आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | श्रवण कृष्ण दशमी | रविवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: व्यतिपात | करण: विष्टि

पर्व विशेष : | तदनुसार 06 सितंबर 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | श्रवण कृष्ण दशमी | रविवार

नक्षत्र: आर्द्रा | योग: व्यतिपात | करण: विष्टि

पर्व विशेष : | तदनुसार 06 सितंबर 2026

रामचरितमानस में गौ माता का महत्व

रामचरितमानस में गौ माता का महत्व


गोस्वामीजी तुलसीदास तुलसीदास जी हिन्दी साहित्य के महान भक्त कवि और रामभक्ति परंपरा के सर्वाधिक प्रभावशाली प्रतिभासंपन्न प्रतिनिधि माने जाते हैं। उन्होनें रामकथा को केवल धार्मिक आख्यान नही, बल्कि मानवीय जीवन मूल्यों, सामाजिक आदर्शों, लोक संस्कृति, पर्यावरण संवर्धन के सहित आज समाज में सबसे उपेक्षित प्राणी गौ माता को अपने ग्रंथ रामचरितमानस में सर्वोच्च स्थान दिया है। 

यहॉ तक कि वे राम जन्म के अनेक कारणों में गौ संवर्धन हेतु आज हमारे गौ माता की दुर्दशा को त्रेतायुग में रावन के अत्याचारों से कमतर न ऑकते हुये, गौ रक्षा को रामजन्म का प्रधान कारण माना है। कालजयी कृति रामचरितमानस में गौ माता कि महिमा को स्पष्ट करते गोस्वामीजी ने लिखा-

स्याम सुरभि पय बिसद अति गुनद करहिं सब पान। 
गिरा ग्राम्य सिय राम जस गावहिं सुनहि सुजान।। 


पोषण, परोपकार और धर्म की प्रतीक - गौ माता।

प्रभु श्री सीता राम जी के यश को मैनें गवारूँ भाषा में लिखा है पर सभी लोग बड़े चाव से गाते हैं सुनते हैं ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार श्यामा गौ काले रंग की होती पर उसका दूध उज्जवल गुणकारी अमृत से कम नही। रामचरित मानस स्वयं गौ माता ही हैं। भगवान महादेव भगवती माता पार्वती से कहते हैं-

रामकथा सुरधेनु सम सेवत सब सुख दानि। 
सतसमाज सुरलोकसब को न सुनै अस जानि।। 

कामधेनु के समान गौ माता समस्त सुखो को प्रदान करने वाली हैं, गौ माता साक्षात चलती फिरती वह कारखाना है जो समस्त खराब चीजों को खाकर अमृत तुल्य दूध प्रदान करती है, समस्त देव स्थल ही गौ माता है, कृषि प्रधान देश भारत में गौ माता से प्राप्त बैल, गोबर, गौ मूत्र सब कुछ संस्कृति पर्यावरण हेतु समर्पित होता है। 


गोस्वामीजी तुलसीदास जी

आज भी सनातन संस्कृति में धार्मिक अनुष्ठान गौ माता के प्राप्त गोबर से गौरी गणेश का निर्माण कर उनकी पूजा से प्रारंभ होती है। मानव के सर्वप्रथम पूर्वज महराज मनु और रानी सतरूपा भी गौ माता के नाम पर गोमती नदी में स्नान कर भगवान को प्राप्त करते हैं। 

पहुँचे जाइ धेनुमति तीरा हरषि नहाये निरमल नीरा। 

धेनुमति याने गोमती, गोमति याने गाय के समान मति बुद्धि हो जाय। गाय की मति दूसरों के लिए परोपकार के लिए होती है, गाय अपना दूध स्वयं नही पीती, जो माता अपने बच्चो को अपना स्तनपान नही करा सकती उसे गौ माता अपना दूध पिलाकर पोषण कर देती है। 
उत्तरकॉड में तो गोस्वामीजी जी ने ज्ञान प्राप्ति के लिए एक पूरे प्रकरण का मूल आधार ही गौ माता को प्रमाणित करते है। जो हमारे समाज में ज्ञानदीप प्रसंग के नाम से प्रसिद्ध है। गोस्वामीजी कहते दीपक जलाने के लिए जिस घी की आवश्यकता होती है वह हमें गाय से ही मिलती है। 

सात्विक श्रद्धा धेनु सुहाई जौ हरि कृपा हृदयँ बस आई। 
जप तप ब्रत जम नियम अपारा जे श्रुति कह सुभ धर्म अचारा।
तेइ तृन हरित चरै जब गाई भाव बच्छ सिसु पाइ पेन्हाई।
नोइ निबृत्ति पात्र बिस्वासा निर्मल मन अहीर निज दासा। 
परम धर्ममय पय दुहि भाई अवटै अनल अकाम बनाई। 
तोष मरूत तब छमा जुड़ावै धृति सम जावनु देइ जमावै।
मुदिता मथै बिचार मथानी दम आधार रजु सत्य सुबानी।
तब मथि काढि लेइ नवनीता बिमल बिराग सुभग सुपुनीता।
जोग अगिन करि प्रगट तब कर्म सुभासुभ लाइ। 
बुद्धि सिरावै ग्यान घृत ममता मल जरि जाइ।। 


ज्ञान और श्रद्धा की प्रतिमूर्ति - गौ माता।

इस प्रकार गाय के दूध से घी बनेगा तब उस घी से दीप जलेगा और उस दीप में अधंकार, मद का अंत होगा और राम की ज्ञान की प्राप्ति होगी। 

इसीलिए गोस्वामीजी कहते हैं -

बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार। 
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार। 

जब निशाचर रावन वंश का धरती पर अत्याचार बढा़ तब धरती माता स्वयं गौ माता का रूप बनाकर भगवान के शरण में गई और पुकार करने लगी। 

धेनु रूप धरी हृदय बिचारी गई तहॉ जहँ सुर मुनि झारी। 
संग गोतनुधारी भूमि बिचारी परम बिकल भय सोका। 


धरती माता की करुण पुकार

भगवान प्रकट हुये देवताओं ने बिचार किया। प्रभु हमारे लिए नही गौमाता की रक्षा के लिए आप संकल्पित हैं- गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिंधुसुता  प्रियकंता।
किष्किन्धा कॉड में भक्ति की खोज में निकले वानरों को जामवंत सियान कहते हैं-

निज इच्छाँ प्रभु अवतरइ सुर महि गो द्विज लागि। 
सगुन उपासक संग तहँ रहहिं मोच्छ सब त्यागि। 

आइये हम सब इस तुलसी जन्मोत्सव पर संकल्प लेवें। गौ माता का सम्मान करें, है माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलायें, गौ रक्षा करें, गौ हत्या बंद करायें। 

- अचल कुमार वैष्णव
रातापायली जि.राजनॉदगॉव छग.
प्रॉतीय सलाहकार एवं संगठन मंत्री श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान राजनॉदगॉव।

Follow us on social media and share!