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Yearly Archives: 2019

देखिए हिंगलाज देवी की भादो जात्रा (वीडियो)

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की केशकाल घाटी के नीचे बीहड़ वन में गौरगांव से 6 किमी की दूरी पर हिंगलाज माता का स्थान है। यहाँ प्रतिवर्ष भादो जात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें 56 गांव के सोरी कुल के आदिवासी भाग लेते हैं। देवी हिंगलाज पौराणिक परम्परा से आती …

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कौन हैं वे लोग जिनका मानव समाज को सभ्य एवं उन्नत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है?

आदि मानव ने सभ्यता के सफ़र में कई क्रांतिकारी अन्वेन्षण किए, कुछ तो ऐसे हैं जिन्होने जीवन की धारा ही बदल दी। प्रथम अग्नि का अविष्कार था। सोचकर ही देखिए कि अग्नि का अविष्कार कितना क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया तत्कालीन समाज में। अग्नि के अविष्कार के बाद मिट्टी में से …

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जानिए कुंभ मेला कब से और क्यों भरता है?

बहरहाल पुनः प्राचीन नाम के साथ प्रयागराज के संगम तट पर कुंभ मेला शुरू हो चुका है और इस समय इसकी भव्यता और दिव्यता दोनों ही चर्चा का विषय बने हुये हैं। नाम परिवर्तन के आकर्षण मे अथवा अर्धकुंभ की व्यापकता को बढ़ाने के लिए अब यह सर्वत्र कुम्भ मेले …

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शक्तिशाली एवं प्रमुख लोकदेवता राजाराव : बस्तर अंचल

एक गीत याद आता है, अंधेरी रातो मे सुनसान राहों पर, हर ज़ुल्म मिटाने को एक मसीहा निकलता है…… कुछ ऐसी कहानी बस्तर के लोकदेवता राजाराव की है। खडग एवं खेटक घारण कर, घोड़े पर सवार होकर राजाराव गाँव की सरहद पर तैनात होते हैं और सभी तरह की व्याधियों …

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देवगुड़ी में विराजित भुमिहार देवता एवं मौली माता भुवनेश्वरी

लोक बगैर देव नहीं, देव बगैर लोक नहीं। सनातन संस्कृति में देवी/ देवताओं की स्थापना/आराधना की जाती है, इस संस्कृति की धारा में वैदिक, पौराणिक एवं लोक देवी/देवता होते हैं। इन देवी/देवों में लोक देवता मानव के सबसे करीबी माने जा सकते हैं क्योंकि ये स्वयं भू हैं, इनसे लोक …

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आदिवासी वीरांगनाओं की स्मृति में भरता है यह कुंभ जैसा भव्य मेला

मेदाराम दंडकारण्य का एक हिस्सा है, यह तेलंगाना के जयशंकर भूपालापल्ली जिले में गोदावरी नदी की सहायक नदी जामपन्ना वागु के किनारे स्थित है। यहाँ प्रति दो वर्षों में हिन्दू वनवासियों का विश्व का सबसे बड़ा (जातरा) मेला भरता है। गत वर्ष 2018 के चार दिवसीय मेले में लगभग एक …

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ऐसे मनाया जाता है सरगुजा में लोकपर्व छेरता (छेरछेरा)

सरगुजा अंचल में कई लोकपर्व मनाएं जाते हैं, इन लोक पर्वों में “छेरता” का अपना ही महत्व है। इसे मैदानी छत्तीसगढ़ में “छेरछेरा” भी कहा जाता है। इस लोकपर्व को देशी पूस माह की शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस त्यौहार को समाज के सभी वर्ग परम्परागत रुप से …

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पूस पुन्नी भजन मेला : निराकार राम का साधक रामनामी सम्प्रदाय समाज 

रामनामी समाज एक बड़ा सम्प्रदाय है जो छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यतः रायगढ़ ,सारंगढ़ ,बिलाईगढ़ , कसडोल , जांजगीर, बिलासपुर, जैजैपुर, मालखरौदा, चंद्रपुर, पामगढ़, नवागढ़, अकलतरा के सुदूर अंचल से शहर तक निवासरत हैं। रामनामी समाज की आबादी लगभग 5 लाख होगी जो 300 गांव से अधिक गांवों में निवास करते है …

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दक्षिण कोसल : कल और आज -1

पृथ्वी की उत्पत्ति के उपरांत ही देश, काल के अनुसार ही दुनिया भर में स्थानों के नाम समय-समय पर बदलते रहे है। हमारे लेख का विषय छत्तीसगढ़, जिसे दक्षिण कोसल का नाम इतिहासकार देते हैं और आज भी दक्षिण कोसल ही छत्तीसगढ़ क्षेत्र की पहचान के रूप में मान्य है। …

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स्वामीजी का वाङ्गमय पढ़कर मेरी देशभक्ति हजारों गुना बढ़ गई है : महात्मा गांधी

नवयुग के निर्माता स्वामी विवेकानन्दजी ने कहा था, “मैं भविष्य को नहीं देखता, न ही उसे जानने की चिन्ता करता हूं। किन्तु, एक दृश्य मैं अपने मन:चक्षुओं से स्पष्ट देख रहा हूं, यह प्राचीन मातृभूमि एक बार पुन: जाग गई है और अपने सिंहासन पर आसीन है – पहले से …

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