सरगुजा अंचल स्थित प्रतापपुर जिले के शिवालय : सावन विशेष
July 26, 2021
संवत् 2082 विक्रमी | चैत्र कृष्ण अष्टमी | बुधवार
नक्षत्र: ज्येष्ठा | योग: वज्र | करण: बालव
पर्व विशेष : | तदनुसार 11 मार्च 2026

सरगुजा अंचल की जनजातियों में होली की कई अनोखी परंपराएं प्रचलित हैं। यहाँ बैकोना गांव में होली के एक दिन बाद, तो सेमरा कला में एक दिन पहले उत्सव मनाने का रिवाज है। वहीं, चेरवा जनजाति फाल्गुन शुक्ल पंचमी को होली के दस दिन पहले ही यह त्योहार मनाती है। यहाँ लोग होलिका की राख को बीमारियों के इलाज के लिए अत्यंत पवित्र मानते हैं।
होली का पर्व हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। बसंत ऋतु में आने के कारण इसे 'बसंतोत्सव' भी कहते हैं। हिंदू धर्म के इस महत्वपूर्ण त्योहार को फगुआ, फागुन, धूलेंडी और दोल जैसे नामों से भी जाना जाता है।

यह त्योहार भक्त प्रह्लाद की याद में मनाया जाता है। यहाँ प्रह्लाद का अर्थ 'आनंद' और होलिका को 'वैर व उत्पीड़न' का प्रतीक माना जाता है। सरगुजा में इसे 'होरी' कहते हैं। पहले दिन होलिका दहन होता है और दूसरे दिन धूलेंडी या 'धूर उड़ाना' मनाया जाता है, जिसमें लोग एक-दूसरे पर गुलाल लगाते हैं और फाग गीत गाते हैं।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में गोंड, कंवर, उरांव, कोड़ाकू, कोरवा, पंडो, खैरवार, चेरवा और अगरिया जनजातियां निवास करती हैं। ये सभी समुदाय अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं के साथ होली मनाते हैं।

खजूरी, बैकोना और सेमराकला गांव में मान्यता है कि ग्राम खजूरी 'पुरुष रूप' है और ग्राम बैकोना 'महिला रूप'। इसलिए पहले खजूरी में और उसके अगले दिन बैकोना में होली मनाई जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि इस क्रम को तोड़ने से कोई अनिष्ट हो सकता है। वहीं, सेमरा कला में पूर्वजों के समय से ही एक दिन पहले होली मनाने का रिवाज है ताकि गांव में खुशहाली बनी रहे।
कंवर जनजाति: कंवर जनजाति के लोग पूरे एक माह तक गांव में घूम-घूमकर सरगुजिहा बोली में होली गीत गाते हैं। होलिका दहन के लिए सेमर वृक्ष की डाली का उपयोग किया जाता है, जिसे गांव का कोटवार लाता है। बैगा (पुरोहित) विधि-विधान से पूजा कर सम्मत जलाता है।
प्रमुख मान्यताएं: जलती लकड़ी (लूठी) से दागने पर बांझ वृक्षों में फल आने लगते हैं।बीमार जानवर ठीक हो जाते हैं। बची हुई सेमर की लकड़ी को शिकार के हथियारों में लगाने से सफलता मिलती है। इसकी राख का तिलक लगाने या इसे पीने से बीमारियां दूर होती हैं।

गोंड़ जनजाति के रिवाज
गोंड समुदाय में 'रेंड़ी' वृक्ष की डाली को प्रह्लाद का प्रतीक मानकर गाड़ा जाता है। बैगा द्वारा पूजा-अर्चना के बाद सम्मत जलाई जाती है। यहाँ भी जलती लकड़ी से वृक्षों को दागने की परंपरा है और भगवान राम-सीता से संबंधित सुंदर फाग गीत गाए जाते हैं।
चेरवा जनजाति: दस दिन पूर्व उत्सव
चेरवा समाज के लोग होली से दस दिन पहले पंचमी को त्योहार मनाते हैं। सम्मत दहन के समय ये लोग एक अंडा और काला चूजा (करिया चिंयां) चढ़ाते हैं। इनकी मान्यता है कि जलती होली में चावल डालने से परिवार के सभी दुख, रोग और परेशानियां जलकर राख हो जाती हैं।
पंडो जनजाति की आस्था
पंडो जनजाति में 'चिरचिटा' (तेंदू) वृक्ष की डाली का उपयोग होता है। ग्रामीण गाजे-बाजे के साथ जंगल से लकड़ी लाते हैं। मान्यता है कि होलिका दहन की राख से बुखार, खाज-खुजली और खसरा जैसे रोग ठीक हो जाते हैं। ये लोग बची हुई लकड़ी पर तीर-धनुष से निशाना लगाकर बुराई को दूर करने का प्रतीक मनाते हैं।
उरांव और कोड़ाकू जनजाति
उरांव जनजाति में होलिका दहन की अग्नि को घर ले जाने की परंपरा है। इसी पवित्र अग्नि से घर का चूल्हा जलाकर पकवान पकाए जाते हैं, ताकि घर में अच्छाई का प्रवेश हो।

कोड़ाकू जनजाति में कुंवारे लड़के जंगल से सेमर की लकड़ी लाते हैं। दहन के बाद बची लकड़ी पर पत्थर से निशाना लगाने वाले को इनाम में महुआ का पेड़ दिया जाता है। ये लोग भी सम्मत की आग से घर का चूल्हा जलाते हैं और नदी में स्नान करने के बाद ही घर में प्रवेश करते हैं।

इस प्रकार, सरगुजा की जनजातियां अपनी प्राचीन मान्यताओं और परंपराओं के माध्यम से आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देती हैं।
लेख: श्री अजय कुमार चतुर्वेदी
सरगुजा अंचल स्थित प्रतापपुर जिले के शिवालय : सावन विशेष
July 26, 2021
बाबा बच्छराज कुंवर एवं जोबा पहाड़ की पुरा सम्पदा
July 04, 2021
सरगुजा अंचल में गंगा दशहरा
June 20, 2021
सरगुजा अंचल की आराध्य देवी माँ गढ़वतिया माई : नवरात्रि विशेष
April 21, 2021
सरगुजा अंचल की जनजातियों में होली का त्यौहार
March 28, 2021
मंदिरों की नगरी : प्रतापपुर
November 04, 2020
कुदरगढ़िन माता : छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष
October 23, 2020
सरगुजा अंचल में भगवान श्री राम का धनुष बाण
September 15, 2020
राम भजो भाई, गोबिन्द भजो भाई का संकीर्तन कर समाज को बुराईयों के प्रति जागृत करने वाली माता राजमोहनी देवी
January 05, 2019
हमारी ज्ञान परम्परा का महत्त्वपूर्ण घटक हैं जनऊला!
March 11, 2026
पौराणिक कथा - चार प्रश्न
March 10, 2026
फागुन मंडई- देवी के शक्तिपीठ स्थापना का देव दुर्लभ पर्व
March 10, 2026
बुन्देली चित्रकला
March 09, 2026
भारतीय नारी का आदर्श
March 08, 2026
धूलपंचमी को मेला के अवसर पर पीथमपुर के कालेश्वरनाथ
March 08, 2026
केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास का जीवन्त अभिलेख है बहुरुपियों की लुप्त होती कलाएँ!
March 07, 2026
सबहिं धरे सजि निज-निज द्वारे: भारत में द्वार-सज्जा के विविध रूप
March 06, 2026
बस्तर का सामाजिक ताना बाना, साझी विरासत, संस्कृति और देव परंपरा के मूल भाव में समरसता
March 05, 2026
सुप्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी, चिन्तक व विचारक : पृथ्वीसिंह आजाद (आज पुण्यतिथि)
March 05, 2026
ब्रज के देवालयों में होली उत्सव
March 03, 2026
जनजातीय समुदायों में होली का पर्व
March 03, 2026
होली की आभा है- पलाश
March 02, 2026
होली- लोकजीवन का बहुरंगी त्यौहार
March 01, 2026
खेले मसान में होरी दिगम्बर....
February 28, 2026
फाग का लोकरंग
February 27, 2026
दक्षिण कोसल की वैज्ञानिक प्रेरणा और रसतत्त्व के महान् ऋषि - आचार्य नागार्जुन
February 27, 2026
चेतना के व्यक्त प्रतीकः मन्दिर
February 26, 2026
पुस्तक समीक्षा : सावरकरकृत ‘भारतीय इतिहास के छः स्वर्णिम पृष्ठ’
February 25, 2026
रैबारी के रीति रिवाज एवं परम्पराएँ
February 23, 2026
हमारी ज्ञान परम्परा का महत्त्वपूर्ण घटक हैं जनऊला!
March 11, 2026
पौराणिक कथा - चार प्रश्न
March 10, 2026
फागुन मंडई- देवी के शक्तिपीठ स्थापना का देव दुर्लभ पर्व
March 10, 2026
बुन्देली चित्रकला
March 09, 2026
भारतीय नारी का आदर्श
March 08, 2026
धूलपंचमी को मेला के अवसर पर पीथमपुर के कालेश्वरनाथ
March 08, 2026
केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास का जीवन्त अभिलेख है बहुरुपियों की लुप्त होती कलाएँ!
March 07, 2026
सबहिं धरे सजि निज-निज द्वारे: भारत में द्वार-सज्जा के विविध रूप
March 06, 2026
बस्तर का सामाजिक ताना बाना, साझी विरासत, संस्कृति और देव परंपरा के मूल भाव में समरसता
March 05, 2026
सुप्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी, चिन्तक व विचारक : पृथ्वीसिंह आजाद (आज पुण्यतिथि)
March 05, 2026
ब्रज के देवालयों में होली उत्सव
March 03, 2026
जनजातीय समुदायों में होली का पर्व
March 03, 2026
होली की आभा है- पलाश
March 02, 2026
होली- लोकजीवन का बहुरंगी त्यौहार
March 01, 2026
खेले मसान में होरी दिगम्बर....
February 28, 2026
फाग का लोकरंग
February 27, 2026
दक्षिण कोसल की वैज्ञानिक प्रेरणा और रसतत्त्व के महान् ऋषि - आचार्य नागार्जुन
February 27, 2026
चेतना के व्यक्त प्रतीकः मन्दिर
February 26, 2026
पुस्तक समीक्षा : सावरकरकृत ‘भारतीय इतिहास के छः स्वर्णिम पृष्ठ’
February 25, 2026
रैबारी के रीति रिवाज एवं परम्पराएँ
February 23, 2026
This is the commets tab content.
This is the Tags tab content.
Note * Your email address will not be published. Required fields are marked
जनजातीय समुदायों में होली का पर्व
March 03, 2026