोई भी हो पर माँ शब्द के उच्चारण मात्र से उसके आँचल की शीतल छाया एवं प्यार भरी गोद की सुखद अनुभूति होने लगती है। मनुष्य चाहे किसी आयु वर्ग का हो परन्तु माँ के सामने बच्चा ही रहता है। माँ के साथ बालपन का भाव स्वमेव ही आ जाता है।
माँ जन्मदात्री है। ईश्वर ने संसार की सृष्टि की तब धरती के लिए जीव की भी संरचना की। ईश्वर ने विचार किया कि सुंदर धरती के लिए जीव तो उन्होंने बना दिया परन्तु इस जीव की, वृद्धि, सुरक्षा, भरण-पोषण किस प्रकार होगा? वे सदैव तो धरती पर परोक्ष रूप से निवास नहीं कर सकते तो उन्होंने माँ को धरती पर भेजा। माँ के गर्भ में जीव पलता है और पूर्ण विकसित हो जन्म लेता है।
माँ वो अमोघ अस्त्र है जिसके उच्चारण मात्र से ही हर पीड़ा का नाश हो जाता है। माँ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, उसे सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है। शास्त्र कहते हैं कि माता निर्माता भवति, माता ही निर्माणकर्ती हैं, संतान के भविष्य का निर्माण माता के हाथों में दिया गया है। यह एक बड़ा दायित्व है, जिसके द्वारा राष्ट्र को सश्क्त एवं योग्य नागरिक मिलता है।
भारत में प्राचीन काल से ही मंदिरों के स्थापत्य में स्कंद माता का शिल्पांकन किया जाता रहा है। कुमार कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है इसलिए माता के रुप में स्कंद माता सर्वपुजित हैं तथा शिल्पकारों ने इन्हें अपने शिल्पांकन में प्रमुखता दी है। भारत के अनेक मंदिरों में इनकी प्रतिमा प्राप्त होती है। दक्षिण भारत में कार्तिकेय के अनेक मंदिर हैं। नवरात्रि में भी पांचवे दिन स्कंदमाता की आराधना की जाती हैं, इन्हें वात्सल्य एवं ममता की देवी माना जाता है।
माँ और उसकी सन्तान का सम्बन्ध अत्यंत घनिष्ठ होता है। सन्तान का माँ के साथ संबंध जीवन में अन्य संबंधों में से नौ महीने अधिक होता है। माँ और बच्चे का रिश्ता अनमोल केपवित्र और सच्चा और अटूट होता है। माँ और उसकी ममता के प्रति अपने प्रेम भावना अभिव्यक्त करने एवं उसके मातृत्व को सम्मान देने के लिए 'मातृ -दिवस या मदर्स डे मनाया जाता है ऐसा माना जाता है कि अन्तर्राष्ट्रीय मदर्स डे को मनाने की शुरूआत अमेरिका से हुई थी।
1912 में जब एना जार्विस नाम की कार्यकर्ता की माँ का निधन हुआ तब उनके द्वारा समस्त माता और उनके गौरवमयी मातृत्व के लिए तथा पारिवारिक और उनके संबंधों को सम्मान देने के लिए इस दिन को मदर्स डे के रूप में मनाने की शुरुआत की। तब से मई माह के दूसरे रविवार को यह दिन मनाया जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार यह ग्रीस से प्रारंभ हुआ था। भारत में भी इसी दिन मातृ दिवस मनाया जाता है। वैसे पूरे विश्व में मदर्स डे की एक निश्चित तिथि में एकरूपता नहीं है ,परंतु माँ के प्रति सम्पूर्ण मानव जाति विभिन्न तरीकों से अपनी कृतज्ञता अवश्य प्रेषित करती है।
माँ अपनी संतान को इस संसार में लाने के लिए कितनी पीड़ा सहन करती है। इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। मनुष्य को जीवन में जब असहनीय पीड़ा होती है तो उसके आँसू बहने लगते हैं, माँ अपनी संतान को जन्म देते समय प्राण निकालने वाली असहनीय पीड़ा को भी सहन कर लेती है,परन्तु उसकी आँखों से आँसू नहीं निकलते क्योंकि वह सन्तान को सुरक्षित इस संसार में लाना चाहती है।
संतान के जन्म लेते ही वह उसके रोने की आवाज़ सुनते ही वह अपनी सारी पीड़ा को उसी क्षण भूल जाती है। यही समय ऐसा होता है जब माँ अपने बच्चे को रोता हुआ देख प्रसन्न होती है। इसके बाद वह जीवन भर रोते नहीं देख सकती। कहते हैं जब बच्चे का जन्म होता है तब माँ का पुनर्जन्म होता है। माँ अपना सर्वस्व अपने बच्चों में न्योछावर कर देती है।
स्वयं कष्ट सहते हुए भी कभी थकती नहीं। माँ की ममता में ऐसी शक्ति होती है की वह अपनी संतान की सुरक्षा एवं खुशी के लिए प्रकृति को भी चुनौती दे सकती है। माँ की ममता, प्रेम, दया, क्षमा, त्याग, निडरता, ज्ञान, संस्कार की प्रतिमूर्ति होती है।
माँ, बच्चे की पहली शिक्षक होती है। जो हमें हमारे बारे में बताती है। ईश्वर भजन स्मरण वाणी से होता है पर माँ तो हृदय में रहती है। माँ के प्रति सभी की भावनाएं ऐसी जुड़ीं होती हैं जैसे प्राणवायु। माँ सच्ची मित्र भी होती है। माँ ही वह प्राणी है जो कभी अपनी संतान को अकेला नहीं छोड़ती। वह सदैव हितचिंतक, शुभचिंतक, रक्षक, पथप्रदर्शक होती है। बच्चे को ईश्वर द्वारा दिया अनमोल उपहार माँ है।
महादेवी वर्मा जी ने लिखा है- " संभवतः माँ ही ऐसा प्राणी है, जिसे कभी न देख पाने पर भी मनुष्य ऐसे स्मरण करता है, जैसे उसके संबंध में कुछ जानना बाकी नहीं। यह स्वाभाविक भी है। मनुष्य को संसार से बांधने वाला विधाता माँ ही है।" एक विद्वान का कथन है -" माँ ऐसा बैंक है जहां हम अपनी चोटों और परेशानियों को जमा कर सकते हैं।"
माता-पिता के महत्व को देवता भी स्वीकारते हैं। तभी गणेश जी ने पृथ्वी की परिक्रमा न कर पिता शिवजी माता पार्वती की परिक्रमा कर प्रथम पूज्य बन गए। उन्होंने कहा कि माता-पिता में ही पूरा संसार है, इसलिए पृथ्वी की परिक्रमा की आवश्यकता नहीं।
माँ की महिमा अनन्त है, माँ के बिना संसार अधूरा है। माँ की प्यार भरी पुचकार, स्पर्श औषधि के समान होती है। याद कीजिये बचपन में लगने वाली चोट को उसकी एक फूंक से और प्यार से सिर पर हाथ फेरने से ही ठीक हो जाती थी। कितनी शक्तिशाली होती है प्यार भरी झप्पी इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता पर अनुभव अवश्य किया जा सकता है। बच्चे की पीड़ा, मनःस्थिति को माँ खामोशी में भी समझ जाती है। माँ के हृदय से सदैव आर्शीवाद ही निकलता है।
माँ की ममता निःस्वार्थ होती है। माँ अपनी प्रशंसा या उपहार, इनाम की लालसा से कोई कार्यं नहीं करती। यदि माँ को सम्मान देना है तो मन, वचन, कर्म से कोई भी कार्य ऐसा न करें कि उसके हृदय को, उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचे। सदा सच्चाई के मार्ग पर चलते हुए सद्कर्म करें।
माँ की सिखाई बातों का अनुसरण करते हुए अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण करें और महान कार्य करें कि लोग आपकी अच्छाइयों से प्रेरित होकर परिवार, समाज,राष्ट्र हित में कार्य करें। माँ के लिए इससे बड़ा सम्मान और कुछ हो भी नहीं सकता जब उसकी सन्तान के द्वारा किये गए अच्छे कार्यों से सबका कल्याण और विकास हो, उसकी उपलब्धियां, सुख, प्रसन्नता, प्रगति ही माँ के लिए अनमोल उपहार है।
माँ की ममता के बदले एक दिन क्या पूरा जीवन कम है माँ के सम्मान के लिए। सभी माताओं को सम्मान देने के लिए एक दिन निर्धारित किया गया है इसके पीछे उद्देश्य है कि उस दिन सभी माँ के प्रति अपने आदर, सम्मान, प्रेम और इस अमूल्य जीवन के लिए धन्यवाद दें, क्योंकि हर सांस तो माँ की दी हुई है तो उसका सम्मान प्रतिदिन प्रतिक्षण होना चाहिए।
आलेख
श्रीमती रेखा पाण्डेय (लिपि) हिन्दी व्याख्याता अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़
चंद्र कलाओं पर आधारित हिन्दू त्यौहार : छेरछेरा पुन्नी विशेष
April 28, 2025
सामाजिक समरसता के आदर्श प्रतीक श्रीराम
January 21, 2024
राम सीय सिर सेंदुर देहीं : विवाह पंचमी
December 17, 2023
भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी
September 14, 2023
महादेवी वर्मा का रचना संसार
September 12, 2023
धर्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक : डॉ राधाकृष्णन
September 05, 2023
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पथप्रदर्शक
August 15, 2023
श्रावण मास का आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्व
July 11, 2023
दुनिया से गुलामी का मैं नाम मिटा दूंगा
June 11, 2023
जानिए संवत्सर क्या है?
March 22, 2023
हिन्दी को समृद्ध करती लोकभाषाएँ
September 14, 2022
हम सबका अभिमान है हिन्दी
September 11, 2022
योग मानव जाति के लिए संजीवनी
June 21, 2022
अक्षय तृतीया का सामाजिक महत्व एवं व्यापकता
May 03, 2022
नव संवत्सर एवं चैत्र नवरात्रि का पर्व
April 02, 2022
नाट्यशास्त्र एवं लोकनाट्य रामलीला
March 28, 2022
छत्तीसगढ़ में शिवोपासना की परंपरा
March 01, 2022
प्राचीन भारतीय योग विज्ञान सर्वकाल में उपयोगी
June 21, 2021
भारतीय प्राचीन साहित्य में पर्यावरण संरक्षण का महत्व
June 05, 2021
अप्प दीपो भव : बुद्ध पूर्णिमा
May 26, 2021
सकल सृष्टि की जनक माँ : मातृ दिवस विशेष
May 09, 2021
हिन्दवी स्वराज के संस्थापक : छत्रपति शिवाजी
February 19, 2021
भारतीय हस्तशिल्प: रचनात्मकता और कलात्मकता का अनूठा संगम
December 12, 2020
समर्पण और देशभक्ति की पर्याय : भगिनी निवेदिता
October 28, 2020
राष्ट्र भक्ति, वीरता तथा आत्मसम्मान का प्रतीक रानी लक्ष्मी बाई
June 18, 2020
रामचरित मानस में वर्णित ॠषि मुनि एवं उनके आश्रम
May 05, 2020
देवालयों में संगीत द्वारा ईश्वरीय आराधना की परंपरा
April 21, 2020
भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोकसंगीत
March 27, 2020
बच्चों के मानसिक विकास के लिए मातृभाषा उतनी ही आवश्यक है जितना शारीरिक विकास के लिए माँ का दूध : महात्मा गांधी
February 21, 2020
ऐसी भक्ति करै रैदासा : माघ पूर्णिमा विशेष
February 09, 2020
बरन-बरन तरु फुले उपवन वन : वसंतोत्सव विशेष
January 30, 2020
जानिए गुप्त नवरात्रि क्या है और क्यों मनाई जाती है।
January 25, 2020
जिनकी रचनाओं ने राष्ट्रीयता और देशप्रेम की भावना जगाई : राष्ट्रकवि पुण्यतिथि
December 12, 2019
युद्ध के मैदान से आया जीवन दर्शन : गीता जयंती विशेष
December 08, 2019
सनातन धर्म संत समाज के संस्थापक श्री गहिरा गुरु जी : पुण्यतिथि विशेष
November 20, 2019
पोला तिहार और कुशोत्पाटिनी अमावस्या
September 10, 2026
पोरा तिहार: बैलों के प्रति कृतज्ञता और अन्न के गर्भ-पूजन का पर्व
September 09, 2026
गोवत्स द्वादशी: भारतीय जीवन-मूल्यों में गौ-वंश का स्थान
September 08, 2026
राजा चक्रधर सिंह पोर्ते: कला, संगीत और जनकल्याण के अप्रतिम नायक
September 08, 2026
रायगढ़ रियासत के दीवान और सुप्रसिद्ध साहित्यकार: डॉ.बल्देवप्रसाद मिश्र
September 07, 2026
राजस्थान में प्रकृति से जुड़ा लोकोत्सव है- गाँव बारो
September 06, 2026
शिक्षक दिवस विशेष: संविधान सभा में डॉ. राधाकृष्णन के विचार
September 05, 2026
रायपुर : विशेष लेख : नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर
September 05, 2026
डॉ.राधाकृष्णन और भारतीय ज्ञान परम्परा
September 04, 2026
छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण का लोक स्वरूप और रासलीला
September 04, 2026
“कोटा (नंदगाँव) की कृष्ण जन्माष्टमी की अनूठी परम्परा”
September 04, 2026
देवकी के त्याग से तारणहार का प्राकट्य
September 04, 2026
श्री कृष्ण का वैदिक स्वरूप
September 03, 2026
संतान सुख और रक्षा, मातृत्व का पर्व: हलषष्ठी (खमरछठ)
September 02, 2026
बघेरा(केकड़ी) के मूर्ति शिल्प में विष्णु अवतार बलराम
September 02, 2026
लोक-अनुभव का भंडार: हमारी वाचिक परंपरा
September 01, 2026
प्रकृति और नारी के उल्लास का पर्व- कजली तीज
August 31, 2026
सांस्कृतिक व शैक्षिक तत्वों से भरपूर है:छतीसगढ़ी लोक खेल
August 30, 2026
संस्कृत ध्वनियों का उच्चारण एक सहज योग
August 29, 2026
लोकपर्व भोजली
August 29, 2026
पोला तिहार और कुशोत्पाटिनी अमावस्या
September 10, 2026
पोरा तिहार: बैलों के प्रति कृतज्ञता और अन्न के गर्भ-पूजन का पर्व
September 09, 2026
गोवत्स द्वादशी: भारतीय जीवन-मूल्यों में गौ-वंश का स्थान
September 08, 2026
राजा चक्रधर सिंह पोर्ते: कला, संगीत और जनकल्याण के अप्रतिम नायक
September 08, 2026
रायगढ़ रियासत के दीवान और सुप्रसिद्ध साहित्यकार: डॉ.बल्देवप्रसाद मिश्र
September 07, 2026
राजस्थान में प्रकृति से जुड़ा लोकोत्सव है- गाँव बारो
September 06, 2026
शिक्षक दिवस विशेष: संविधान सभा में डॉ. राधाकृष्णन के विचार
September 05, 2026
रायपुर : विशेष लेख : नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर
September 05, 2026
डॉ.राधाकृष्णन और भारतीय ज्ञान परम्परा
September 04, 2026
छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण का लोक स्वरूप और रासलीला
September 04, 2026
“कोटा (नंदगाँव) की कृष्ण जन्माष्टमी की अनूठी परम्परा”
September 04, 2026
देवकी के त्याग से तारणहार का प्राकट्य
September 04, 2026
श्री कृष्ण का वैदिक स्वरूप
September 03, 2026
संतान सुख और रक्षा, मातृत्व का पर्व: हलषष्ठी (खमरछठ)
September 02, 2026
बघेरा(केकड़ी) के मूर्ति शिल्प में विष्णु अवतार बलराम
September 02, 2026
लोक-अनुभव का भंडार: हमारी वाचिक परंपरा
September 01, 2026
प्रकृति और नारी के उल्लास का पर्व- कजली तीज
August 31, 2026
सांस्कृतिक व शैक्षिक तत्वों से भरपूर है:छतीसगढ़ी लोक खेल
August 30, 2026
संस्कृत ध्वनियों का उच्चारण एक सहज योग
August 29, 2026
लोकपर्व भोजली
August 29, 2026
This is the commets tab content.
This is the Tags tab content.
Note * Your email address will not be published. Required fields are marked
भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी
September 14, 2025