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पर्व विशेष : | तदनुसार 14 मई 2026

राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट, हिंदी विभाग द्वारा “शिक्षण में आईसीटी के अनुप्रयोग: संसाधन एवं चुनौतियां” विषय पर 28-29 अगस्त 2025 को दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी सफलतापूर्वक आयोजित की गई। संगोष्ठी में देशभर से विद्वानों, कुलपतियों और शिक्षाविदों ने सहभागिता कर तकनीकी शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूरस्थ क्षेत्रों में आईसीटी के महत्व पर अपने विचार साझा किए। 50 से अधिक शोध पत्रों का वाचन हुआ तथा प्रतिभागियों ने शिक्षण में तकनीकी की भूमिका और चुनौतियों पर व्यापक विमर्श प्रस्तुत किया।
28 और 29 अगस्त 2025 को राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट के हिंदी विभाग द्वारा ऑनलाइन राष्ट्रीय सगोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न -
1 - माननीय प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट कुलपति सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा , उत्तराखंड
"शिक्षक को तकनीकी ज्ञान की जानकारी होना
अत्यंत आवश्यक है। बिना आईसीटी के शिक्षक अपूर्ण है।"
2- प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी नैनीताल, उत्तराखंड
"तकनीकी ज्ञान और सकारात्मक दृष्टि और निरंतर प्रयास और उनके अनुप्रयोगों से ही शिक्षण को दुर्गम स्थानों तक पहुंँचाया जा सकता है।"
3- प्रोफेसर आनंद सिंह उनियाल , संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून , उत्तराखंड
तकनीकी की पहुंँच दुर्गम स्थानों तक स्थित महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए लाभदायक है। दूरस्थ शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
4- माननीय पूर्व प्रोफेसर होशियार सिंह धामी कुलपति कुमाऊंँ विश्वविद्यालय नैनीताल , उत्तराखंड
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ज्ञान के स्तभ हैं। यूनेस्को के चार शिक्षा के प्रमुख स्तंभों में सुधार की आवश्यकता है। कुछ और स्तंभ भी जोड़े या घटाए जा सकते हैं।
5- प्रोफेसर डीन एच सी पुरोहित दून विश्वविद्यालय देहरादून , उत्तराखंड
आईसीटी से प्राप्त होने वाला शिक्षण सकारात्मक, सटीक और प्रभावपूर्ण होता है । सरकार की योजनाएं इस दिशा में सक्रिय और सकारात्मक रूप से कार्य कर रही हैं । परंतु दुर्गम और दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्रों में आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की बुनियादी पहुंँच और बढ़ानी होगी।
6- संयोजक डॉ. चंद्रकांत तिवारी , विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग, राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट धारचूला रोड़ पिथौरागढ़ उत्तराखंड
शिक्षण में आईसीटी के अनुप्रयोग, विषय के साथ सिद्धांत को मिलते हुए, पारंपरिक शिक्षण को प्रायोगिक रूप देते हुए व्यावहारिक शिक्षण को कक्षा कक्ष एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक सहज, सरल और स्थायित्व प्रदान करते हैं।

दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय सगोष्ठी शिक्षण में आईसीटी के अनुप्रयोग संसाधन एवं चुनौतियांँ 28 और 29 अगस्त 2025 राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट धारचूला रोड़ पिथौरागढ़ उत्तराखंड में सफलतापूर्वक संपन्न हो गई।
इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि माननीय प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट कुलपति सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा, विशिष्ट अतिथि माननीय प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी नैनीताल, विशिष्ट आभार अभिनंदन प्रोफेसर आनंद सिंह उनियाल संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून उत्तराखंड, माननीय प्रोफेसर होशियार सिंह धामी पूर्व कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल उत्तराखंड अपनी गरिमामय उपस्थिति के साथ संगोष्ठी की सफलता के लिए आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और इस प्रोग्राम को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
माननीय कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहिनी द्वारा आईसीटी के महत्व एवं दूरस्थ शिक्षा में उसकी उपयोगिता को दर्शाते हुए, दुर्गम क्षेत्रों में उसकी स्थिति को पहले से भी और मजबूत और स्थाई करने के बात कही गई। साथ ही जिस किसी शिक्षक को तकनीकी नहीं आती वह आज भी अधूरा है। तकनीकी का ज्ञान शिक्षक को सीखना चाहिए तभी वह अपने शिक्षण को बेहतर और कारगर बना सकता है। उनके द्वारा कहा गया कि इस प्रकार की संगोष्ठियांँ होती रहनी चाहिए। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की सफलता के लिए संयोजक को ढ़ेरों शुभकामनाएं और उनके द्वारा ऐसे कार्यक्रमों को आगे भी कराने की दिशा दृष्टि प्रदान की गई।
माननीय प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट कुलपति सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी की सफलता के लिए संयोजक डॉ चंद्रकांत तिवारी जी को आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी गई । साथ ही दुर्गम क्षेत्र में ऐसी संगोष्ठी करने पर संयोजक महोदय और समग्र महाविद्यालय को शुभकामनाएं प्रेषित की गई। और कहा गया कि ऐसी संगोष्ठी सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकती है, अगर शिक्षक अपने शिक्षण में ऐसी नई तकनीकी को प्रयुक्त करें। जिससे शिक्षण सरल और सहज बना सके।
विशिष्ट आभार अभिनंदन करते हुए प्रोफेसर आनंद सिंह उनियाल संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून द्वारा शुभकामना संदेश प्रेषित किया गया। संगोष्ठी की सफलता के लिए महाविद्यालय और संयोजक को ढेरों बधाइयां प्रेक्षित की गई।

प्राचार्य प्रोफेसर सुभाष चंद्र वर्मा द्वारा तकनीकी के महत्व और उसके अनुप्रयोगों को लेकर कहा गया कि यह वर्तमान समय की आवश्यकता है। शिक्षक का ज्ञान ही काफी नहीं है, तकनीकी उसके ज्ञान को वितरित और स्थाई बनाकर छात्रों तक अपनी पहुंँच बढ़ती है।
प्रथम दिवस के रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रोफेसर अमिता पांडेय भारद्वाज निदेशक मालवीय मिशन शिक्षण प्रशिक्षण केंद्र एवं प्रोफेसर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ , केंद्रीय विश्वविद्यालय नई दिल्ली की प्रोफेसर द्वारा शिक्षण और अधिगम में आईसीटी टूल्स संबंधी बहुत ही महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया गया। साथ ही हैंड ऑन प्रैक्टिस वर्क के रूप में भी इंटरेक्शन स्थापित किया गया। यह व्याख्यान संपूर्ण आनलाइन प्रतिभागियों जो पूरे भारत भर में जुड़े थे, सभी को बहुत रोचक, मनोरंजनपूर्ण और प्रभावपूर्ण लगा।
द्वितीय रिसोर्स पर्सन के रूप में पूर्व प्रोफेसर पूरन चंद टंडन दिल्ली विश्वविद्यालय हिंदी विभाग द्वारा हिंदी भाषा शिक्षण में मशीनी अनुवाद : संसाधन और चुनौतियों को लेकर बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर शोध दृष्टि के अनुरूप व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। जिसके तहत हिंदी के प्रति तकनीकी के साथ-साथ गहरी रुचि प्रकट की। प्रतिभागियों को मशीनी अनुवाद की सतर्कता के प्रति भी सचेत किया और अनुवाद के महत्व को भी साकार किया गया।
असिस्टेंट प्रोफेसर सत्येंद्र मुरली सहायक प्रोफेसर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग पूर्णिया विश्वविद्यालय जयपुर राजस्थान द्वारा मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में आईसीटी के अनुप्रयोग संसाधन और चुनौतियां विषय को लेकर आज की मीडिया और पत्रकारिता संबंधी विभिन्न मुद्दों को बताया और सोशल मीडिया के जमाने में ख़बरों का जाल किस प्रकार से फैलता है और तकनीकी किस प्रकार से इन खबरों को फैलाती है, और सही और गलत में अंतर ना समझते हुए लोग कभी-कभी गलत खबरों को भी सही मान लेते हैं । इत्यादि महत्वपूर्ण बिंदुओं पर और तकनीकी के पत्रकारिता संबंधी टूल्स पर भी बात की गई प्रतिभागियों को इनके द्वारा एक नई दृष्टि और शोधात्मक आयाम प्राप्त हुए।
माननीय प्रोफेसर होशियार सिंह धामी पूर्व कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय दोबारा यूनेस्को के शिक्षा संबंधी चार स्तंभों पर बात करते हुए, शिक्षा के महत्व और उसकी उपयोगिता और शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व को प्रतिपादित किया गया। आगे कहा गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज की शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख स्तंभ है। हम शिक्षा क्यों प्राप्त कर रहे हैं ? यह भी हमें विचार करना होगा । शिक्षा प्राप्त करने के बाद हमारा उद्देश्य क्या है और क्या दिशा दृष्टि होगी । सबसे अधिक व्यक्ति अपनी परिस्थितियों और अपने अभाव और दबाव से सीखता है। आगे उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर यूनेस्को के शिक्षा के चार स्तंभों में कुछ नया शोध करने के बाद भी कही है। आगे मैं अभी उसी दिशा में कार्य कर रहा हूंँ।

विनय कुमार शुक्ल द्वारा कोलकाता से राजभाषा हिंदी के क्षेत्र में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के महत्व को प्रतिपादित करते हुए नई तकनीक और राजभाषा संबंधी नए सॉफ्टवेयर पर बातें की गई। उनका व्याख्यान राजभाषा हिंदी की स्थिति और वर्तमान समय की वैश्विक परंपरा के मध्य तुलनात्मकता का भाव प्रकट करते हुए तकनीकी के महत्व पर प्रतिपादित करता है।
द्वितीय दिवस शोध पत्रों के वाचन और संपूर्ण भारत से जुड़े ऑनलाइन प्रतिभागियों का रहा। शोध पत्र समिति के अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सुभाष चंद्र वर्मा के अध्यक्षता में पूर्ण हुआ। शोध पत्रों का मूल्यांकन डॉ संदीप कुमार , डॉ पूर्णिमा विश्वकर्मा , डॉ चंद्रा नबियाल , डॉ सुनीता जोशी , डॉ पिंकी और डॉ पवन शाह और संयोजक डॉ चंद्रकांत तिवारी द्वारा किया गया।
शोध पत्रों के वाचन में भारत के संपूर्ण राज्यों के 50 से भी अधिक शोध पत्रों का वाचन ऑनलाइन माध्यम से किया गया। जिसमें प्रतिभागियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम प्रातः सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम के 5:00 तक दोनों ही कार्य दिवसों 28 और 29 अगस्त 2025 में पूर्ण हुआ। द्वितीय दिवस में 1:00 से प्रोफेसर एच सी पुरोहित दून विश्वविद्यालय देहरादून द्वारा 21वीं सदी में आईसीटी शिक्षा साधन संसाधन चुनौतियां और समाधान विषय पर बहुत ही महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया गया। जिसमें वर्तमान दौर में आईसीटी के महत्व, सम-सामयिक प्रसंग एवं शिक्षा व्यवस्था में उसकी स्थिति संभावनाएं चुनौतियां संसाधन और शिक्षक की रुचि और सरकार की सहभागिता और योजनाएं ऐसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं द्वारा उन्होंने ऑनलाइन प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
शिक्षण में आईसीटी के अनुप्रयोग : संसाधन एवं चुनौतियांँ ' दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी में संपूर्ण भारत के विभिन्न राज्यों से प्रतिभागियों ने सहभागिता निभाई और अपने शोध पत्रों का वाचन किया।
इस अवसर पर ऑनलाइन माध्यम से जुड़े अतिथियों के स्वागत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए डॉ संदीप कुमार , डॉ पूर्णिमा विश्वकर्मा , डॉ चंद्रा नबियाल , डॉ सुनीता जोशी , डॉ पिंकी और डॉ पवन शाह द्वारा सकारात्मक संगोष्ठी के प्रवाह को सुनिश्चित किया। जिससे अतिथियों द्वारा संगोष्ठी की सफलता के लिए आशीर्वाद प्रदान किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के ही डॉ अतुल चंद्र, डॉ नवीन कुमार , डॉ राहुल तिवारी द्वारा संगोष्ठी में अपनी उपस्थिति दर्ज की। प्रथम दिवस समापन के अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ अतुल चंद्र द्वारा अतिथियों का धन्यवाद और आभार प्रकट किया गया।
द्वितीय दिवस के समापन के वक्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं आपसी सद्भाव के तहत ऑनलाइन माध्यम द्वारा सांस्कृतिक लोकगीत एवं संरक्षित जीवन परिवेश को दर्शाते हुए प्रोफेसर लता चौहान मैम बेंगलुरु द्वारा श्री कृष्ण स्तुति पर एक सुंदर गायन प्रस्तुत किया गया। इसी क्रम में भारत भर से जुड़े भिन्न-भिन्न शहरों के मुख्य प्रतिभागियों ने अपने जीवन के अनुभव और शिक्षा में उनके अनुप्रयोगों को व्यावहारिक रूप से बताते हुए लोक संस्कृति के विविध पक्षों एवं आयामों को चित्रित करते हुए अपने मन की बात द्वारा कार्यक्रम को और भी अधिक रसमय और आनंद से सराबोर कर दिया।
प्राचार्य द्वारा संगोष्ठी के संयोजक डॉ. चंद्रकांत तिवारी को इस दुर्गम स्थान पर संगोष्ठी आयोजित कराने हेतु विशिष्ट आभार प्रकट किया गया।
इस अवसर पर समग्र महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति से यह दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यक्रम अपने निर्धारित आयामों पर एवं उद्देश्यों पर सकारात्मक दृष्टि रखता है। ऐसा प्राचार्य द्वारा कहा गया।