पर्वतराज अमरकंटक
February 05, 2026
संवत् 2082 विक्रमी | माघ कृष्ण एकादशी | शुक्रवार
नक्षत्र: मूल | योग: वज्र | करण: बालव
पर्व विशेष : | तदनुसार 13 फ़रवरी 2026

अठारहवीं सदी के प्रारंभ में भारत अनेक टुकड़ों में विभक्त हो चुका था। प्रशासनिक ढांचा कमजोर था और जन-जीवन तथा संपत्ति असुरक्षित स्थिति में थे। इसी काल में यूरोप से आए अंग्रेज व्यापारी धीरे-धीरे सत्ता के स्वामी बन बैठे। परिणामस्वरूप भारत एक लंबे समय तक औपनिवेशिक दासता में जकड़ गया।
भारत के हृदय स्थल मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र प्राचीन काल में गोंड़ राजाओं के अधीन रहा था। इसी क्षेत्र में स्थित नरसिंहपुर जिले से लगभग 60 किलोमीटर दूर मदनपुर और तेंदूखेड़ा का क्षेत्र आता है। यह स्थान वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग भोपाल रोड से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से यह इलाका गोंड़ शासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र
मदनपुर का प्राचीन नाम रामगढ़ था। प्रखर सेनानी गोंड़ राजा डेलनशाह के जीवन से संबंधित है। राजा डेलनशाह का जन्म सन् 1802 में इसी ग्राम में हुआ था। बाल्यावस्था से ही उनमें निर्भयता, वीरता और धैर्य के गुण स्पष्ट दिखाई देते थे।
राजा डेलनशाह मदनपुर राज्य के शासक थे। उनके पिता का नाम राजा विश्राम सिंह था, जिनकी दो पत्नियाँ थीं। पहली पत्नी से डेलनशाह और निजामशाह तथा दूसरी पत्नी से कमोदशाह और देवीसिंह का जन्म हुआ। इस प्रकार राजा डेलनशाह चार भाइयों में ज्येष्ठ थे।
राजा डेलनशाह धार्मिक प्रवृत्ति के शासक थे। वे देवी-देवताओं, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं में गहरी आस्था रखते थे। उनके व्यक्तित्व में धर्म और वीरता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। प्रजा भी उन्हें श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखती थी।

राजा डेलनशाह का विवाह छिंदवाड़ा जिले के हर्रई के राजघराने में 22 वर्ष की आयु में हुआ था। उनके ससुर छिंदवाड़ा क्षेत्र के प्रतिष्ठित जमींदार थे। उनकी पत्नी का नाम मदनबाई था। जनश्रुति के अनुसार डीलवार और मदनपुर गांव की बसाहट इन्हीं के काल में हुई।
गोंड़ी लोकगीतों में आज भी इस बसाहट का प्रमाण मिलता है। एक प्रसिद्ध पंक्ति इस प्रकार है –
“कौन बसाये मदनपुर और कौन बसाये डीलवार, राजा बसाये मदनपुर रानी बसाये डीलवार।”
इससे स्पष्ट होता है कि मदनपुर और डीलवार की स्थापना राजा डेलनशाह और रानी मदनबाई द्वारा की गई थी। डीलवार, डेलनवाड़ा का अपभ्रंश माना जाता है।
राजा डेलनशाह को एक पुत्र की प्राप्ति हुई थी, किंतु बीमारी के कारण उसका असमय निधन हो गया। यह घटना उनके जीवन का एक गहरा आघात थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने दायित्वों से विमुख हुए बिना राज्य और प्रजा की सेवा जारी रखी। उनके जीवन में व्यक्तिगत दुख और सार्वजनिक संघर्ष साथ-साथ चलते रहे।
उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में अंग्रेजों ने मध्यप्रदेश क्षेत्र में अपने पाँव जमाने शुरू कर दिए। सन् 1817 में अंग्रेजों ने नरसिंहपुर के निकट चौरागढ़ पर कब्जा कर लिया। 1818 में परिषद के माध्यम से उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की। इससे स्थानीय शासकों और जनता में असंतोष फैल गया।
सन् 1800 के आसपास मंडला से नरसिंहपुर तक नागपुर के भोंसले, ग्वालियर के सिंधिया और बुंदेलों का शासन प्रभावी था। भोपाल के नवाब भी इस क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे। चीचली, गगई, बरहा और पलोहा जैसे क्षेत्रों में गोंड़ राजाओं का शासन था। यह क्षेत्र राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन चुका था।
नागपुर के भोंसले राजाओं ने इस क्षेत्र को 1750 में सात लाख रुपये में खरीदा था। सन् 1817-18 के बाद अंग्रेजों ने इस पर पूर्ण अधिकार कर लिया। बरहा और पलोहा क्षेत्र पिंडारियों को सौंप दिए गए। यहां सरदार चिंटू और करीम खाँ का शासन स्थापित हुआ।
राजा डेलनशाह के विवाह के समय तक पूरा क्षेत्र अंग्रेजों के नियंत्रण में आ चुका था। डीलवार क्षेत्र में वे सीमित अधिकारों के साथ शासन कर रहे थे। यह स्थिति उन्हें भीतर तक व्यथित करती थी। उन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग चुना।
अंग्रेजों से प्रत्यक्ष युद्ध के लिए उनके पास पर्याप्त सेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने जनजागरण और संगठन का मार्ग अपनाया। सन् 1818 में राजा डेलनशाह ने चौरागढ़ पर अचानक आक्रमण कर यूनियन जैक झंडा उतार फेंका। हालांकि वे किले पर अधिकार नहीं कर सके।
अंग्रेजों ने चौरागढ़ में अपने सैन्य बल को और मजबूत कर लिया। सन् 1836 में राजा डेलनशाह ने बरहा और पलोहा क्षेत्र को पिंडारियों से मुक्त कराने का पुनः प्रयास किया। इस बार भी उन्हें सफलता नहीं मिली। संघर्ष लगातार चलता रहा।
जब राजा डेलनशाह अन्य किलों की रक्षा में व्यस्त थे, तब पिंडारियों ने डीलवार के किले पर आक्रमण किया। उस समय चीचली के राजकुमार नरवरशाह ने डीलवार की रक्षा की। राजा डेलनशाह ने आभार स्वरूप उन्हें डीलवार का अधिपति बनाने का प्रस्ताव दिया। किंतु नरवरशाह ने यह अधिकार निजामशाह को सौंप दिया।
1818 में मराठों की पराजय के बाद नर्मदा, सतपुड़ा और विंध्य क्षेत्र अंग्रेजों के अधीन आ गए। इन क्षेत्रों को “सागर-नर्मदा टेरिटरीज” के रूप में गठित किया गया। इसका प्रशासन फौजी अधिकारी सी. फ्रेजर को सौंपा गया। यह सीधे गवर्नर-जनरल के प्रति उत्तरदायी था।
सन् 1842 में सागर-नर्मदा टेरिटरीज में व्यापक विद्रोह हुआ। इसमें राजा, मालगुजार और जागीरदारों ने सक्रिय भागीदारी की। गोंड़, लोधी और बुंदेला शासक इस आंदोलन में अग्रणी थे। बुंदेलों की प्रमुख भूमिका के कारण इसे “बुंदेला विद्रोह” भी कहा गया।
राजा डेलनशाह के विद्रोह से अंग्रेजी शासन के विरुद्ध वातावरण बना। क्षेत्र के तालुकेदारों और जमींदारों की शिकायतें अनसुनी रह गई थीं। असंतोष भीतर ही भीतर सुलगता रहा। यही असंतोष आगे चलकर 1857 के महासंग्राम में फूट पड़ा।
1857 के विद्रोह में मदनपुर के राजा डेलनशाह ने सक्रिय भागीदारी की। इसी वर्ष गढ़ा-जबलपुर के गोंड़ राजा शंकरशाह और कुंवर रघुनाथ शाह को 18 सितंबर को फांसी दी गई। इस घटना से राजा डेलनशाह अत्यंत आक्रोशित हो उठे। उन्होंने चांवरपाठा और तेंदूखेड़ा पर आक्रमण कर अंग्रेजी चौकियों को नष्ट कर दिया।
अंग्रेजी प्रशासन इस आक्रमण से स्तब्ध रह गया। 1858 के चैत्र मास में अंग्रेजी सेना ने डीलवार किले पर आक्रमण किया। गोंड़ सेना और जनता ने मिलकर वीरतापूर्वक प्रतिकार किया। किंतु संसाधनों की कमी के कारण अंततः पराजय स्वीकार करनी पड़ी।

राजा डेलनशाह को बंदी बनाकर स्थानीय जेल में रखा गया। उनके अनेक वीर सैनिक भी बंदी बनाए गए। अंततः उन्हें फांसी की सजा दी गई। उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई और शासन ने उनका नाम इतिहास से मिटाने का प्रयास किया।
शासकीय अभिलेखों में राजा डेलनशाह की वीरता का उल्लेख नहीं मिलता। किंतु मदनपुर, डीलवार और नरसिंहपुर अंचल के गांवों में उनके शौर्य की कथाएं आज भी जीवित हैं। स्थानीय जनश्रुतियां उन्हें लोकनायक के रूप में स्मरण करती हैं। यही उनकी वास्तविक विरासत है।
आज मदनपुर और डीलवार छोटे और लगभग गुमनाम गांव हैं। यहां केवल राजा डेलनशाह की गढ़ी के अवशेष बचे हैं। कुछ वृद्ध आज भी उनकी वीरता की कथाएं सुनाते हैं। यह स्थिति केवल डेलनशाह की नहीं, बल्कि उस युग के सभी बलिदानियों की रही है।
राजा डेलनशाह के बलिदान के बाद परिवार को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा आगे क्या हुआ, इस लेख के दूसरे अंक में हम जाएंगे।
लेख - ड़ॉ. विजय चौरसिया,
गाड़ासरई, जिला ड़िंड़ौरी म.प्र.
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जब तक नहीं विचार मिलेगा : सप्ताह की कविता
September 04, 2022
छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक वैभव : बांसगीत
September 03, 2022
हेमाद्रि संकल्प और ऋषि पंचमी
September 01, 2022
याद रखनी चाहिए भारत विभाजन की त्रासदी
August 14, 2022
छत्तीसगढ में मित्रता का प्राचीन पर्व
August 12, 2022
छत्तीसगढ़ी कविताओं में मद्य-निषेध
June 26, 2022
विदेशी यात्रियों की दृष्टि में छत्तीसगढ़
May 26, 2022
कुल उद्धारिणी चित्रोत्पला गंगा महानदी
May 20, 2022
लोक मानस में रचा बसा पर्व : अक्षय तृतीया
May 04, 2022
पंडो जनजाति का लाटा त्यौहार
April 25, 2022
महानदी तट पर स्थित चंद्रहासिनी देवी
April 10, 2022
होली के रंग, प्रीत के संग
March 20, 2022
भगवा ध्वज लहराया है
March 13, 2022
पौराणिक आस्था का मेला शिवरीनारायण
March 03, 2022
बस राम लिखूं
February 27, 2022
विजयी भारत के प्रेरणास्रोत : छत्रपति शिवाजी महाराज
February 19, 2022
सरगुजा के लोकनृत्य का प्रमुख पात्र "खिसरा"
February 08, 2022
स्वतंत्रता संग्राम में पूर्वोत्तर की प्रतिनिधि यौद्धा : रानी गाईदिन्ल्यू
January 26, 2022
सोनाखान जमींदारी
January 19, 2022
संसार को भारत के ‘स्व’ से परिचित कराने वाले स्वामी विवेकानंद
January 12, 2022
दक्षिण कोसल के वनों की पहचान : साल वृक्ष
January 11, 2022
गोवा मुक्ति संग्राम में छत्तीसगढ़ की भूमिका एवं योगदान
January 06, 2022
कला एवं संगीत को समर्पित एशिया महाद्वीप का एकमात्र विश्वविद्यालय
December 28, 2021
गुरु घासीदास की जन्मस्थली गिरौदपुरी
December 18, 2021
अन्याय के प्रति लड़ने का संदेश देती है गीता
December 14, 2021
बाबासाहेब के निर्वाणकाल की व्यथा : पुण्यतिथि विशेष
December 06, 2021
लोक देवता करमपाठ
November 23, 2021
मध्यकालीन अंधकार में प्रकाश स्तंभ गुरु नानकदेव
November 19, 2021
छत्तीसगढ़ का सीतानदी अभयारण्य
November 17, 2021
भगवा ध्वज लहराए : सप्ताह की कविता
November 14, 2021
फणिनागवंशियों के नगर पचराही का पुरातात्विक वैभव
November 02, 2021
नित वाणी में तेज भरो माँ!
October 10, 2021
बहुआयामी प्रतिभा के धनी : डॉ बल्देव
October 06, 2021
पत्थर और छेनियाँ
October 03, 2021
भारत माता के बहादुर लाल : लाल बहादुर शास्त्री
October 02, 2021
नमामि गंगे
September 26, 2021
पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एक युगदृष्टा
September 25, 2021
कोडाखड़का घुमर का अनछुआ सौंदर्य एवं शैलचित्र
September 21, 2021
राजभाषा के 72 साल : आज भी वही सवाल?
September 14, 2021
कृषि और ऋषि संस्कृति का लोक-पर्व : नुआखाई
September 11, 2021
रींवा उत्खनन से प्रकाशित मृतिका स्तूप
September 08, 2021
गौधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व पोला तिहार
September 06, 2021
माँझीनगढ़ के शैलचित्र एवं गढ़मावली देवी जातरा
September 04, 2021
बस्तर का बांस शिल्प
September 03, 2021
छत्तीसगढ़ में मैत्री का पारंपरिक त्योहार : भोजली
August 23, 2021
महादेव ने जहाँ पत्थर पर डमरु दे मारा : सावन विशेष
August 16, 2021
आज़ादी के लिए प्राणों की परवाह न करने वाली वनबाला दयावती : स्वतंत्रता दिवस विशेष
August 15, 2021
नागपंचमी के दिन गुरु मंत्र सिद्ध करने वाले नगमतिहा
August 13, 2021
जानिए मूल निवासी दिवस क्या है और मनाने की परम्परा क्यों प्रारंभ हुई?
August 09, 2021
सर्व अनिष्ट से ग्राम रक्षा का लोक पर्व सवनाही बरोई
August 04, 2021
केशकाल के प्राचीन शिवालय : सावन विशेष
August 02, 2021
एक ऐसा स्थान जहाँ के पत्थर बोलते हैं
July 20, 2021
अद्वितीय वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई : पुण्यतिथि विशेष
June 18, 2021
स्थापत्य कला में गजलक्ष्मी प्रतिमाओं का अंकन : छत्तीसगढ़
June 17, 2021
महाराणा प्रताप महान, अकबर नहीं : विश्लेषण
June 13, 2021
मैं धरती-आबा हूं! भगवान बिरसा मुंडा
June 09, 2021
सरोवरों-तालाबों की प्राचीन संस्कृति एवं समृद्ध परम्परा : छत्तीसगढ़
June 02, 2021
हिंदू धर्म उद्धारक शाक्यवंशी गौतम बुद्ध
May 27, 2021
भीषण गर्मी में प्यास बुझाता प्राकृतिक जलस्रोत गेल्हा चूआ
May 17, 2021
धन धान्य एवं समृद्धि के लिए कठोरी पूजा
May 08, 2021
राजिम त्रिवेणी स्थित कुलेश्वर मंदिर एवं संरक्षण प्रक्रिया
May 05, 2021
केवला रानी : देवार लोकगाथा
May 01, 2021
छत्तीसगढ़ की स्थापत्य कला में हनुमान
April 27, 2021
लोक देवी रामपुरहीन डोंडराही माता
April 22, 2021
सतबहनिया में से एक सियादेवी : नवरात्रि विशेष
April 20, 2021
जहाँ विराजी है मलयारिन माई : नवरात्रि विशेष
April 18, 2021
वन डोंगरी में विराजित गरजई माता : नवरात्रि विशेष
April 17, 2021
कलचुरी शासकों की कुलदेवी महामाया माई रायपुर : नवरात्रि विशेष
April 16, 2021
करेला भवानी माई : नवरात्रि विशेष
April 14, 2021
केरापानी की रानी माई : नवरात्रि विशेष
April 13, 2021
आराध्या भक्त शिरोमणी माता कर्मा
April 07, 2021
सामाजिक संदर्भ में लोक गाथा दसमत कैना
April 03, 2021
देश विदेश के डाक टिकटों में राम
March 26, 2021
खरदूषण की नगरी खरोद का पुरातत्वीय वैभव
March 22, 2021
छत्तीसगढ़ के प्राचीन मंदिरों की द्वारशाखा के सिरदल में विशिष्ट शिल्पांकनों का अध्ययन
March 19, 2021
आदिमानवों द्वारा निर्मित गुहा शैलचित्र : लहूहाता बस्तर
March 14, 2021
गढ़धनौरा गोबराहीन का विशाल शिवलिंग एवं पुन्नी मेला
March 11, 2021
जानी अनजानी कथा केशकाल की
March 07, 2021
छत्तीसगढ़ की स्थापत्य कला में बालि-सुग्रीव युद्ध का अंकन
March 03, 2021
रामायण साहित्यों में विज्ञान
March 01, 2021
राजिम मेला : ऐतिहासिक महत्व एवं संदर्भ
February 27, 2021
जैव जगत एवं पुरातत्व का सजीव संग्रहालय : बार नवापारा अभयारण्य
February 25, 2021
छत्तीसगढ़ के भरतपुर तहसील की शैलोत्कीर्ण गुफ़ाएं
February 23, 2021
मल्लालपत्तन (मल्हार) की स्थापत्य कला
February 21, 2021
बस्तर की मुरिया जनजाति का प्राचीन विश्वविद्यालय घोटुल
February 13, 2021
हमारी सांस्कृतिक धरोहरें एवं परम्पराएं
February 05, 2021
बस्तर की वनवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग : साजा वृक्ष
February 01, 2021
छत्तीसगढ़ का एक ऐसा वन्यग्राम जहाँ गांधी जी की पुण्यतिथि को प्रतिवर्ष भरता है मेला
January 30, 2021
छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम 1857 से पूर्व प्रारंभ हुआ : विशेष आलेख
January 26, 2021
इन पुतरन के सीस पर वार दिए सुत चार : गुरु गोविन्द सिंह जी
January 20, 2021
स्वामी विवेकानंद एवं उनका भारत प्रेम : विशेष आलेख
January 12, 2021
लखनपुर में लाख पोखरा : तालाबों की नगरी
January 04, 2021
ओ थके पथिक! विश्राम करो, मैं बोधि वृक्ष की छाया हूँ
January 01, 2021
जशपुर के बाला साहब : जन्म दिवस विशेष
December 26, 2020
कोसल के कलचुरियों से बस्तर के सम्बन्ध
December 24, 2020
मित्रता की फ़ूलवारी : मितान
December 20, 2020
गुरु घासीदास जी के सात संदेश एवं बयालिस अमृतवाणियाँ
December 18, 2020
भारत को बाहरी विचारधाराओं, मजहबों की कोई आवश्यकता नहीं है : डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
December 06, 2020
नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार : गुरु नानक जयंती विशेष
November 30, 2020
हरिहर मिलन का पर्व : बैकुंठ चतुर्दशी
November 29, 2020
करम डार परब : करमा
November 21, 2020
झांसी मेरी है, मैं उसे कदापि नहीं दूंगी : वीरांगना लक्ष्मी बाई
November 19, 2020
छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज में गौरी-गौरा पूजा की प्राचीन परम्परा
November 17, 2020
महाभारत के लेखक फ़ाउंटेन पेन के अविष्कारक
November 16, 2020
समय की मांग है भगवान बिरसा मुंडा का हूल जोहार : जयंती विशेष
November 15, 2020
छत्तीसगढ़ का प्रमुख जनजातीय पर्व : गौरी-गौरा पूजन
November 10, 2020
केशकाल का भव्य झरना : उमरादाह
November 08, 2020
नागा साधू द्वारा शापित नगर की कहानी
November 06, 2020
अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार : छत्तीसगढ़ निर्माण दिवस
November 01, 2020
जिनकी रगों में दौड़ती थी भारतभक्ति की लहरें : भगिनी निवेदिता
October 28, 2020
शक्ति का उपासना स्थल खल्लारी माता
October 27, 2020
जशपुर का परम्परागत दशहरा
October 26, 2020
कोसीर की महिषासुरमर्दनी देवी
October 25, 2020
महामाया देवी रतनपुर : छत्तीसगढ़
October 25, 2020
त्रिमूर्ति महामाया धमधा गढ़: छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष
October 24, 2020
गांधी ने पहचानी थी भारत की पुरानी पूँजी
October 02, 2020
भारत माता के भक्त – भगत सिंह
September 28, 2020
पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एक युग दृष्टा
September 25, 2020
वेब संगोष्ठी के अंतिम दिवस की रिपोर्ट
September 13, 2020
वेब संगोष्ठी के द्वितीय दिवस के सभी सत्रों की रिपोर्ट
September 11, 2020
तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम एवं द्वितीय सत्र की रिपोर्टिंग
September 08, 2020
पितर पूजन का पर्व : पितृ पक्ष
September 04, 2020
छत्तीसगढ़ के कण-कण में बसे हैं राम, यहां के लोगों की जीवन शैली राममय: सुश्री उइके
August 31, 2020
विष्णु के आठवें अवतार : योगेश्वर श्री कृष्ण
August 12, 2020
छत्तीसगढ़ी संस्कृति में मितान परम्परा
August 07, 2020
भगवान श्री राम की ऐतिहासिकता
August 05, 2020
राजगोंड़ समाज में राम
August 04, 2020
जंगल सत्याग्रह 1930 की वर्षगांठ : हरेली तिहार
July 20, 2020
दक्षिण कोसल की संस्कृति में पैली-काठा का महत्व
July 12, 2020
प्रकृति की अनुपम भेंट कांगेर वैली एवं उसकी अद्भुत गुफ़ाएं
July 08, 2020
भगवा ध्वज को गुरु का दर्जा : गुरु पूर्णिमा विशेष
July 05, 2020
छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति में हाना
July 03, 2020
देश की अर्थव्यवस्था पर अंतराष्ट्रीय विशेषज्ञ श्री एस गुरुमूर्ति जी का वक्त्व LIVE
May 11, 2020
देवऋषि नारद : लोक-कल्याण संचारक और संदेशवाहक
May 06, 2020
आदि शंकराचार्य के जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ देने वाली घटना : जयंती विशेष
April 28, 2020
पंचायतन पूजा पद्धति एवं चतुर्मठ की स्थापना : आदि शंकराचार्य
April 28, 2020
दर्पण के ज़रिए समझिये समाज की सच्चाई
March 17, 2020
गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्व विद्यालय में 5-6 नवम्बर को दो दिवसीय शोध संगोष्ठी
October 29, 2019
बीरनपाल की झारगयाइन देवी जातरा : बस्तर
October 20, 2019
बस्तर के सितरम गाँव का मंदिर जहाँ नाग हैं विरासत के पहरेदार
October 15, 2019
बारसूर का भुला दिया गया वैभव : पेदाम्मागुड़ी
October 07, 2019
बस्तर में शाक्त आस्था का केंद्र : माँ दंतेश्वरी
October 05, 2019
छत्तीसगढ़ में गाँधी का प्रवास व प्रभाव
October 02, 2019
बस्तर का तीजा व्रत एवं तीजा जगार
September 02, 2019
बावनमारी में लिंगो पेन (देव) का जन्म स्थल लिंग दरहा
August 17, 2019
भारतीय आदिवासियों में शिक्षा का प्रसार एवं वर्तमान स्थिति
August 09, 2019
छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन को गति देने में निर्णायक भूमिका निभाने वाले डॉ .खूबचन्द बघेल
July 19, 2019
बस्तर का गोंचा महापर्व : रथ दूज विशेष
July 04, 2019
रींवा गढ़ का पुरातात्विक उत्खनन
July 01, 2019
धरती के गर्भ से अनावृत हो रहा है प्राचीन नगर
June 26, 2019
अत्यावश्यक है प्राचीन पद्धति से वर्षा जल सरंक्षण
June 23, 2019
ताको नाम कबीर : कबीर पूर्णिमा
June 16, 2019
आर्य इन्वेंशन थ्यौरी और छोटू-बड़कू
June 01, 2019
दक्षिण कोसल का केदारनाथ शिवालय
May 30, 2019
ऐसा स्थान जहाँ जंगली भालू का कुनबा पीने आता है शीतल पेय
May 13, 2019
जब आपकी होली खत्म होती है तब इनकी शुरु होती है, जानिए कौन हैं ये
April 01, 2019
कोण्डागाँव का मावली मेला, जहाँ एकत्रित होते हैं देवी-देवता
March 14, 2019
ऐसा मेला जहाँ युवक-युवती गंधर्व विवाह के लिए हैं स्वतंत्र
March 05, 2019
"शुद्र कौन थे" अवलोकन एवं समीक्षा : डॉ त्रिभुवन सिंह
March 02, 2019
देखिए हिंगलाज देवी की भादो जात्रा (वीडियो)
February 09, 2019
जानिए कुंभ मेला कब से और क्यों भरता है?
February 07, 2019
ऐसे मनाया जाता है सरगुजा में लोकपर्व छेरता (छेरछेरा)
January 25, 2019
पूस पुन्नी भजन मेला : निराकार राम का साधक रामनामी सम्प्रदाय समाज
January 17, 2019
दक्षिण कोसल : कल और आज -1
January 13, 2019
स्वामीजी का वाङ्गमय पढ़कर मेरी देशभक्ति हजारों गुना बढ़ गई है : महात्मा गांधी
January 12, 2019
भक्त शिरोमणी माता राजिम जयंती पर विशेष
January 07, 2019
जानिए कौन हैं वो जो हर मौत के बाद पुराना मकान तोड़कर नया मकान बनाते हैं?
December 24, 2018
बस्तर की जनजातीय भाषा हल्बी के बारे में जानें
December 21, 2018
जानिए पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक कौन थे एवं कहाँ है उनकी जन्मभूमि?
December 14, 2018
राजा कर्ण जिनके राज्याभिषेक होने पर उनका कल्चुरी संवत प्रारंभ हुआ
December 13, 2018
क्या आपने भगवान विष्णु का युनानी योद्धा रुप देखा है?
November 22, 2018
छत्तीसगढ़ का जेठौनी तिहार
November 19, 2018
पौराणिक देवी-देवताओं की वनवासी पहचान : बस्तर
November 15, 2018
यज्ञोपवीत- एक सूत्र जो है पवित्रता का प्रतीक
February 11, 2026
स्वातंत्र्य समर के दुर्जेय जनजातीय महारथी : तिलका मांझी
February 11, 2026
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February 11, 2026
जबलपुर का चौसठ योगिनी मन्दिर
February 10, 2026
बैगा समुदाय की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति
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February 05, 2026
खैरागढ़ – एशिया का प्रथम संगीत विश्वविद्यालय
February 04, 2026
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February 01, 2026
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January 31, 2026
सूर्य मंदिर- कोणार्क, अद्भुत वास्तुकला और आध्यात्मिकता का संगम
January 30, 2026
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January 29, 2026
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January 27, 2026
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January 26, 2026
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January 24, 2026
मदनपुर के गोंड़ राजा ड़ेलनशाह - भाग 01
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