ज्ञान भारतम् अभियान: प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने का संकल्प
April 26, 2026
संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर
पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

भारत में शारदीय नवसस्येष्टि/लक्ष्मी पूजन (दीपावली) प्रमुख पर्व है। भारतीय संस्कृति का वह महाउत्सव है, जो हजारो वर्षो से कार्तिक मास की अमावस्या को हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है। दीपावली भारतीय जीवन-दर्शन के चार प्रमुख पर्वों नववर्ष प्रतिपदा, बासन्तीय नवसस्येष्टि/होली, ऋषि तर्पण/रक्षा बंधन और शारदीय नवसस्येष्टि में से एक है, जो एक ऋतु से दुसरे ऋतु में प्रवेश के अवसर पर मनाए जाते हैं।
शारदीय नवसस्येष्टि/दीपावली के अवसर पर माँ लक्ष्मी की पूजा प्राचीन काल से होती आ रही है। यह कृषि से सम्बंधित पर्व है, यह शरद काल में नई फसल के घर आने की ख़ुशी में मनाये जाने वाला पर्व है। इसे लक्ष्मी पूजा भी कहा जाता है। हमारी संस्कृति में नई फसल आने पर पर देवी देवताओं को भोग लगाने के बाद ही उपयोग करने की परम्परा है, अत: नई फसल आने पर किये जाने वाला यज्ञ शास्त्रों में नवसस्येष्टि कहलाता है। बहुत से लोग दीपवाली में नवाखाई करते है, नई फसल देवी देवताओं को समर्पित करने वाला पर्व लोकभाषा में नवाखाई कहलाता है।

शास्त्रों में नवसस्येष्टि यज्ञ
यह पर्व वर्षा ऋतु की समाप्ति और हेमंत ऋतु के आगमन के संगम काल में आता है। किसान नई फसल, जैसे धान, मूंग, दाल, बाजरा, ज्वार, तील आदि घर आने पर परमात्मा का धन्यवाद ज्ञापन करने के लिए नवसस्येष्टि यज्ञ करते थे। इसलिए आपने देखा होगा, नवा खाई (नई फसल) देवी देवताओं को अर्पित कर फिर खाना आरम्भ करते है। कई घरों में नया चावला से बने खीर को दीपावली में लक्ष्मी माता को भोग लगाकर ही खाने की परम्परा आज भी विद्यमान है। पांच दिनों की दीपावली के आलावा भी देव दीपावली, देवउठनी एकादशी, शरद पूर्णिमा, गंगा दशहरा,मकर संक्रांति,छठ पूजा आदि पर्व के दिन भी दीपों की माला/पंक्ति लगे जाती है, अत: इस पर्व का मूल नाम दीपावली ना होकर शारदीय नवसस्येष्टि / लक्ष्मी पूजन कहना न्यायोचित होगा।

माँ लक्ष्मी को नए अन्न से बनी खीर का भोग
हालांकि लोगों के बीच एक लोकप्रिय विश्वास यह है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौटते समय उनकी खुशी व्यक्त करने के लिए घी के दीपक जलाए गए थे, और तब से ही यह परंपरा जारी है। यह एक प्रचलित लोक मान्यता है। किंतु, महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण के गहन अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि भगवान राम ने रावण का वध फाल्गुन मास में किया था, और उनका १४ वर्ष का वनवास चैत्र माह में पूरा हुआ था। इसलिए, यह कथा सत्य प्रतीत नहीं होती कि राम कार्तिक मास की अमावस्या को अयोध्या आए थे, क्योंकि शारदीय नवसस्येष्टि यज्ञ (दीपावली) का पर्व भगवान राम के वनवास गमन से पूर्व भी मनाए जाने के प्रमाण शास्त्रों में मौजूद हैं।
पौराणिक मान्सयताओं के अनुसार सतयुग में दीपावली की सबसे प्रमुख कथा समुद्र मंथन (समुद्रमंथन) से जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,भगवान विष्णु की सलाह पर देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया। इस मंथन से चौदह रत्न प्रकट हुए, जिनमें से एक थी, माँ लक्ष्मी। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही माता लक्ष्मी कमल पुष्प पर विराजमान होकर समुद्र से प्रकट हुईं। इसी कारण से दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन की परंपरा है, जो सत्य युग से जुड़ी हुई है।

क्षीरसागर का मंथन
दीपावली की महारात्रि को संपत्ति और समृद्धि की विशेष वृद्धि के लिए श्रीमहालक्ष्मी और श्री गणेश जी के साथ पूजन किया जाता है। शास्त्रों में लक्ष्मी को चंचला कहा गया है जो आती और जाती रहती हैं। जबकि जगत पिता महादेव की शक्ति को श्रीमहालक्ष्मी कहा गया है। महालक्ष्मी का स्थाई वास तभी होता है जब मनुष्य ईमानदारी और पुरुषार्थ से ‘पुण्य लक्ष्मी’ अर्जित करे, न कि बेईमानी या शोषण से अर्जित ‘पाप लक्ष्मी’।

श्रीमहालक्ष्मी
कार्तिक अमावस्या को घना अन्धकार होता है। दीपावली केवल बाहरी प्रकाश नहीं, बल्कि आंतरिक जागरण का पर्व है। यह ‘दीपों की आवली’ (पंक्ति) है, जिसका अर्थ है अंधकार को मिटा देना, भय से बाहर निकलना, और भ्रम को दूर करना। बृहदारण्यकोपनिषद् का श्लोक “असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय।” वास्तविक साधना और आध्यात्म का संदेश देता है। अंधकार यानी बुराई और बुरी आदतों को त्यागकर, प्रकाश यानी सत्य के पथ पर उन्मुख होना ही इसका वास्तविक संदेश है।

असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय।
प्रकाश का आह्वान दीपावली, अपने सार्वभौमिक संदेश “अंधकार से प्रकाश की ओर” के साथ, हमें प्रेरित करती है कि हम भौतिक और आत्मिक, दोनों स्तरों पर अंधकार (अज्ञान, दरिद्रता, रोग, असत्य) को त्यागकर प्रकाश (ज्ञान, समृद्धि, स्वास्थ्य, सत्य) की ओर चलें। यह पर्व अग्नि तत्व की बढ़ोत्तरी के लिए मनाया जाता है, क्योंकि इस माह सूर्य नीच राशि तुला में रहते हैं। दीपों को जलाना वास्तव में अग्नि, प्रकाश, और ऊर्जा की प्राप्ति के लिए है।
यह विश्व कल्याण की भावना से विशेष यज्ञ का अनुष्ठान करने, और सभी मनुष्यों के लिए सुख, शान्ति, सामर्थ्य, संयमशीलता और स्वस्थ जीवन की कामना करने का पर्व है। अंततः यह पर्व सृष्टि के आरम्भ से ही समस्त मनुष्यों का पर्व रहा है, यह अनादि सत्य सनातन धर्म की महानता है। यह प्रकाश पर्व हर व्यक्ति के चेहरे पर खुशी और उत्साह का प्रकाश करता रहे, यही इसका सर्वोच्च दार्शनिक सार है।

लेख
वेद प्रकाश सिंह ठाकुर
संपादक, दक्षिण कोसल टुडे
ज्ञान भारतम् अभियान: प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने का संकल्प
April 26, 2026
सामाजिक समरसता के आलोक में गोटुल
February 22, 2026
जनजातीय समाज में महाशिवरात्रि का पर्व
February 14, 2026
भारतीय मापन पद्धति में रत्ती का महत्व
January 01, 2026
वाचिक परंपरा और उसका महत्व
December 25, 2025
नव वर्ष की भारतीय परंपरा
December 21, 2025
वनवासी विरासत पर आधारित आज का विश्व
December 11, 2025
लोक कथाओं में छिपा समाज का इतिहास
December 09, 2025
प्रथम महिला स्वतंत्रता सेनानी: रानी अब्बक्का देवी
November 19, 2025
जनजातीय गौरव दिवस: हमारे महापुरुषों और राष्ट्रीय-गौरव के स्मरण का दिन
November 14, 2025
जनजातीय वर्ग के विरुद्ध अंग्रेजों के षड्यंत्र
November 12, 2025
जनजातीय वर्ग का सामाजिक और आध्यात्मिक दर्शन
November 12, 2025
जनजातीय समाज की ज्ञान परम्परा
November 12, 2025
वैश्विक समस्याओं के निदान में जनजातीय समाज की भूमिका
November 12, 2025
जनजातीय समाज के प्रति मिथ्या धारणाएँ एवं उनका कारण
October 31, 2025
हम सबके मूल में जनजातीय समाज की मान्यताएं
October 31, 2025
जनजातीय समाज द्वारा इस्लामी आक्रमण का प्रतिकार
October 31, 2025
जब जंगलों से उठी आज़ादी की पहली आवाज़
October 31, 2025
तुलसी पूजा: भारतीय समाज में प्राकृतिक तत्त्वों के उपासना की परम्परा
October 31, 2025
आंवला नवमी: भारतीय समाज में प्रकृति पूजन का पर्व
October 29, 2025
छत्तीसगढ़ में सूर्य उपासना की 10,000 वर्ष पुरानी परंपरा
October 28, 2025
"छत्तीसगढ़ का पारंपरिक गौरा-गौरी उत्सव: शिव-पार्वती विवाह का लोक पर्व
October 21, 2025
दीपावली/ नवसस्येष्टि: प्रकाश, पुनर्जागरण और भारतीय जीवन-दर्शन का उत्सव
October 20, 2025
जानिए नरक चौदस का महत्व
October 19, 2025
धनतेरस पर्व में निहित आयुर्वेद और स्वास्थ्य समृद्धि का उत्सव
October 18, 2025
मुरिया दरबार
October 03, 2025
बस्तर दशहरा: शक्ति की उपासना और महिषासुर पर विजय की यात्रा (भाग 03)
September 24, 2025
बस्तर दशहरा: शक्ति की उपासना और महिषासुर पर विजय की यात्रा (भाग-02)
September 23, 2025
बस्तर दशहरा: शक्ति उपासना और महिषासुर पर विजय की यात्रा (भाग 01)
September 22, 2025
भारतीय समाज को एक सूत्र में बांधते: हमारे पितर
September 21, 2025
बस्तर का गोंचा/रथ महापर्व: भारतीय संस्कृति की देव यात्रा (जातरा) का प्रतीक
June 27, 2025
पारधी जनजाति की शिल्पकला आधारित जीवन शैली
April 30, 2025
महानदी अपवाह तंत्र की व्यापारिक पथ प्रणाली : शोध पत्र
April 30, 2025
मिशनरियों के विरुद्ध उलगुलान के नायक बिरसा मुंडा
June 09, 2022
नगपुरा का श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ
January 21, 2022
कबीरपंथियों के आस्था का केन्द्र दामाखेड़ा
December 14, 2021
जानिए ऑपरेशन पोलो क्या है?
September 17, 2021
जहां प्रकृति स्वयं करती है शिव का जलाभिषेक
August 18, 2021
संघर्ष, साधना और विजय: निराला की कालजयी कृति ‘राम की शक्ति पूजा’
October 17, 2026
शारदीय नवरात्रि: छत्तीसगढ़ के सोनपैरी और लचकेरा ग्राम की लोकपरम्पराएँ
October 17, 2026
छत्तीसगढ़ में शाक्त परंपरा: वैदिक और लोक-आस्था का संगम
October 17, 2026
चौहान सम्राटों की इष्टदेवी: महाशक्ति चामुण्डा
October 16, 2026
जनजातीय युवती वल्ली और भगवान कार्तिकेय का विवाह
October 16, 2026
शत्रु पर विजय का वरदान प्राप्त होता है बगुलामुखी देवी मन्दिर
October 15, 2026
विज्ञान, मानवीय संवेदना एवं राष्ट्र के प्रेरणापुंज - डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
October 15, 2026
भील जनजाति की लोकआस्था में रायकुंडा की महिषासुरमर्दिनी
October 15, 2026
सप्तमातृका: छत्तीसगढ़ और बस्तर की शक्ति परम्परा
October 15, 2026
हाड़ौती अंचल के प्रमुख देवी मन्दिर
October 14, 2026
प्रतियोगी परीक्षा की विफलता से राष्ट्रपति पद तक: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जीवन यात्रा
October 14, 2026
डंगचघिन दाई : दारिका नटनी की समाधि से लोकदेवी तक
October 13, 2026
राजा विक्रमादित्य की आराध्या: हरसिद्धी देवी
October 12, 2026
शक्ति उपासना का पर्व नवरात्र
October 11, 2026
सर्वपितृ अमावस्या: तर्पण और श्राद्ध का महात्म्य
October 10, 2026
भारतीय डाक सेवा की ऐतिहासिक यात्रा
October 09, 2026
पितृपक्ष: लोकजीवन में पुरखों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व
October 09, 2026
भारतीय ज्ञान परम्परा में सामाजिक समरसता
October 08, 2026
बैगा समुदाय में बच्चों के खेल
October 07, 2026
सौम्यता: भारतीय संस्कृति का मूल स्वभाव
October 06, 2026
संघर्ष, साधना और विजय: निराला की कालजयी कृति ‘राम की शक्ति पूजा’
October 17, 2026
शारदीय नवरात्रि: छत्तीसगढ़ के सोनपैरी और लचकेरा ग्राम की लोकपरम्पराएँ
October 17, 2026
छत्तीसगढ़ में शाक्त परंपरा: वैदिक और लोक-आस्था का संगम
October 17, 2026
चौहान सम्राटों की इष्टदेवी: महाशक्ति चामुण्डा
October 16, 2026
जनजातीय युवती वल्ली और भगवान कार्तिकेय का विवाह
October 16, 2026
शत्रु पर विजय का वरदान प्राप्त होता है बगुलामुखी देवी मन्दिर
October 15, 2026
विज्ञान, मानवीय संवेदना एवं राष्ट्र के प्रेरणापुंज - डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
October 15, 2026
भील जनजाति की लोकआस्था में रायकुंडा की महिषासुरमर्दिनी
October 15, 2026
सप्तमातृका: छत्तीसगढ़ और बस्तर की शक्ति परम्परा
October 15, 2026
हाड़ौती अंचल के प्रमुख देवी मन्दिर
October 14, 2026
प्रतियोगी परीक्षा की विफलता से राष्ट्रपति पद तक: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जीवन यात्रा
October 14, 2026
डंगचघिन दाई : दारिका नटनी की समाधि से लोकदेवी तक
October 13, 2026
राजा विक्रमादित्य की आराध्या: हरसिद्धी देवी
October 12, 2026
शक्ति उपासना का पर्व नवरात्र
October 11, 2026
सर्वपितृ अमावस्या: तर्पण और श्राद्ध का महात्म्य
October 10, 2026
भारतीय डाक सेवा की ऐतिहासिक यात्रा
October 09, 2026
पितृपक्ष: लोकजीवन में पुरखों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व
October 09, 2026
भारतीय ज्ञान परम्परा में सामाजिक समरसता
October 08, 2026
बैगा समुदाय में बच्चों के खेल
October 07, 2026
सौम्यता: भारतीय संस्कृति का मूल स्वभाव
October 06, 2026
This is the commets tab content.
This is the Tags tab content.
Note * Your email address will not be published. Required fields are marked
भारतीय संस्कृति और भाषाई विविधता
July 08, 2026