संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख कृष्ण द्वादशी | गुरुवार
नक्षत्र: रेवती | योग: प्रीति | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 मई 2026
मानव-सभ्यता के विकासक्रम का जब हम अध्ययन करते हैं, तो पाते हैं कि पूरे विश्व में सभ्यता-विकास के चरणों में अद्भुत साम्य रहा है। पर अलग-अलग भौगोलिक परिवेशों के कारण जीवन-दृष्टि की विविधताओं ने विश्व के अलग-अलग भागों में जन्मीं इन सभ्यताओं में कुछ विशेषताएँ भी उत्पन्न की हैं। इसी क्रम में भारत के सुरम्य भौगोलिक क्षेत्र में जन्मीं विशिष्ट जीवन-दृष्टि नें हमारी भारतीय संस्कृति को जन्म दिया। और यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि भारतीय सभ्यता मानव-सभ्यता की सर्वोच्च विकसित अवस्था है, क्योंकि काल के प्रवाह में अनेक प्राचीन सभ्यताओं ने जहाँ अपनी प्रासंगिकता के साथ-साथ अस्तित्व भी खो दिया, वहीं भारत की सभ्यता अपने चिर-पुरातन सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक मूल्यों को सहेजते हुए आज भी प्रवहमान है। अत्यधिक उदार जीवन-दर्शन इसका मूल है।
लेकिन पराधीनता की पिछली कुछ शताब्दियों में हमारी उस जीवन-दृष्टि में उल्लेखनीय ह्रास हुआ, जिसने भारत की स्वयं के प्रति दृष्टि को भी बदलकर रख दिया। फलस्वरूप यहाँ के विविध लोककलाओं, वाचिक परम्पराओं के साथ-साथ लोकजीवन के सभी पहलुओं को देखने की हमारी दृष्टि भी दूषित हो गई है। वैश्वीकरण तथा उसके बाद सूचना-प्रौद्योगिकी व इण्टरनेट के विकास ने इन परम्पराओं को विकृत भी किया, जिससे नई पीढ़ी में 'स्व' के प्रति व्यापक भ्रम की स्थिति निर्मित हुई है। सर्वाधिक युवाजनसंख्या वाले हमारे भारत के लिए यह स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं मानी जा सकती।
यही कारण है कि दक्षिण कोसल टुडे समूह के रूप में हमने यह निश्चय किया कि भारत की समृद्ध संस्कृति एवं परम्पराओं के प्रति लोगों की सोई हुई चेतना को हमें जगाना है। इसके लिए हमारा यह प्रयास है कि हम इतिहाससिद्ध तथ्यों, लोककथाओं, वाचिक एवं श्रुति परम्पराओं, सामाजिक व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन कर कला व संस्कृति का एक ऐसा इनसाइक्लोपीडिया बनाएँ, जो भारत को समझने में न केवल भारतीयों का, बल्कि पूरे विश्व समुदाय का सहाय्यभूत हो। इसके लिए ऐतिहासिक तथ्यों का शोधपूर्वक संकलन करना, विभिन्न मौखिक एवं श्रुति परम्पराओं का अभिलेखन करना, तथा भारत की सभ्यता और यहाँ के लोकजीवन के विविध पक्षों को उजागर करने के इच्छुकजनों को एक मंच प्रदान करना; यह हमारा मुख्य प्रयोजन है।
भारतीय संस्कृति के सभी व्यक्त-अव्यक्त स्वरूपों पर कार्य हेतु हम प्रतिबद्ध हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर हमारे इस अभियान का केन्द्र है, और पौराणिक काल से इस क्षेत्र को दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता रहा है। यही कारण है कि तथ्य इस मीडिया समूह के नामकरण के पीछे की मूल प्रेरणा है। समूह के शुभंकर में दिख रहा उदीयमान सूर्य सोई हुई भारतीय चेतना को जगाने के हमारे मुख्य प्रयोजन को दर्शाता है। शुभंकर में दर्शायी गई लेखनी इस प्रयास में लेखकों एवं शोधकर्त्ताओं के योगदान की आवश्यकता को निरुपित करती है।
श्री वेद प्रकाश सिंह ठाकुर, कार्यकारी सम्पादक
श्रीमती सोनल वाजपेयी, सदस्य