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हमारी ज्ञान परम्परा का महत्त्वपूर्ण घटक हैं जनऊला!

हमारी ज्ञान परम्परा का महत्त्वपूर्ण घटक हैं जनऊला!

किसी समाज का विकास व्यक्ति के बुद्धिमत्ता और तर्कशीलता के साथ जुड़ा हुआ है ऐसा समाज जिसमें व्यक्तियों का समूह तार्किक ना हो वह विकास के पथ पर सरलता के साथ नहीं चल सकता यही कारण है कि समाज स्वयं ही ऐसे साधन बनाते आया है जो व्यक्ति की बुद्धिमत्ता और तर्कशीलता को बढ़ता है ताकि समाज का विकास निरंतर चलता रहे।   

प्राचीन काल में भारत में वेद , पुराण , व्याकरण, विज्ञान , खगोल का ज्ञान तो दिया ही जाता था लेकिन तर्कशीलता को बढ़ाने हेतु घर एवं समाज के बुजुर्ग एवं बड़े अपने छोटो के साथ कुछ तार्किक प्रश्न किया करते थे यह प्रश्न गीतों के माध्यम से कथाओं के माध्यम से और कभी-कभी छंदों के माध्यम से किया जाता था जिन्हें पहेलियां कहा जाता है भारत के अनेक राज्यों में खेल-खेल में पहेलियां पूछ कर तर्क शक्ति का जागरण करना एक आम तरीका है। 

अगर बात हमारे राज्य छत्तीसगढ़ की जाए तो यहां भी प्रश्न पूछने के अनोखे तरीके हैं जिन्हें " जनउला " कहा जाता है । जनउला छत्तीसगढ़ के लगभग सभी स्थानों पर प्रचलित है हंसी मजाक के साथ साथ कुछ उलझे प्रश्न तर्क शक्ति का विकास करती हैं जनउला  छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति में प्रचलित पारंपरिक पहेलियाँ हैं, जो ज्ञान, मनोरंजन और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने का एक अनमोल लोकसाहित्य माध्यम हैं। ये छत्तीसगढ़ी भाषा, परंपरा और ग्रामीण जीवन (जैसे खेती-किसानी, प्रकृति) को दर्शाती हैं, जो पीढ़ियों से मौखिक रूप से चली आ रही हैं।

यह वाचिक परंपरा का भी एक अच्छा उदाहरण है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है कुछ लय बध होते हैं और कुछ अतुकांत , पर सभी में एक प्रश्न छुपा होता है जिसका उत्तर प्रकृति समाज वस्तु आदि से जुड़ा होता है। 

छत्तीसगढ़ी के जनउला निम्न हैं -

बन ले लानेव बेंदरी ओखर छेदेव कान
दार भात जेवन करेव फटिक देव मैदान 

उत्तर :- पतरी (पत्तल) 

पितल के बटलोही लोहा के ढकना 
फोड़ के देखेव चार ठन पखना 

उत्तर:- तेंदू 

बाप बेटा एक्के नाव महतारी के नाव दुसरे 
जवानी म कतको काम आय बुढ़तपन में चुचरे
 
उत्तर:- आम

नान कुन टुरा कुद कुद के पार बांधे 
उत्तर:- सुजी (सुई)

नानकुन टुरा बुटानी कस पेट 
कहा जाबे टुरा रतनपुर देश

उत्तर:- नारियल

जनउला छत्तीसगढ़ के आम जनमानस के दैनिक जीवन में बातों बातों में उपयोग किया जाता है मनोरंजन भी होता है और तर्क शक्ति का विकास भी।

लेख  - 
गुलाब ठाकुर
 

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