आज का पंचांग

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नक्षत्र: मूल | योग: वज्र | करण: बालव

पर्व विशेष : | तदनुसार 13 फ़रवरी 2026

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बसंत पंचमी विशेष: बसंत अबूझ मुहूर्त

बसंत पंचमी विशेष: बसंत अबूझ मुहूर्त

बसंत पंचमी का पर्व प्रत्येक वर्ष माघ माह में शुक्ल पक्ष के पंचम तिथि को मनाया जाता है इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन माँ वाग्देवी, ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी की जयंती के रूप में मनाया जाता है जो शुभ से शुभम है इसलिए इस दिन किसी भी कार्य को प्रारम्भ करने के लिए मुहूर्त की आवश्यकता नहीं पड़ती बसंत पंचमी तिथि स्वयं ही महामुहूर्त है।

बसंत ऋतु को मधुमास के नाम से भी जाना जाता है। इस समय पेड़ पौधे अपने पुराने पत्तों को त्याग कर नये कोमल पत्तों को धारण करती है। प्रकृति बसंत बेला में नये,फल, फूल, पत्तों से नव श्रृंगार करती है तथा वातावरण को सौरभमय कर शीतल समीर प्रवाहित करती है। जो मन को मोह लेने वाली होती है।

माता वीणापाणी इसी मधुमास के पंचम तिथि को प्रकट हुई थी जिसके कारण इस दिन माँ शारदे की सर्वत्र पूजा, अर्चना होती है। साहित्य जगत इस अवसर पर अनेकानेक आयोजन आयोजित करती है। माँ ब्रह्मविद्या के आगमन पर समस्त संसार के मनुष्य ही नहीं अपितु प्रकृति भी उत्सव मनाते हैं।

the hindu god saraswati sitting on top of a swan with a guitar in his hand and water lilies around him

वसंत पंचमी का त्योहार देश के अलग-अलग भागों में कई तरह से मनाया जाता है। पंजाब में सरसों के पीले खेतों में झूमते और पीले रंग की पतंगों को उड़ाते देखा जा सकता है। पश्चिम बंगाल में ढाक की थापों के बीच सरस्वती माता की पूजा की जाती है तो छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में प्रसिद्ध सिख धार्मिक स्थल, गुरु−का−लाहौर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि वसंत पंचमी के दिन ही सिख गुरु गोविंद सिंह का जन्म हुआ था।इसके अलावा यह भी मान्यता है कि इस दिन विद्या आरंभ करने से ज्ञान में वृद्धि होती है और वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त होने के कारण इस दिन कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त के संपन्न किया जा सकता है। वसंत पंचमी के दिन न सिर्फ गंगा स्नान, दान और देवी सरस्वती की पूजा होती है बल्कि कई अन्य कारणों से इसका विशेष महत्व होता है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में प्रसिद्ध सिख धार्मिक स्थल, गुरु−का−लाहौर में आयोजित मेला
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में प्रसिद्ध सिख धार्मिक स्थल, गुरु−का−लाहौर में आयोजित मेला 

वसंत ऋतु को मधुमास के नाम से भी जाना जाता है इसके आरम्भ होने के साथ सर्दी का समापन शुरू हो जाता है। इस मौसम में सभी वृक्ष पुरानी पत्तियों को त्यागकर नई पत्तियों व पुष्पों को जन्म देते हैं।

हमारे भारतवर्ष में वसंत पंचमी की तिथि पर विद्या और ज्ञान की अधिष्ठाती देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। इस कारण इस दिन इनकी पूजा का विशेष महत्व होता है।

वसन्त पंचमी की तिथि के दिन ही हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म हुआ था जिनकी जन्म तारीख 28.02.1899हुई। इस वजह से भी वसंत पंचमी का साहित्यिक दृष्टि से भी विशेष महत्व होता है।

वसंत पंचमी का त्योहार हमें महान योद्धा,महापराक्रमी पृथ्वीराज चौहान की भी स्मरण कराता है। उन्होंने विदेशी हमलावर मोहम्मद ग़ोरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया।

वसंत पंचमी पर बहुत से शुभ कार्य सपंन्न किए जाते हैं। वसंत पंचमी के दिन जिन व्यक्तियों को गृह प्रवेश के लिए कोई मुहूर्त ना मिल रहा हो वह इस दिन गृह प्रवेश कर सकते हैं। विवाह, भूमि पूजन, उद्घाटन समारोह, दानकर्म, धार्मिक प्रतिष्ठान आदि किया जाना सुखद व कल्याणप्रद शुभ माना जाता है।

बसंत पंचमी का उत्सव उत्साह व उमंगों को भरने वाला तथा मनोरम होता है। ऋतुराज बसंत व माँ वरदानी की कृपा सम्पूर्ण सृष्टि पर दृष्टिगोचर होता है। 

लेख - 
सरस्वती राजेश साहू
चिचिरदा बिलासपुर छत्तीसगढ़

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